राजस्थान में 15 अगस्त से सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान, ग्रामीण क्षेत्रों में होगी सख्त कार्रवाई
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 15 अगस्त से राज्यव्यापी विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने के लिए जनजागरूकता और प्रवर्तन गतिविधियां चलाई जाएंगी। इसके साथ ही 30 सितंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सिंगल यूज़ प्लास्टिक नियंत्रण संबंधी नई नीति का मसौदा तैयार किया जाएगा।
यह निर्णय मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने की, जबकि पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी भी उपस्थित रहे।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
बैठक में मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण, पशुधन और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्लास्टिक मुक्त राजस्थान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से परिणामोन्मुख कार्य करें।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में जागरूकता और वैकल्पिक उत्पादों के उपयोग को भी बढ़ावा देना आवश्यक है।
30 सितंबर तक तैयार होगी नई नीति
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 30 सितंबर तक विस्तृत नीति का मसौदा तैयार किया जाए। यह नीति भविष्य में प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना का आधार बनेगी।
सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सके और टिकाऊ विकल्प अपनाए जा सकें।
15 अगस्त से चलेगा विशेष अभियान
राज्य सरकार के निर्देशानुसार स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान के दौरान ग्राम पंचायतों, पंचायती राज संस्थाओं और संबंधित विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप देना भी है। सरकार चाहती है कि गांव स्तर पर नागरिक स्वयं प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
नियमों के तहत होगी सख्त कार्रवाई
नई नीति लागू होने तक वर्तमान नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत सिंगल यूज़ प्लास्टिक के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और उपयोग के खिलाफ नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रतिबंध का पालन पूरी तरह हो सके।
सरकारी कार्यालय होंगे प्लास्टिक मुक्त
बैठक में सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री ने कहा कि सरकारी कार्यालय स्वयं प्लास्टिक मुक्त कार्यसंस्कृति अपनाकर समाज के लिए उदाहरण बनें। इससे आमजन को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश मिलेगा।
जनजागरूकता पर रहेगा विशेष जोर
राज्य सरकार ने माना है कि प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी आवश्यक है।
इस उद्देश्य से ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से लोगों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
साथ ही नागरिकों को कपड़े के थैले, जूट बैग और अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कई विभागों की होगी भागीदारी
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उद्योग विभाग, परिवहन विभाग तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान को प्रभावी बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
राजस्थान सरकार का मानना है कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ यह राज्यव्यापी अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यदि सरकारी एजेंसियों के साथ आमजन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो ग्रामीण राजस्थान को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है।
GOLDEN HIND DESK