गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि वर्तमान में जिला चित्तौड़गढ़ के उपखण्ड निम्बाहेड़ा में महिला पुलिस थाना खोलने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। गृह राज्य मंत्री प्रश्नकाल के दौरान सदस्य द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि महिला पुलिस थाना जिला स्तर पर खोला जाता है।इससे पहले विधायक चन्द कृपलानी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री ने कहा कि जिला चित्तौड़गढ़ में महिला पुलिस थाना सृजित किये जाने की स्वीकृति 05 जून 1999 को जारी की गई। जारी स्वीकृति के क्रम में महिला पुलिस थाना 11 अक्टूबर 1999 से संचालित किया गया।
जारी स्वीकृति के क्रम में महिला पुलिस थाना
जिला स्तर पर महिला थाना खोलने का प्रावधान गृह राज्य मंत्री
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महेश जोशी गिरफ्तारी केस में हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- पुलिस और जजों को गिरफ्तारी कानून की ट्रेनिंग जरूरी
महेश जोशी गिरफ्तारी केस: हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- पुलिस और जजों को गिरफ्तारी कानून की ट्रेनिंग की जरूरत
राजस्थान के पूर्व मंत्री डॉ. महेश जोशी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली हैबियस कॉर्पस याचिका भले ही राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दी हो, लेकिन इस मामले में अदालत की विस्तृत टिप्पणी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), पुलिस तंत्र और निचली अदालतों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। साथ ही अदालत ने पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को गिरफ्तारी संबंधी कानूनों का विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता भी जताई।
गिरफ्तारी के आधार बताना कानूनन जरूरीराजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि डॉ. महेश जोशी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार स्पष्ट रूप से बताए गए थे। अदालत ने कहा कि केवल एफआईआर की धाराएं पढ़कर सुनाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को यह बताना अनिवार्य है कि उसे किस कारण गिरफ्तार किया जा रहा है, उसके खिलाफ क्या आरोप हैं और जांच एजेंसी के पास उसके खिलाफ क्या सामग्री उपलब्ध है। यह केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि नागरिक के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।
ACB की कार्यप्रणाली पर उठाए सवालसुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने पाया कि ACB द्वारा दाखिल किए गए जवाबों में विरोधाभास दिखाई दिए।
प्रारंभिक जवाब में जांच एजेंसी ने दावा किया था कि महेश जोशी को गिरफ्तारी के आधार बता दिए गए थे, लेकिन बाद में दाखिल दस्तावेजों में अलग तथ्य सामने आए। इस पर कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने ऐसे दस्तावेज और तथ्य बाद में प्रस्तुत किए जो शुरुआती रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं थे।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि उपलब्ध परिस्थितियां रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर की ओर संकेत करती हैं। हालांकि अदालत ने इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष देने से परहेज किया ताकि मूल भ्रष्टाचार मामले की जांच प्रभावित न हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में उचित मंच पर इस मुद्दे को उठाया जा सकता है।
स्पेशल जज की भूमिका पर भी टिप्पणीहाईकोर्ट ने उस विशेष न्यायाधीश की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस रिमांड मंजूर की थी।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की वैधता को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई गई थीं और सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला भी दिया गया था। इसके बावजूद संबंधित अदालत ने उस मुद्दे पर तत्काल निर्णय नहीं दिया और सीधे पुलिस रिमांड मंजूर कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को रिमांड पर भेजने से पहले न्यायिक अधिकारी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का पूरी तरह पालन हुआ है।
अनुच्छेद 22(1) का पालन जरूरीहाईकोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 22(1) का विशेष उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी देना और गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण बताना कानून का अनिवार्य हिस्सा है।
यदि पुलिस इस प्रक्रिया का पालन नहीं करती है तो यह केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
फिर भी याचिका क्यों हुई खारिज?हालांकि अदालत ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर कमियां स्वीकार कीं, लेकिन इसके बावजूद महेश जोशी की हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद महेश जोशी को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था। इसके बाद न्यायालय द्वारा कई बार न्यायिक रिमांड के आदेश भी पारित किए जा चुके हैं।
ऐसी स्थिति में वर्तमान हिरासत न्यायिक आदेशों पर आधारित मानी जाएगी। इसलिए हैबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से गिरफ्तारी को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महेश जोशी यदि चाहें तो अन्य कानूनी उपायों का सहारा ले सकते हैं।
पुलिस और जजों को प्रशिक्षण देने की सलाहहाईकोर्ट के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार और न्यायिक प्रशासन को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है।
अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को गिरफ्तारी से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रक्रियाओं का नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
कोर्ट का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर कानून का सही तरीके से पालन किया जाए तो भविष्य में इस प्रकार के विवादों और मुकदमों से बचा जा सकता है।
सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन को भेजे निर्देशहाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति राजस्थान सरकार के गृह विभाग तथा राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि अदालत की टिप्पणियों और सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
इससे संकेत मिलता है कि अदालत इस मामले को केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं मान रही, बल्कि इसे पूरे पुलिस और न्यायिक तंत्र में सुधार से जोड़कर देख रही है।
क्या है मामला?पूर्व मंत्री डॉ. महेश जोशी को भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ACB ने गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी कानून के अनुरूप नहीं की गई और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका तो खारिज कर दी, लेकिन अपने विस्तृत फैसले में गिरफ्तारी प्रक्रिया, जांच एजेंसी और न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक है कि जांच एजेंसियां और न्यायालय संविधान तथा कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन करें।
राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला आने वाले समय में गिरफ्तारी की प्रक्रिया, पुलिस की जवाबदेही और न्यायिक निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण संदर्भ माना जा सकता है।
'जोधपुर को पीछे रखने का पाप गहलोत ने किया': शेखावत बोले- एलिवेटेड रोड रोकने के लिए रचे गए षड्यंत्र
शेखावत का गहलोत पर बड़ा हमला, बोले- जोधपुर को पीछे रखने का पाप पूर्व मुख्यमंत्री ने किया
जोधपुर
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जोधपुर को विकास की मुख्यधारा से पीछे रखने का सबसे बड़ा जिम्मेदार यदि कोई है, तो वह अशोक गहलोत हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद गहलोत जोधपुर और राजस्थान की जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहे। शेखावत ने यह भी दावा किया कि जोधपुर की महत्वपूर्ण एलिवेटेड रोड परियोजना को रोकने और विलंबित करने के लिए तत्कालीन सरकार ने कई स्तरों पर षड्यंत्र रचे।
सोमवार को जोधपुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री लगातार विकास कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि जनता अब सच्चाई जान चुकी है और राजनीतिक लाभ के लिए किए जाने वाले दावों पर भरोसा नहीं करती।
पानी के मुद्दे पर साधा निशानाशेखावत ने जोधपुर और राजस्थान में पेयजल संकट के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य की जनता ने लंबे समय तक पानी की गंभीर समस्या का सामना किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार की नीतियों और प्रशासनिक विफलताओं के कारण हालात बदतर हुए।
उन्होंने कहा कि जब वे केंद्र में जलशक्ति मंत्री के रूप में कार्यरत थे, तब राजस्थान को देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संसाधन और योजनाओं का लाभ दिलाया गया। इसके बावजूद राज्य सरकार उन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू नहीं कर सकी। शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए संसाधनों का सही उपयोग होता तो राजस्थान के कई क्षेत्रों में पेयजल संकट काफी हद तक कम हो सकता था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोधपुर के लोग वह समय नहीं भूले हैं जब पानी के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कई इलाकों में लोगों को गड्ढे खोदकर मोटर की सहायता से पानी निकालना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि यह स्थिति किसी प्राकृतिक कारण से नहीं, बल्कि प्रशासनिक अक्षमता और गलत प्राथमिकताओं का परिणाम थी।
एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर बड़ा दावाजोधपुर की बहुचर्चित एलिवेटेड रोड परियोजना का जिक्र करते हुए शेखावत ने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री इस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि परियोजना को रोकने और विलंबित करने के लिए कई प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे कई तथ्य और दस्तावेज हैं जिनसे यह साबित किया जा सकता है कि तत्कालीन सरकार परियोजना की गति से संतुष्ट नहीं थी। शेखावत के अनुसार, यदि राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता तो यह परियोजना और तेजी से आगे बढ़ सकती थी।
उन्होंने कहा कि जोधपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए एलिवेटेड रोड एक महत्वपूर्ण परियोजना थी, जिससे यातायात व्यवस्था में सुधार और आम लोगों को राहत मिलनी थी। लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे अनावश्यक रूप से विलंबित किया गया।
विकास के मुद्दे पर घेराकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोधपुर की जनता ने अशोक गहलोत को कई बार जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर दिया। इसके बावजूद शहर को अपेक्षित विकास नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद जोधपुर में बुनियादी ढांचे, पेयजल, यातायात और अन्य नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई।
शेखावत ने कहा कि विकास केवल घोषणाओं और राजनीतिक भाषणों से नहीं होता, बल्कि धरातल पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से होता है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राजस्थान में विकास कार्यों को नई गति दे रही हैं।
सरकार गिराने के आरोपों पर पलटवारमीडिया से बातचीत के दौरान शेखावत ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें समय-समय पर अशोक गहलोत अपनी सरकार गिराने की साजिश की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आरोपों में सच्चाई है तो पूर्व मुख्यमंत्री को प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्षों से एक ही आरोप दोहराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। शेखावत ने कहा कि राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि गहलोत सरकार के दौरान कई ऐसे विवाद सामने आए, जिनसे यह धारणा बनी कि सरकार के भीतर ही असंतोष और खींचतान मौजूद थी। ऐसे मामलों के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
जनता सब देख रही हैकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजस्थान की जनता राजनीतिक बयानबाजी और वास्तविक काम के बीच का अंतर समझती है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब विकास, सुशासन और जवाबदेही के आधार पर नेताओं का मूल्यांकन कर रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राजस्थान में सड़क, रेल, पेयजल, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निवेश हुआ है। इन परियोजनाओं का लाभ आने वाले वर्षों में और अधिक दिखाई देगा।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्मशेखावत के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज होने की संभावना है। एक ओर भाजपा नेताओं द्वारा पूर्व कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस भी लगातार भाजपा सरकार के कामकाज पर निशाना साध रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी माहौल को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। ऐसे में विकास, पेयजल, आधारभूत संरचना और जनहित के मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रहेंगे।
फिलहाल, गजेंद्र सिंह शेखावत के इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और अशोक गहलोत की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
'कुमकुम भाग्य' एक्ट्रेस संचिता उगले का निधन
कुमकुम भाग्य' फेम अभिनेत्री संचिता उगले का निधन, मौत से कुछ घंटे पहले पोस्ट की थी रील
टीवी इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री संचिता उगले का सोमवार को निधन हो गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनका शव मुंबई के नालासोपारा स्थित उनके घर में फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।
संचिता उगले टीवी इंडस्ट्री का एक जाना-पहचाना चेहरा थीं। उन्होंने कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। खास तौर पर टीवी शो ‘कुमकुम भाग्य’ में निभाए गए उनके किरदार को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इसके अलावा वे ‘वागले की दुनिया’, ‘दिलवाली दुल्हा ले जाएगी’ और ‘साजन घर में’ जैसे धारावाहिकों का भी हिस्सा रह चुकी थीं। उनके अचानक निधन की खबर से मनोरंजन जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
घर में अकेली थीं संचितापुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय संचिता उगले अपने माता-पिता और बहन के साथ नालासोपारा में रहती थीं। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य घर पर मौजूद नहीं थे और संचिता अकेली थीं। जब परिवार के सदस्य घर लौटे तो उन्होंने संचिता को फंदे से लटका हुआ पाया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से अब तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में मौत के पीछे की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
मौत से कुछ घंटे पहले पोस्ट की थी रीलसंचिता उगले की मौत को लेकर सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने अपने निधन से कुछ घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट की गई इस रील में वह पुराने लोकप्रिय गीत “डफली वाले, डफली बजा” पर लिपसिंक करती नजर आ रही थीं।
वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन लिखा था, “मैं नाचूं, तू नचा।” रील में संचिता सामान्य और खुश नजर आ रही थीं। ऐसे में उनके निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों को और अधिक स्तब्ध कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग यह विश्वास नहीं कर पा रहे कि कुछ घंटे पहले तक सक्रिय दिखने वाली अभिनेत्री अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती थींसंचिता उगले सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं। वे नियमित रूप से अपने फोटो, वीडियो और रील्स साझा करती थीं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 1.39 लाख फॉलोअर्स थे। उनकी पोस्ट पर हजारों लाइक्स और कमेंट्स आते थे।
निधन की खबर सामने आने के बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई है। फैंस और शुभचिंतक उनकी आखिरी पोस्ट पर भावुक कमेंट कर रहे हैं। कई लोगों ने उनके अचानक चले जाने पर दुख जताते हुए उन्हें याद किया है।
टीवी इंडस्ट्री में बनाई थी खास पहचानसंचिता उगले ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी। उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। ‘कुमकुम भाग्य’ में उनके किरदार को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। यह शो लंबे समय से भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में शामिल रहा है।
इसके अलावा ‘वागले की दुनिया’ में निभाए गए उनके किरदार ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। अपनी सहज अभिनय शैली और स्क्रीन प्रेजेंस के कारण संचिता ने कम समय में इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बना ली थी।
लीड रोल में भी आ चुकी थीं नजरसंचिता केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने लोकप्रिय शो ‘दिलवाली दुल्हा ले जाएगी’ में अभिनेता सौरभ बेदी के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। इस शो में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई थी। दर्शकों ने उनकी और सौरभ की जोड़ी को पसंद किया था।
हाल के दिनों में वे दंगल टीवी के शो ‘साजन घर में’ में नजर आ रही थीं। इस शो के माध्यम से भी उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।
फिल्म 'छावा' में भी किया था कामटेलीविजन के अलावा संचिता उगले ने फिल्मों में भी काम किया था। वे ऐतिहासिक फिल्म ‘छावा’ में नजर आई थीं, जिसमें उन्होंने ताराबाई का किरदार निभाया था। फिल्म में अभिनेता विक्की कौशल और अक्षय खन्ना मुख्य भूमिकाओं में थे।
हालांकि उनका रोल बड़ा नहीं था, लेकिन उनके अभिनय को सराहा गया था। टीवी और फिल्मों दोनों माध्यमों में अपनी पहचान बनाने की दिशा में संचिता लगातार आगे बढ़ रही थीं।
पुलिस कर रही है जांचफिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। पुलिस परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों से भी पूछताछ कर रही है।
क्योंकि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए जांच एजेंसियां हर संभावित पहलू पर ध्यान दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
फैंस और इंडस्ट्री में शोकसंचिता उगले के निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा पहुंचाया है। सोशल media पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनकी पुरानी तस्वीरें एवं वीडियो साझा कर रहे हैं। टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों और सहयोगियों ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है।
एक उभरती हुई अभिनेत्री के रूप में संचिता ने अपने अभिनय और मेहनत से पहचान बनाई थी। उनका अचानक इस दुनिया से चले जाना उनके परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और प्रशंसकों के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
संचिता उगले के निधन से मनोरंजन जगत ने एक प्रतिभाशाली कलाकार को खो दिया है। उनके चाहने वाले उन्हें उनके यादगार किरदारों और शानदार अभिनय के लिए हमेशा याद रखेंगे।
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने ‘Economic Overview of Rajasthan’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने ‘Economic Overview of Rajasthan’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक विशेष रूप से इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट्स के लिए तैयार की गई है। पुस्तक में राजस्थान की अर्थव्यवस्था से संबंधित नवीनतम डेटा, बजट, वित्त, योजनाएं, आर्थिक सर्वेक्षण एवं विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों का सरल एवं परीक्षा-उपयोगी प्रस्तुतीकरण किया गया है।
वर्तमान समय में अंग्रेजी भाषा का महत्व लगातार बढ़ रहा
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अंग्रेजी भाषा का महत्व लगातार बढ़ रहा है और विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी माहौल में आगे बढ़ाने के लिए ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता है, जो उनकी समझ को सरल और प्रभावी तरीके से विकसित कर सकें। उन्होंने पुस्तक के लेखकों और प्रकाशकों को इस पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। दीया कुमारी ने विद्यार्थियों से अध्ययन के प्रति समर्पित रहने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही सफलता की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायक होगी और उन्हें अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगी। यह पुस्तक RAS, RPSC 1st एवं 2nd Grade, REET, SI, Patwar, EO/RO, Junior Accountant एवं अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ पुस्तक सिद्ध होगी।
बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल पर फर्जी डिग्री मामले में SOG का केस दर्ज
बागीदौरा विधानसभा सीट से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक जयकृष्ण पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. शिक्षक भर्ती में कथित रूप से फर्जी बीए डिग्री लगाकर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज किया है. मामले में कई राज्यों की डिग्रियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. पटेल ने शिक्षक भर्ती के दौरान अधिक अंकों वाली दूसरी डिग्री का उपयोग कर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की थी.
राजस्थान, गुजरात और सिक्किम से बीए की डिग्रियां प्राप्त की थीं
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पटेल ने एक ही शैक्षणिक सत्र के दौरान राजस्थान, गुजरात और सिक्किम से बीए की डिग्रियां प्राप्त की थीं, जो नियमों के खिलाफ है. जांच में सामने आया कि जयकृष्ण पटेल ने वर्ष 2007 से 2010 के बीच उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में नियमित छात्र के रूप में बीए में प्रवेश लिया था. इसके बाद द्वितीय वर्ष में वे अंग्रेजी विषय में अनुत्तीर्ण हो गए थे. इसी दौरान उन्होंने सिक्किम की ईआईआईएलएम यूनिवर्सिटी से 73.85 प्रतिशत अंकों के साथ बीए की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद वर्ष 2012 में गुजरात की कालोरेक्स टीचर्स यूनिवर्सिटी से भी बीए की एक अन्य डिग्री हासिल करने का दावा किया गया.