भोपाल। काली रात क्या होती है अगर ये जानना है तो भोपाल वालों से पूछों जिन्होंने काली रात में अपनों खोया है। जिन परिवारों की रोशन जिंदगी में हमेशा के लिए अंधेरा छा गया। उस रात मौत तांडव कर रही थी और हर तरफ चीज पुकार सुनाई दे रही थी। उस दिन सिर्फ लोग ही नहीं मारे थे बल्कि इंसानियत भी मर गई थी। अपने आप को बचाने के लिए मां बच्चों को छोड़कर और बच्चे अपने मां-बाप को छोड़कर भाग रहे थे। ये रात थी 1984 में 2 दिसंबर और 3 दिसंबर की मध्यरात्रि की। भोपाल वालों के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए भी सबसे काली रात थी। इस घटना को 40 साल बीत गए हैं लेकिन इस घटना को याद कर आज भी लोग सहम उठते हैं। इस घटना के बारे में बात कर लोगों के आंसू निकल आते हैं।
सन 1984 देश के लिए सबसे मनहूस
सन 1984 देश के लिए सबसे मनहूस रहा। इसी साल अक्टूबर के आखिरी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी। उसके अगले महीने नवंबर में हजारों सिखों को जिंदा जला दिया गया। और उसके बाद 2 दिसंबर की रात भोपाल में जहरीली गैस का रिसाव हुआ। इस जहरीली गैस ने हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया। इन तीनों ही घटनाओं में अलग-अलग कारण सामने आए। पहले धोखे की, दूसरी में क्रूरता की और तीसरी महिला प्रवाही की पराकाष्ठा देखने को मिली।
प्रशासन की लापरवाही
भोपाल में गैस त्रासदी हो सकती है इसको लेकर पत्रकार राजकुमार केसवानी ने घटना के करीब ढाई साल पहले ही शासन प्रशासन के साथ-साथ कंपनी को आगाह कर दिया था। केसवानी ने 26 सितंबर 1982 को एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर का टाइटल था बचाइए हुजूर इस शहर को बचाइए। पत्रकार की केसवानी ने यूनियन कार्बाइड प्लांट में रखरखाव और सुरक्षा मानकों की अवहेलना के चलते एमआईसी लीक होने की आशंका जताई थी। लेकिन इस रिपोर्ट पर किसी ने भी गौर करना जरूरी नहीं समझा। इसके बाद केसवानी ने 2 और लेख लिखे। जिसका शीर्षक था ज्वालामुखी के मुहाने बैठा भोपाल और ना समझोगे तो आखिर मिट ही जाओगे।
प्लांट से हुआ गैस का रिसाव
2 दिसंबर 1984 की रात गैस का रिसाव शुरू हुआ। सरकारी आंकड़ों की माने तो भोपाल मरने वालों की संख्या 3787 थी जबकि सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर 15724 संख्या बताई गई। वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार मरने वालों की संख्या 33 हजार से ज्यादा थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी थी। इस पूरे मामले में 11 अगस्त 2010 को उस वक्त की विपक्ष नेता सुषमा स्वराज ने भोपाल गैस कांड को लापरवाही की पराकाष्ठा बताया।
मौत अचानक नहीं बरसी- सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज ने पूरे मामले को लेकर कहा की मौत अचानक नहीं बरसी थी। नहीं ऊपर से आकर टपक पड़ी थी। इस मौत में 3 साल तक दरवाजा खटखटाया था। 3 साल तक शासन प्रशासन को आगाह भी किया था। फैक्ट्री वालों को दस्तक देकर कहा था कि तुम्हारे द्वार पर ही खड़ी हूं। अगर मुझे लौटा सकते हो तो लौटा दो। अगर अंदर प्रवेश कर गई तो हजारों को लील जाऊंगी। मौत अपने आने का घंटे बाजा बजा कर शोर मचा रही थी। लेकिन अफसोस है कि यह आवाज बस्ती वालों ने, श्रमिक संगठनों ने और प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों ने सुनी। पत्रकारों ने सुनी और बार-बार सियासतदानों व फैक्टरी आला-अधिकारियों को सुनाने की कोशिश की, लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि प्रशासन ने पैसे के लालच में, राजनेताओं ने सत्ता के मद मौत की आवाज को अनसुना कर दिया। लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया।
भोपाल गैस त्रासदी को चार दसक हुए पूरे
भोपाल से पूछिए कैसी होती है काली रात, काली रात ने भोपाल से अपनों को छीना
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रीति तिवारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर भड़के सलमान खान, बोले- अपमान की भी एक सीमा होती है
बिग बॉस 20: रीति तिवारी की टिप्पणी पर सलमान खान नाराज, बोले- अपमान की भी एक सीमा होती है
रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ में इन दिनों कंटेस्टेंट्स के बीच विवाद लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। घर में हुए एक डिस बैटल टास्क के बाद रीति तिवारी की कुछ टिप्पणियां चर्चा का विषय बन गई हैं। अब वीकेंड का वार के आगामी एपिसोड में शो के होस्ट सलमान खान इसी मामले को लेकर रीति तिवारी से सवाल करते नजर आएंगे। शो के प्रोमो में सलमान रीति के बयान और उनके व्यवहार पर नाराजगी जाहिर करते दिखाई दे रहे हैं।
प्रोमो में सलमान खान रीति से सवाल करते हैं कि उन्होंने डिस बैटल के दौरान ऐसी बातें क्यों कहीं और बाद में उन बातों पर गर्व क्यों जताया। सलमान का कहना है कि किसी कंटेस्टेंट को डिस करना टास्क का हिस्सा हो सकता है, लेकिन किसी का अपमान करने की भी एक सीमा होती है।
डिस बैटल टास्क से शुरू हुआ विवाददरअसल, ‘बिग बॉस 20’ के घर में कंटेस्टेंट्स के बीच एक डिस बैटल टास्क रखा गया था। इस टास्क में प्रतिभागियों को एक-दूसरे को डिस यानी रोस्ट करना था। टास्क के दौरान रीति तिवारी का मुकाबला उदिति सिंह से होना था, लेकिन उदिति के पीछे हटने के बाद काजी तौकीर उनके सामने आए।
टास्क के दौरान दोनों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। रीति ने काजी और उदिति को लेकर कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें लेकर घर में विवाद खड़ा हो गया। शो के एडिट में उनकी कुछ बातें म्यूट भी सुनाई दीं। इसके बाद घर के कई सदस्यों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा होने लगी।
रीति ने बाद में अपनी बात पर सफाई देते हुए कहा कि कुछ शब्द उन्होंने राइमिंग के लिए इस्तेमाल किए थे। हालांकि, मामला शांत नहीं हुआ और अब यह मुद्दा वीकेंड का वार तक पहुंच गया है।
सलमान खान ने पूछा- आपको अपनी बात पर गर्व क्यों है?वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान खान रीति तिवारी से सीधे सवाल करते दिखाई देते हैं। सलमान पूछते हैं कि आखिर उन्हें अपनी कही बातों पर गर्व क्यों है।
सलमान के मुताबिक, डिस बैटल के दौरान एक-दूसरे को जवाब देना टास्क का हिस्सा हो सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति का अपमान करने की भी एक सीमा होती है। वह रीति के बयान पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि रीति को अपनी बात पर गर्व क्यों महसूस हो रहा है।
रीति अपनी सफाई में कहती हैं कि उनका इरादा उस तरह की बात कहने का नहीं था, जिस तरह से उसे लिया गया। इस पर सलमान उनसे सवाल करते हैं कि अगर उन्हें अपनी बात का मतलब ही नहीं पता था तो उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की।
प्रोमो में सलमान का यह सवाल रीति के लिए मुश्किल स्थिति पैदा करता नजर आता है।
काजी तौकीर को लेकर भी हुई बहसइस पूरे विवाद में काजी तौकीर का नाम भी लगातार सामने आ रहा है। सलमान खान प्रोमो में रीति से काजी के साथ उनके रिश्ते और उनके व्यवहार को लेकर सवाल करते हैं।
सलमान कहते हैं कि रीति काजी से जलती हैं और उनके प्रति असुरक्षित महसूस करती हैं। हालांकि, रीति इस बात से साफ इनकार करती हैं। उनका कहना है कि वह काजी से नहीं जलतीं, बल्कि उन्हें एक व्यक्ति के तौर पर पसंद नहीं करतीं।
इसके बाद बातचीत फिर से डिस बैटल में इस्तेमाल किए गए शब्दों और बयानों पर पहुंच जाती है। दोनों के बीच पहले से चल रहे तनाव के कारण यह मुद्दा घर के माहौल को और ज्यादा गरमा सकता है।
घरवालों की भूमिका पर भी सलमान ने उठाए सवालसलमान खान ने केवल रीति तिवारी से ही सवाल नहीं किया, बल्कि घर के दूसरे सदस्यों की भूमिका पर भी चर्चा की। प्रोमो में सलमान पूछते हैं कि जब रीति इस तरह की बातें कर रही थीं, तब किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की।
सलमान का सवाल है कि क्या घर के सदस्यों को नहीं लगा कि रीति अपनी बातों में सम्मान की सीमा पार कर रही हैं।
इस दौरान सलमान आसिफ खान से भी सवाल करते दिखाई देते हैं। बताया जा रहा है कि आसिफ ने इस मामले में रीति का समर्थन किया था। सलमान उनसे पूछते हैं कि उन्होंने रीति को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की।
सलमान आसिफ से यह भी सवाल करते हैं कि अगर इसी तरह की टिप्पणी उनकी बहन के बारे में की जाती, तो क्या वह ऐसे शब्दों को स्वीकार करते। इस सवाल के बाद मामला और गंभीर होता दिखाई देता है।
रीति ने अपने बयान पर दी थी सफाईडिस बैटल के बाद रीति तिवारी ने अपने बयान को लेकर सफाई दी थी। उनका कहना था कि उन्होंने कुछ शब्दों का इस्तेमाल केवल राइमिंग के लिए किया था और वह स्लैंग के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द थे।
हालांकि, घर में मौजूद दूसरे सदस्यों के बीच इस बात को लेकर चर्चा हुई कि टास्क के नाम पर किस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसी विवाद के बीच रीति और काजी के बीच तनाव भी बढ़ता गया।
अब वीकेंड का वार में सलमान खान इस पूरे मामले को किस तरह उठाते हैं, यह एपिसोड में देखने को मिलेगा।
काजी को धमकी देने का भी मामलारीति और काजी के बीच विवाद केवल डिस बैटल तक सीमित नहीं रहा। एक अन्य टास्क के दौरान भी दोनों के बीच तनाव देखने को मिला। इसी दौरान रीति ने काजी को धमकी देने जैसी बात कही थी।
रीति ने काजी से यह भी कहा था कि वह उनका ‘म्यूट बटन’ दबा देंगी और उनसे बात नहीं करेंगी। इस घटनाक्रम के बाद दोनों के बीच दूरी और बढ़ती नजर आई।
घर में लगातार होने वाली बहस और विवादों के बीच अब सलमान खान की टिप्पणी ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
मनोज तिवारी के आने की भी चर्चारीति तिवारी के विवाद के बीच उनके पिता और अभिनेता-राजनेता मनोज तिवारी के भी ‘बिग बॉस 20’ के वीकेंड का वार में आने की चर्चा हो रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मनोज तिवारी शो में पहुंचकर अपनी बेटी से बातचीत कर सकते हैं।
हालांकि, उनके वीकेंड का वार में आने को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। ऐसे में फिलहाल इसे मीडिया रिपोर्ट्स के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मनोज तिवारी अपनी बेटी रीति तिवारी को ‘बिग बॉस 20’ के प्रीमियर एपिसोड में घर के अंदर छोड़ने पहुंचे थे। वह स्टेज पर गाना गाते हुए भी नजर आए थे। इस दौरान सलमान खान ने उनसे मजाकिया अंदाज में पूछा था कि क्या वह खुद दोबारा बिग बॉस के घर में आने वाले हैं।
मनोज तिवारी ने स्पष्ट किया था कि वह कंटेस्टेंट बनने नहीं बल्कि अपनी बेटी को शो में छोड़ने आए हैं।
बिग बॉस 4 का हिस्सा रह चुके हैं मनोज तिवारीमनोज तिवारी इससे पहले ‘बिग बॉस 4’ में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके हैं। उस सीजन में वह लगभग 62 दिनों तक घर में रहे थे। यही वजह है कि बिग बॉस के साथ उनका पुराना जुड़ाव भी रहा है।
‘बिग बॉस 20’ के प्रीमियर के दौरान सलमान खान ने रीति को घर में होने वाले विवादों और झगड़ों को लेकर सलाह भी दी थी। अब शो में रीति के व्यवहार को लेकर उठे विवाद के बीच एक बार फिर सलमान और रीति के बीच बातचीत देखने को मिल सकती है।
वीकेंड का वार पर दर्शकों की नजर‘बिग बॉस 20’ में हर सप्ताह वीकेंड का वार का एपिसोड खास माना जाता है। इस दौरान सलमान खान घर में होने वाली घटनाओं पर कंटेस्टेंट्स से सवाल करते हैं और विवादित मामलों पर चर्चा होती है।
इस बार रीति तिवारी की टिप्पणियों और काजी तौकीर के साथ उनके विवाद को लेकर सलमान के सवाल चर्चा में हैं। प्रोमो में सलमान साफ तौर पर रीति से उनके बयान को लेकर जवाब मांगते नजर आ रहे हैं।
अब यह देखना होगा कि वीकेंड का वार के दौरान रीति अपनी बात पर क्या सफाई देती हैं और सलमान खान की नाराजगी के बाद घर में इस विवाद का आगे क्या असर पड़ता है। साथ ही, मनोज तिवारी की संभावित मौजूदगी भी इस एपिसोड को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा रही है।
गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा ने मांगा लोगों से सपोर्ट
गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें वह मंदिर में माता के सामने अपनी बात रखती नजर आईं। उन्होंने Gen Z से अपील करते हुए कहा कि जो उनके घर को बर्बाद कर रही है, माता उसे देखे। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।
गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादीशुदा जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। इसी बीच सुनीता आहूजा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह मंदिर में मां काली के दर्शन करने पहुंची नजर आ रही हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी में चल रही परेशानियों का जिक्र करते हुए महिलाओं और Gen Z से अपने लिए सपोर्ट मांगा।
लोगों से अपील की कि मीडिया में ऐसी बातों को बढ़ावा न दिया जाए
वीडियो में सुनीता ने कहा कि उनके घर और परिवार को लेकर काफी कुछ चल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मीडिया में ऐसी बातों को बढ़ावा न दिया जाए। सुनीता ने भावुक होकर कहा कि उनका घर बिना किसी वजह के टूट रहा है और उन्हें लोगों के समर्थन की जरूरत है।
गोविंदा और कोमल रानी को लेकर क्या है मामला?
दरअसल, पिछले कुछ समय से गोविंदा का नाम उनकी फिल्म की को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ जोड़ा जा रहा है। हाल ही में दोनों को मुंबई के लालबागचा राजा में साथ देखे जाने के बाद इन चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट्स में इसे कथित रिश्ता और अफवाह ही बताया गया है।
इसी पृष्ठभूमि में सुनीता आहूजा का मंदिर से सामने आया वीडियो चर्चा में है। उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर लिए बिना अपने जीवन में चल रही परेशानियों और अपने परिवार को लेकर चिंता जाहिर की।
जमुई कांड में बड़ा एक्शन, 15-20 दिन में स्पीडी ट्रायल की तैयारी; IAS-IPS अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
जमुई कांड में बड़ा एक्शन: 15-20 दिनों में स्पीडी ट्रायल की तैयारी, IAS-IPS अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
जमुई: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़खानी और दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब प्रशासन का फोकस मामले को स्पीडी ट्रायल के जरिए तेजी से अदालत तक पहुंचाने पर है। जिला प्रशासन ने अगले 15 से 20 दिनों के भीतर स्पीडी ट्रायल से जुड़ी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने का लक्ष्य तय किया है।
जमुई के जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने संयुक्त प्रेस वार्ता में मामले में अब तक हुई कार्रवाई और आगे की रणनीति की जानकारी दी। इस संवेदनशील मामले की निगरानी के लिए IPS अधिकारी दीप्ति मोनाली और IAS अधिकारी शिप्रा चौधरी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब अदालत में तेजी की तैयारीपुलिस के अनुसार मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव और हरेराम यादव गिरफ्तार किए जा चुके हैं। नंदन यादव पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने से घायल हुआ था, जबकि हरेराम यादव भागने के दौरान घायल हुआ। इलाज के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
प्रशासन अब जांच से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई और दस्तावेजी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दे रहा है, ताकि मामले की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अदालत के समक्ष आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
सोशल मीडिया पर भी पुलिस की बड़ी कार्रवाईजमुई कांड के बाद घटना से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं। प्रशासन के मुताबिक 225 लोगों/ऑनलाइन गतिविधियों को चिन्हित किया गया है। इनमें पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री और AI से तैयार कथित फर्जी सामग्री से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन गंभीर विषय है। इसी वजह से लोगों से अपील की गई है कि घटना से जुड़े फोटो, वीडियो या ऐसी कोई भी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा न करें जिससे पीड़िता की पहचान सामने आए।
AI से बनाए गए वीडियो पर भी नजरप्रशासन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कथित AI-generated वीडियो को लेकर भी लोगों को सावधान किया है। अधिकारियों के मुताबिक घटना को लेकर गलत या मनगढ़ंत सामग्री प्रसारित करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
पुलिस ने ऐसे मामलों में साइबर कार्रवाई शुरू की है और संबंधित लोगों को नोटिस देकर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।
पीड़िता की पहचान सार्वजनिक न करने की अपीलजिलाधिकारी नवीन ने लोगों से अपील की है कि इस संवेदनशील मामले में सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी, कहानी या पीड़िता से जुड़ी निजी जानकारी साझा न करें।
प्रशासन का कहना है कि पीड़िता की निजता और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी से व्यवहार किया जाना चाहिए। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी सामग्री से बचने की अपील की गई है।
अब 15-20 दिनों पर टिकी नजरमुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब प्रशासन के सामने अगली चुनौती जांच और कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की है। 15 से 20 दिनों में स्पीडी ट्रायल से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि अंतिम सजा अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। फिलहाल प्रशासन और पुलिस का जोर मामले की जांच, साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर है।
अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन, कैंसर से थे जूझ रहे; बॉलीवुड में शोक
अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन, कैंसर से थे जूझ रहे; ‘वेलकम’ और ‘गदर’ के इस कलाकार को सितारों ने दी श्रद्धांजलि
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मुश्ताक खान का 24 सितंबर 2026 को निधन हो गया। उन्होंने 56 साल की उम्र में मुंबई के नानावती अस्पताल में अंतिम सांस ली। रिपोर्टों के मुताबिक मुश्ताक खान लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर सामने आते ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। कई कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कैंसर से जूझ रहे थे मुश्ताक खानमुश्ताक खान पिछले कुछ समय से कैंसर का इलाज करा रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें पहले भी कैंसर का पता चला था और इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था। बाद में बीमारी दोबारा गंभीर हो गई। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था।
उनके बिजनेस पार्टनर के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया कि अभिनेता को फेफड़ों का कैंसर था और हाल ही में बीमारी दोबारा गंभीर हुई थी। इसके बाद उनकी हालत नाजुक हो गई थी।
‘वेलकम’ में बालू के किरदार से मिली खास पहचानमुश्ताक खान ने हिंदी सिनेमा में कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन फिल्म ‘वेलकम’ में उनका बालू का किरदार दर्शकों के बीच खास तौर पर लोकप्रिय हुआ। साल 2007 में रिलीज हुई इस कॉमेडी फिल्म में उन्होंने अक्षय कुमार, नाना पाटेकर और अनिल कपूर जैसे कलाकारों के साथ काम किया था।
फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। बालू के किरदार के साथ उनका अंदाज लंबे समय तक दर्शकों की यादों में रहा।
‘गदर’ में भी निभाया था यादगार किरदारमुश्ताक खान ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में गुल खान के किरदार में नजर आए थे। साल 2001 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने सनी देओल के साथ काम किया था। फिल्म की सफलता के बाद वह इसके फ्रेंचाइजी से भी जुड़े रहे।
साल 2023 में रिलीज हुई ‘गदर 2’ में भी उन्होंने गुल खान के किरदार को दोबारा निभाया। इस तरह उन्होंने दो अलग-अलग दौर की फिल्मों में अपने किरदार से दर्शकों के बीच पहचान बनाए रखी।
‘आशिकी’ और ‘सड़क’ जैसी फिल्मों में भी किया काममुश्ताक खान का फिल्मी करियर कई दशकों तक चला। उन्होंने ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘क्रांतिवीर’, ‘राजा’, ‘जुड़वा’, ‘जोड़़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वॉन्टेड’, ‘ओह माय गॉड!’, ‘राउडी राठौड़’, ‘वेलकम बैक’, ‘स्त्री’, ‘बधाई दो’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में काम किया।
उनकी खासियत यह थी कि वह मुख्य भूमिका में न होने के बावजूद अपने छोटे या सहायक किरदार को यादगार बनाने में सफल रहते थे। कॉमेडी के साथ-साथ उन्होंने गंभीर और चरित्र आधारित भूमिकाएं भी निभाईं।
1980 में शुरू हुआ था फिल्मी सफरमुश्ताक खान के फिल्मी सफर की शुरुआत 1980 में आई फिल्म ‘Albert Pinto Ko Gussa Kyoon Aata Hai’ से हुई थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में लगातार काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
अपने शुरुआती दौर में उन्होंने महेश भट्ट की फिल्मों में भी काम किया। ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टीवी और थिएटर में भी किया काममुश्ताक खान का जुड़ाव केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। उन्होंने टेलीविजन और थिएटर में भी काम किया। लंबे करियर के दौरान उन्होंने कॉमेडी, ड्रामा और सपोर्टिंग कैरेक्टर सहित अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं।
उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी अक्सर कुछ ही समय के लिए होती थी, लेकिन अपने अभिनय और संवाद अदायगी के कारण वह दर्शकों पर प्रभाव छोड़ जाते थे। यही वजह है कि उनके कई किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के दर्शकों को याद हैं।
अनीस बज्मी ने जताया दुखमुश्ताक खान के निधन पर फिल्म निर्देशक अनीस बज्मी ने भी भावुक प्रतिक्रिया दी। अनीस बज्मी ने सोशल मीडिया पर मुश्ताक खान की तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर दुख जताया और उन्हें बेहतरीन कलाकार और अच्छा इंसान बताया।
अनीस बज्मी का मुश्ताक खान से खास जुड़ाव रहा था, क्योंकि ‘वेलकम’ में मुश्ताक खान ने बालू का लोकप्रिय किरदार निभाया था। इस फिल्म ने मुश्ताक खान को नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी पहचान दिलाई।
संजय मिश्रा ने बताया ‘गार्जियन’अभिनेता संजय मिश्रा ने भी मुश्ताक खान के निधन पर उन्हें याद किया। उन्होंने बताया कि एक समय मुश्ताक खान उनके लिए एक गार्जियन की तरह थे। जब भी उन्हें किसी सलाह की जरूरत होती थी, वह मुश्ताक खान से बातचीत करते थे।
संजय मिश्रा ने उनके निधन को बेहद दुखद खबर बताया और कहा कि वह अच्छे कलाकार थे।
राजपाल यादव ने अस्पताल में की थी मुलाकातमुश्ताक खान के निधन के बाद अभिनेता राजपाल यादव ने भी उनके साथ अपनी आखिरी मुलाकात को याद किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, राजपाल यादव ने निधन से कुछ घंटे पहले अस्पताल में मुश्ताक खान से मुलाकात की थी।
राजपाल यादव ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने मुश्ताक खान से बात की थी और दोनों ने हाथ भी मिलाया था। कुछ ही समय बाद उनके निधन की खबर मिलने से वह बेहद भावुक हुए।
सनी देओल ने भी दी श्रद्धांजलिमुश्ताक खान के साथ ‘गदर’ फ्रेंचाइजी में काम कर चुके अभिनेता सनी देओल ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने मुश्ताक खान को अच्छा इंसान और बेहतरीन अभिनेता बताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मुश्ताक खान और सनी देओल की जोड़ी ‘गदर’ फिल्मों में दर्शकों को देखने को मिली थी। गुल खान के किरदार के जरिए मुश्ताक खान ने इस फिल्म की कहानी में अपनी अलग पहचान बनाई।
फिल्म इंडस्ट्री में शोकमुश्ताक खान के निधन से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल है। सोशल मीडिया पर कलाकारों और प्रशंसकों ने उनके पुराने किरदारों और फिल्मों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।
करीब चार दशक लंबे करियर में मुश्ताक खान ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उन्होंने बड़े स्टार्स के साथ काम किया और कई लोकप्रिय फिल्मों का हिस्सा रहे। उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे चरित्र अभिनेता को खो दिया, जिसकी स्क्रीन मौजूदगी छोटी होने के बावजूद दर्शकों पर असर छोड़ती थी।
याद किए जाएंगे मुश्ताक खान के यादगार किरदारमुश्ताक खान को खास तौर पर ‘वेलकम’ के बालू और ‘गदर’ फ्रेंचाइजी के गुल खान के किरदार के लिए याद किया जाएगा। इसके अलावा ‘आशिकी’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वॉन्टेड’, ‘स्त्री’ और ‘स्त्री 2’ सहित कई फिल्मों में उनका काम दर्शकों के सामने रहा।
उनकी अभिनय शैली में कॉमेडी और गंभीरता दोनों का मिश्रण देखने को मिलता था। उन्होंने अपने लंबे करियर में फिल्मों, टीवी और थिएटर के जरिए मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाई।
मुश्ताक खान का निधन 24 सितंबर 2026 को मुंबई के नानावती अस्पताल में हुआ। उनके निधन की खबर के बाद बॉलीवुड के कई कलाकारों ने उन्हें याद किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर घमासान, SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद की चर्चा
ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों से सियासी हलचल, SIR पर बढ़ा विवाद
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाते हुए उनके पद पर बने रहने को लेकर भी मांगें उठाई हैं।
क्या है पूरा मामला?मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, मतदाताओं के नाम हटाने, Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और SIR से संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह सवाल उठाया कि क्या आयोग की ओर से जारी कुछ फैसलों और निर्देशों में सभी सदस्यों की पर्याप्त भागीदारी और जानकारी सुनिश्चित हुई थी। रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने और अपील से जुड़े मामलों तथा गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने से संबंधित मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।
चुनाव आयोग ने दिया जवाबरिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय लेने से पहले तीनों आयुक्तों सहित आयोग के अधिकारियों को अपने सुझाव और विचार रखने का अधिकार है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं। आयोग ने SIR समेत चुनावी सुधारों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े निर्णयों को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया है। उसके अनुसार, ECINet सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं और अनधिकृत बदलाव या छेड़छाड़ को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय लागू हैं। आयोग ने कहा कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून के अनुरूप हैं।
SIR क्या है और क्यों चर्चा में है?Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद पात्र तथा अपात्र प्रविष्टियों की जांच करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के स्तर पर दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है।
हाल के महीनों में SIR को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक और कानूनी बहस हुई है। पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR के दौरान 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें से 22 लाख से अधिक लोगों ने दोबारा नाम शामिल करने के लिए अपील की। आयोग ने बताया कि कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं, जिनमें नाम जोड़ने और हटाने दोनों से संबंधित मामले शामिल थे।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की जांच को भी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने SIR के दौरान आम मतदाताओं को होने वाली संभावित परेशानियों और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष ने उठाए सवालचुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपने सवाल और तेज कर दिए हैं। विभिन्न विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली की जांच, SIR पर पुनर्विचार और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर चर्चा की मांग की है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों को गंभीर विषय बताया है। वहीं, अलग-अलग दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और आयोग की जवाबदेही को लेकर भी बयान दिए हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और मांगें राजनीतिक पक्ष के बयान हैं। इन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार कौन हैं?ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। वे इससे पहले चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। उनके प्रशासनिक करियर में केंद्र और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण पद शामिल रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनकी जिम्मेदारी देश की चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करना है। इनमें मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम, मतदान प्रक्रिया, चुनाव अधिकारियों का समन्वय और निर्वाचन से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।
सितंबर 2026 में भी ज्ञानेश कुमार चुनाव संबंधी कई गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। PIB की 14 सितंबर की जानकारी के अनुसार, उन्होंने भूटान की तीन दिवसीय यात्रा भी की थी। इससे पहले सितंबर में उन्होंने युवाओं, Electoral Literacy Clubs और Booth Level Officers से संबंधित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।
आगे क्या?फिलहाल इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। एक तरफ रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर कुछ मुद्दों पर दर्ज आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अलग-अलग विचार संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर भी चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में अदालतों, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की ओर से सामने आने वाले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल मुख्य मुद्दे:
चुनाव आयोग के भीतर कथित 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया चुनाव आयोग का सर्वसम्मति से फैसले लेने का स्पष्टीकरण विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठाए गए सवाल SIR से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और अपीलें