
जयपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर के नींदड़ क्षेत्र में आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुईं। राष्ट्रपति का यह दौरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के जन्मोत्सव तथा हनुमान महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से साधु-संत, धर्माचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और हनुमान महायज्ञ में आहुति अर्पित की। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को उनके जन्मदिवस पर शुभकामनाएं दीं और उनके द्वारा किए जा रहे धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कार्यों की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं।
नींदड़ में आयोजित इस धार्मिक समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और भजन-कीर्तन के साथ वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बना रहा। हनुमान महायज्ञ के दौरान देश और समाज की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जयपुर पुलिस, प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था संभाली। कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में यातायात को नियंत्रित किया गया, ताकि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
इस अवसर पर राजस्थान सरकार की ओर से भी वरिष्ठ मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सनातन परंपरा की झलक देखने को मिली।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर उनके जीवन, तपस्या और समाज सेवा पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने न केवल धार्मिक क्षेत्र में बल्कि संस्कृत, वेद, रामायण और शिक्षा के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया है। उनके मार्गदर्शन में चल रहे संस्थानों ने हजारों लोगों के जीवन को दिशा दी है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि भारत की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों से है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने, नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्र के कल्याण, सामाजिक एकता और विश्व शांति की प्रार्थना की गई। राष्ट्रपति ने आयोजन समिति और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आध्यात्मिक चेतना ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।