
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो जुलाई से पांच देशों के दौरे पर जाएंगे. पीएम मोदी के इस दौरे की शुरुआत घाना से होगी. 30 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का घाना दौरा हो रहा है. इस दौरान पीएम मोदी घाना के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे. घाना की संसद को संबोधित करेंगे. इसके अलावा पीएम मोदी घाना में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे.घाना के अलावा पीएम मोदी त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया का भी दौरा करेंगे. पीएम मोदी के इस दौरे में ब्राजील में 17वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेना भी शामिल है. पीएम मोदी की इस आठ दिनों की यात्रा मुख्य उद्देश्य ब्राजील में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना और इन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है.
कोविड काल में भारत ने घाना को 6 लाख वैक्सीन दी
भारत और घाना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के मजबूत समर्थक रहे हैं। दोनों देश गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सदस्य हैं और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों में मिलकर काम करते हैं। घाना ने भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और अन्य वैश्विक मुद्दों पर दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने घाना को वैक्सीन और चिकित्सा मदद दी थी। भारत ने घाना को 6 लाख कोविड वैक्सीन दी थी।
गांधी के आदर्शों पर चलकर मिली घाना को आजादी
मे एन्क्रूमा घाना के सबसे बड़े नेता थे, जिन्हें ‘अफ्रीका का महात्मा गांधी‘ भी कहा जाता है। उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई के दौरान गांधीजी के विचार पढ़े और उनसे बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद घाना आकर उन्होंने कन्वेंशन पीपुल्स पार्टी (CPP) बनाई और देश में आजादी की लड़ाई शुरू की। एन्क्रूमा ने इसके लिए अहिंसा, एकता और नागरिक अवज्ञा जैसे गांधीवादी तरीकों का इस्तेमाल किया। एन्क्रूमा का मानना था कि बिना हिंसा के ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चलाकर ही घाना आजाद हो सकता है, जैसा गांधी ने भारत में किया था। एन्क्रूमा ने 1950 में ‘पॉजिटिव एक्शन’ नाम से देशभर में हड़ताल की अपील की। इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा, लेकिन इससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई। 6 मार्च 1957 को एन्क्रूमा की अगुआई में घाना अफ्रीका का पहला देश बना जिसने ब्रिटेन से आजादी हासिल की