
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि लड़कियों को कम उम्र से ही अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, शारीरिक दक्षता और देशसेवा की भावना से जोड़ते हुए उन्हें सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस सेवाओं में करियर के लिए तैयार किया जाए। अब तक सैनिक स्कूलों को लेकर यह धारणा रही है कि वे मुख्यतः लड़कों के लिए हैं, लेकिन राजस्थान सरकार की इस पहल ने उस सोच को बदलने का काम किया है।
सरकारी योजना के अनुसार, पहले चरण में दो बालिका सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएंगे। इनमें से एक स्कूल बीकानेर और दूसरा सीकर जिले में खोला जाएगा। दोनों स्कूल पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा संचालित होंगे और इनमें आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
इन स्कूलों में छात्राओं को सामान्य पाठ्यक्रम के साथ ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण, खेलकूद, अनुशासन और नेतृत्व विकास से जुड़े विशेष कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार होंगी।
प्रत्येक सैनिक स्कूल में सीमित संख्या में सीटें रखी जाएंगी, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे। सरकार के अनुसार, इन स्कूलों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिभावकों और छात्राओं में इस योजना को लेकर खासा उत्साह है। प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट आधारित रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक कदम है। अब तक लड़कियों को रक्षा सेवाओं में आने के लिए सीमित अवसर मिलते थे, लेकिन इन सैनिक स्कूलों के माध्यम से उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही उसी माहौल और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, जो भविष्य में उनके करियर को मजबूत आधार देगा।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में अन्य जिलों में भी बालिका सैनिक स्कूल खोले जाएंगे। खासतौर पर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की छात्राओं को इस योजना से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, ताकि उन्हें भी समान अवसर मिल सकें।
राजस्थान की यह पहल शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी। इससे न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को प्रशिक्षित, अनुशासित और आत्मनिर्भर महिला नेतृत्व मिलेगा। यह योजना आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।