राजस्थान के जैसलमेर जिले में 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले के दो सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र पास नहीं हुआ, जबकि 22 सरकारी और 2 निजी स्कूलों का परिणाम 50 प्रतिशत से भी कम रहा।
जानकारी के अनुसार, नाचना क्षेत्र के बाहला और पांचे का तला स्थित सरकारी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी परीक्षा में सफल नहीं हो सका। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाती है।
रिजल्ट का आंकड़ा
जिले में जहां एक ओर 172 सरकारी स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किया, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। इससे शिक्षा विभाग के सामने गुणवत्ता सुधार की चुनौती खड़ी हो गई है।
शिक्षकों की कमी बनी बड़ी वजह
भुर्जगढ़ के प्रधानाचार्य गणपतराम ने बताया कि गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री आए छात्रों की कॉपियों की दोबारा जांच करवाई जाएगी और आगे सुधार के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि स्कूल में 19 स्वीकृत पदों में से 7 पद खाली हैं। कई विषयों जैसे गणित, विज्ञान, संस्कृत और अंग्रेजी के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई।
वहीं प्रभुपुरा गांव के हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य सुभाष चौधरी ने बताया कि उनके स्कूल में 21 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 7 शिक्षक ही कार्यरत हैं और 14 पद खाली हैं। वरिष्ठ शिक्षकों की कमी भी परिणाम पर असर डाल रही है।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
भुर्जगढ़ के सरपंच प्रतिनिधि जसवंतसिंह जोधा ने कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं पर खर्च तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि खराब परिणाम शिक्षा व्यवस्था की असल स्थिति को उजागर कर रहे हैं।
निष्कर्ष:
जैसलमेर में सामने आए ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
Golden Hind Desk