जयपुर : राजस्थान की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) में लगभग 9 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। यह मामला DNA टेस्ट किट की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि FSL के डायरेक्टर अजय शर्मा ने कंपनियों से मिलीभगत कर DNA किट्स को बाजार मूल्य से 11 गुना अधिक कीमत पर खरीदा।
घोटाले का खुलासा
अप्रैल–मई 2024 में FSL के स्टोर प्रभारी अधिकारी डॉ. रमेश चौधरी ने रिकॉर्ड जांच के दौरान पाया कि 2023-24 में DNA किट्स की खरीद अन्य राज्यों की तुलना में कई गुना महंगी हुई है। उन्होंने डायरेक्टर अजय शर्मा को कई बार पत्र लिखकर सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
22 मई 2024 को डॉ. चौधरी ने मुख्य सचिव को विस्तृत ई-फाइल भेजी, जिसमें DNA किट की खरीद में हुई अनियमितताओं का पूरा ब्यौरा था। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि चौधरी का आरोप है कि उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा।
खरीद में भारी अंतर
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान FSL ने Thermo Fisher ब्रांड की किट्स अन्य राज्यों की तुलना में बेहद महंगी खरीदीं:
-
STR amplification kit (16 markers) – राजस्थान ₹5,14,136 | यूपी ₹98,000
-
STR amplification kit (24 markers) – राजस्थान ₹4,30,087 | उड़ीसा ₹37,700
-
Y-STR amplification kit (17 markers) – राजस्थान ₹4,41,753 | यूपी ₹84,500
-
Autosomal STR kit (27 markers) – राजस्थान ₹3,34,813 | कर्नाटक ₹59,943
-
Y-STR kit (27 markers) – राजस्थान ₹4,74,360 | गुजरात ₹1,24,544
इन गड़बड़ियों से सरकार को लगभग ₹8.71 करोड़ का नुकसान हुआ।
उठते सवाल
-
अन्य राज्य वही किट सस्ते दाम पर खरीद रहे थे तो राजस्थान में इतनी महंगी क्यों खरीदी गई?
-
क्या यह कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का मामला है?
-
मुख्य सचिव को रिपोर्ट भेजने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
-
और अगर किट खरीद में ही गड़बड़ी है, तो DNA टेस्ट की निष्पक्षता पर जनता कैसे भरोसा करेगी?
डायरेक्टर अजय शर्मा का पक्ष
अजय शर्मा ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि “कंपनियां सीधा सप्लाई देने को तैयार नहीं थीं, और अन्य राज्यों के डीलर्स को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति नहीं देतीं।”
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया संस्था के अधिकार क्षेत्र में होती है और जरूरत पड़ने पर उसे रद्द भी किया जा सकता है।
यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है बल्कि DNA जांच जैसी संवेदनशील प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस गंभीर प्रकरण पर क्या कदम उठाती है।