नई दिल्ली। भारतीय मूल के लोगों पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है की डोनाल्ड ट्रम्प ने एक और भारतवंशी पर अपना भरोसा जताया है। डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के डायरेक्टर के तौर पर जय भट्टाचार्य को नियुक्त किया है।
कोलकाता में जन्मे भट्टाचार्य एक अर्थशास्त्री है। जय भट्टाचार्य 47.3 अरब डॉलर के बजट की निगरानी करेंगे अपनी जिम्मेदारी के दौरान। इसी बजट को अमेरिका मेडिकल रिसर्च पर खर्च करने के लिए रखेगी।
भट्टाचार्य ने जताई खुशी
NHI के डायरेक्टर बनने के बाद जय भट्टाचार्य ने अपनी खुशी का इजहार किया है। भट्टाचार्य ने कहा की नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ के डायरेक्टर के तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मुझे नामांकित किया गया है। इसके लिए मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। अमेरिकी वैज्ञानिक संस्थानों में हम सुधार करेंगे। ताकि लोग एक बार फिर से उन पर भरोसा कर सके।
भट्टाचार्य को नॉमिनेट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप दिखे खुश
जय भट्टाचार्य के नॉमिनेशन का ऐलान करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प खुश नजर आए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भट्टाचार्य स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर काम करेंगे और इससे हेल्थ सेक्टर में सुधार होगा जिससे लोगों की सुरक्षा होगी। आपको बता दें की कोविड 19 महामारी के दौरान जय भट्टाचार्य ने अमेरिका के स्वास्थ्य नीतियों की जमकर आलोचना की थी। इसके बाद वह सुर्खियों में आए थे।
जय भट्टाचार्य का जन्म 1968 में कोलकाता में हुआ था। भट्टाचार्य ने 1997 में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। यह उपाधि उन्हें स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से चिकित्सा में प्राप्त हुई है। इसके बाद भट्टाचार्य ने उसी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। जय भट्टाचार्य वर्तमान में नेशनल ब्यूरो ऑफ़ इकोनॉमिक्स रिसर्च में शोध सहयोगी है।
भट्टाचार्य को नॉमिनेट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप दिखे खुश
एक और भारतवंशी को डोनाल्ड ट्रंप ने दी बड़ी जिम्मेदारी
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नेपाल के आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर जेन- Z प्रदर्शनकारियों ने भारतीय मीडिया को पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग के आरोप में लाइव प्रसारण करने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों को कवरेज करने से रोका और उन्हें इलाकों से बाहर जाने को कहा। कुछ कार्यकर्ताओं ने मीडिया पर सत्ताधारी पक्ष के समर्थन का आरोप लगाया। इस घटना के बाद, नेपाली सेना ने भी पत्रकारों को आगे तनाव से बचने के लिए क्षेत्र छोड़ने का निर्देश दिया।
Gen-Z लीडर बोले- संविधान नहीं, संसद भंग करना मकसद
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अमेरिका में पाकिस्तानी मूल का युवक गिरफ्तार, विश्वविद्यालय में हमले की रची थी साजिश
अमेरिका: पाकिस्तानी मूल का युवक सामूहिक गोलीबारी की साजिश में गिरफ्तार, भारी हथियार बरामद
अमेरिका में पाकिस्तान में जन्मे एक युवक को डेलावेयर विश्वविद्यालय में सामूहिक गोलीबारी की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। न्यू कैसल काउंटी पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान 25 वर्षीय लुकमान खान के रूप में हुई है, जो विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र है और अमेरिकी नागरिक है।
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पुलिस ने 24 नवंबर की रात खान को एक पार्क में संदिग्ध हालात में उसके ट्रक के पास देखकर रोका। तलाशी में उसके पास से एक ग्लॉक पिस्तौल, 27 राउंड की मैगजीन, बॉडी आर्मर प्लेटें और ऐसा किट मिला जिससे पिस्तौल को जोड़कर सेमी-ऑटोमैटिक राइफल में बदला जा सकता था।
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नेपाल के बाद फ्रांस में भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन,1 लाख लोग सड़कों पर
नेपाल के बाद अब फ्रांस में भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। देश बंदी के समर्थन और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 लाख से ज्यादा लोग सड़क पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह आगजनी भी की है। सरकार ने 80 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है। अब तक 200 से ज्यादा उपद्रवी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
. प्रदर्शन का स्वरूप और हिंसात्मक घटनाएंसड़कों पर प्रदर्शन, ट्रैफ़िक में रुकावट, आगजनी: प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर बैरिकेड लगाए, कूड़ा पात्र जलाए, एक बस Rennes में जलाई गई, और दक्षिण-पश्चिम में पावर लाइन क्षतिग्रस्त कर दी जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ।
Bloquons Tout’ ('Block Everything') आंदोलनयह एक सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड चैट्स से शुरू हुआ आंदोलन है, जिसने 10 सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और कार्य बंदी (shutdown) के लिए आह्वान किया
आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था Macron सरकार की प्रस्तावित austerity (कंटीले बजट-शमन) नीतियों का विरोध — जैसे 2026 के लिए सार्वजनिक खर्च में कटौती, दो राष्ट्रीय छुट्टियों का हटाया जाना, पेंशन फ्रीज, स्वास्थ्य क्षेत्र में भारी कटौती आदि।
30 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन
फ्रांस में बुधवार से शुरू हुए ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ यानी ‘सब कुछ रोक दो’ मूमेंट में 30 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस प्रदर्शन में 1 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं। इस प्रदर्शन को वामपंथी पार्टी फ्रांस अनबाउंड (LFI) का भी समर्थन मिला है। इसी बीच फ्रांस के ट्रेड यूनियनों ने भी कहा था कि वे 18 सितंबर को बजट प्रस्तावों के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
विरोध प्रदर्शन कर रहे 200 लोग गिरफ्तार
फ्रांस के गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलो ने बताया कि बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों और कस्बों में सड़कों को जाम कर दिया। जगह-जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। मंत्री ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत में ही करीब 200 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
ट्रम्प बोले- भारत से रिश्ते रीसेट करने को तैयार, मोदी से दोस्ती पर जताया भरोसा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुक्रवार को भारत के खिलाफ दिए गए अपने बयान पर करीब 12 घंटों के अंदर ही बैकफुट पर चले गए। उन्होंने शाम 6-7 बजे के बीच व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल पर कहा- 'मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने के लिए हमेशा तैयार हूं।' इससे पहले शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे उन्होंने सोशल मीडिया ट्रुथ पर लिखा था, 'ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है उनका भविष्य अच्छा होगा।'
वहीं, शनिवार को 9:45 बजे पीएम मोदी ने ट्रम्प के बयान को शेयर करते हुए X पर लिखा- राष्ट्रपति ट्रम्प की भावनाओं और हमारे संबंधों को लेकर उनके विचारों की तहे दिल से सराहना करता हूं और उनका पूर्ण समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा- भारत-अमेरिका के बीच एक पॉजिटिव और दूरदर्शी रणनीतिक साझेदारी है।
प्रेस ब्रीफिंग में ट्रम्प ने भारत और दूसरे देशों के साथ चल रही व्यापार बातचीत को अच्छा बताया, लेकिन यूरोपीय संघ (EU) के गूगल पर 3.5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने पर नाराजगी जताई। इसके अलावा उन्होंने साफ किया कि वे भारत के रूसी तेल खरीदने के कारण निराश हैं। उन्होंने कहा- 'हमने भारत पर इसके लिए 50% का भारी टैरिफ लगाया है।'
पूर्व अमेरिकी NSA बोले थे- ट्रम्प-मोदी की दोस्ती खत्म
ट्रम्प की टिप्पणी से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने 4 सितंबर को कहा था कि ट्रम्प और PM नरेंद्र मोदी के बीच पहले की खास दोस्ती अब खत्म हो चुकी है। ब्रिटिश मीडिया LBC को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने ट्रम्प की नीति की आलोचना करते हुए कहा था, 'व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया, जिससे मोदी रूस और चीन के करीब आ गए। चीन ने खुद को अमेरिका और ट्रम्प के विकल्प के रूप में पेश किया है।' बोल्टन ने इसे एक बड़ी गलती है बताया था। उन्होंने कहा- 'इसे अब ठीक नहीं किया जा सकता, क्योंकि स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।'
यूक्रेन जंग खत्म करने के लिए भारत पर टैरिफ लगाया
भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद से भारत और अमेरिका के बीच संबंध खराब हो गए हैं। भारत समेत बाकी देशों पर हाई टैरिफ लगाने के मामले की सुनवाई US कोर्ट में चल रही है। ट्रम्प ने 4 सितंबर को कोर्ट में भारत पर टैरिफ लगाने को जरूरी बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका को बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान होगा। ट्रम्प ने इससे पहले निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि ट्रम्प विदेशी सामान पर भारी टैरिफ नहीं लगा सकते।
ट्रम्प ने कहा था कि भारत पर लगाए गए टैरिफ रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए बहुत जरूरी हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए टैरिफ लगाया गया, ताकि युद्ध खत्म करने में मदद मिले। ट्रम्प ने कहा कि निचली अदालत का फैसला उनकी पिछले 5 महीनों की व्यापारिक बातचीत को मुश्किल में डाल सकता है। इससे यूरोपीय यूनियन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ हुए समझौते खतरे में पड़ सकते हैं।
ट्रम्प ने कहा- भारत टैरिफ लगाकर अमेरिका को मार रहा
ट्रम्प ने बुधवार (3 सितंबर) को कहा था कि भारत टैरिफ लगाकर हमें (अमेरिका) मार रहा है। उन्होंने द स्कॉट जेनिंग्स रेडियो शो में बात करते हुए कहा कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश अपने ऊंचे टैरिफ से अमेरिका को मार रहे हैं। ट्रम्प ने कहा- 'मैं टैरिफ को दुनिया में सबसे बेहतर समझता हूं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश था, लेकिन अब उन्होंने मुझे जीरो टैरिफ का ऑफर दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने भारत पर टैरिफ नहीं लगाए होते, तो भारत ऐसा ऑफर कभी नहीं देता। ट्रम्प ने टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक ताकत के लिए जरूरी बताया और कहा कि टैरिफ के बिना वे यह ऑफर नहीं देते। इससे हम आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
टैरिफ हटवाने के लिए भारत को माननी होंगी अमेरिका की शर्तें
वहीं, अमेरिका के उद्योग मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने शुक्रवार को ब्लूमबर्ग टीवी से बात करते हुए भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ हटाने के लिए तीन शर्त रखीं। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना पड़ेगा, BRICS से अलग होना होगा और अमेरिका का सपोर्ट करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर आप (भारत) रूस और चीन के बीच ब्रिज बनना चाहते हैं तो बनें, लेकिन या तो डॉलर का या अमेरिका का समर्थन करें। अपने सबसे बड़े ग्राहक का सपोर्ट करें या 50% टैरिफ चुकाएं।हालांकि, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत जल्द ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा बातचीत के लिए तैयार है।
ये मोदी की जंग हैं... ट्रंप के सलाहकार ने टैरिफ वॉर के बीच भारत से जोड़ा रूस-यूक्रेन युद्ध का कनेक्शन
भारत पर बीते बुधवार यानी 27 अगस्त से 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ (American Tariff) लागू हो गया है। इससे भारतीय निर्यातकों की परेशानी बढ़ गई है। अब अमेरिका की नेशनल इकनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर और व्हाइट हाउस के सलाहकार केविन हैसेट ने सीधी धमकी दी है। केविन ने कहा कि अगर भारत ने अमेरिका के लिए अपने बाजार नहीं खोले तो राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर नरम नहीं होंगे। केविन ने कहा कि मुझे लगता है कि यह एक जटिल रिश्ता है। इसका एक हिस्सा रूस पर दवाब डालने की कोशिशों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ताकि शांति समझौता हो सके और लाखों लोगों की जानें बचाई जा सके। उन्होंने फिर दोहराया कि भारत अपना बाजार खोलने में अडियल रवैया अपना रहा है।
रूस-यूक्रेन जंग में शांति का रास्ताअमेरिकी डिप्लोमैट और राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने भी भारत और रूस तेल खरीद पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने रूसी तेल खरीदकर जंग को बढ़ावा देने का काम किया है। अगर भारत अपना रुख जारी रखता है तो अमेरिका और भी अधिक कड़े कदम उठाएगा। उन्होंने एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि रूस-यूक्रेन जंग में शांति का रास्ता आंशिक रूप से भारत से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ को बेहद आसानी तरीके से कम किया जा सकता है। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे तो 25 फीसदी टैरिफ घट जाएगा। मोदी एक महान नेता हैं। भारत बड़ा लोकतंत्र है। उसे बेहद समझदार लोग चला रहे हैं।
मोदी और ट्रंप के बीच रिश्ते अच्छेस्कॉट ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंध जटिल हैं, लेकिन दोनों देश के एकसाथ आ जाएंगे। अमेरिकी न्यूज चैनल फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा, ' नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों में हालिया असहजता सिर्फ रूसी तेल खरीद के कारण नहीं है, बल्कि व्यापार समझौता पर पहुंचने में देरी के कारण भी है। भारत और अमेरिका के बीच संबंध जटिल हैं, लेकिन पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच निजी रिश्ते बेहद अच्छे हैं। भारत ने टैरिफ नीति की घोषणा के बाद बातचीत शुरू की थी, लेकिन हम अब तक कोई नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। मुझे शुरुआती दौर में लगा था कि यह ट्रेड डील जल्द हो जाएगा।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र
अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि हम अतत: एक साथ आ जाएंगे। टैरिफ को लेकर बातचीत के दौरान मैं यही बात कही। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में जब भी दरार आती है तो घाटे वाला देश फायदे में होता है। चिंता मुनाफे वाले देश को होती है। भारतीय हमें सामान बेच रहे हैं, लेकिन उनके यहां टैरिफ बहुत उंचा है। उनके साथ हमारा घाटा बहुत बड़ा है।