राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटल विस्तार स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल मजबूती, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शुरू किया ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’
Sunday, 28 Dec 2025 02:30 am

Golden Hind News

जयपुर :- राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ शुरू किया है।

यह मंच चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आमजन के लिए एक सशक्त डिजिटल संवाद प्रणाली के रूप में कार्य करेगा, जिससे विभागीय समन्वय और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।

पारदर्शिता और सुशासन पर फोकस

चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि स्वास्थ्य से जुड़े विषय सीधे आम जनता से जुड़े होते हैं, इसलिए विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और त्वरित समाधान बेहद जरूरी है।
‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ के माध्यम से अब मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के प्राचार्य, चिकित्सा अधीक्षक, पीएमओ, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, छात्र और आम नागरिक — सभी एक ही मंच पर अपनी बात रख सकेंगे।

सप्ताह में दो दिन होगा सीधा संवाद

चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल के अनुसार यह डिजिटल संवाद मंच हर मंगलवार और गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
संवाद दो चरणों में होगा—

सुशासन दिवस पर शुरू किए गए इस मंच को पहले ही दिन जबरदस्त समर्थन मिला, जहां 150 से अधिक स्थानों से अधिकारियों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने ऑनलाइन भाग लिया।

इन मुद्दों पर होगी चर्चा

‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ के तहत

जैसे अहम मुद्दों पर नियमित चर्चा की जाएगी।

72 घंटे में एक्शन रिपोर्ट अनिवार्य

इस मंच की खास बात यह है कि बैठक में लिए गए फैसलों को तुरंत “इंस्टेंट मिनट्स” के रूप में रिकॉर्ड किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों को 72 घंटे के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) देना अनिवार्य होगा।
सभी मामलों की निगरानी सीधे चिकित्सा शिक्षा आयुक्त कार्यालय द्वारा की जाएगी।

स्वास्थ्य प्रशासन में बड़ा बदलाव

नरेश गोयल ने कहा कि ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के स्टाफ को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अब मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय को मजबूती देगी और सुशासन को जमीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी।