
देश में घरेलू रसोई गैस की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है। केंद्र सरकार ने 14.2 किलोग्राम के LPG सिलेंडर की कीमत 60 रुपए बढ़ा दी है। अब राजधानी दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 853 रुपए से बढ़कर 913 रुपए का हो गया है।
वहीं 19 किलो के कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपए की बढ़ोतरी की गई है और इसकी नई कीमत 1883 रुपए हो गई है। नई दरें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते तनाव के कारण मध्य-पूर्व से गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार ने 5 मार्च को आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है।
निर्देश में कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल केवल रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी।
साथ ही इन गैसों की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करने को कहा गया है, जिनमें
Indian Oil Corporation
Hindustan Petroleum
Bharat Petroleum
शामिल हैं। इसका मकसद देशभर में गैस सिलेंडर की सप्लाई बिना रुकावट बनाए रखना है।
सबसे बड़ा खतरा Strait of Hormuz के लगभग बंद होने से पैदा हुआ है।
यह करीब 167 किलोमीटर लंबा समुद्री रास्ता है जो Persian Gulf को Arabian Sea से जोड़ता है।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी मार्ग से मंगाता है।
पिछले सप्ताह ईरान के ड्रोन हमले के बाद Qatar के Ras Laffan Industrial City स्थित LNG प्लांट का उत्पादन रोक दिया गया।
भारत अपनी जरूरत की लगभग 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से आयात करता है।
सुरक्षा कारणों से उत्पादन बंद होने से भारत की गैस सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
गैस की संभावित कमी को लेकर Association of CGD Entities ने सरकारी कंपनी GAIL को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी।
स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत करीब 25 डॉलर प्रति यूनिट पहुंच चुकी है
यह कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस से दोगुनी से भी ज्यादा है
कंपनियों को डर है कि अगर CNG महंगी हुई तो लोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।
सरकार के इस फैसले का असर प्राइवेट कंपनियों, खासकर Reliance Industries पर भी पड़ सकता है।
प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG बनाने में लगाने से पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स का उत्पादन घट सकता है, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की संभावना है।
तेल कंपनियां हर महीने इन फैक्टर्स के आधार पर LPG की कीमत तय करती हैं:
अंतरराष्ट्रीय LPG कीमत
डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत
टैक्स और डीलर कमीशन
इसके बाद खुदरा कीमत तय होती है। सब्सिडी वाले सिलेंडर में अंतर की भरपाई सरकार करती है।
सरकार ने यह आदेश Essential Commodities Act 1955 के तहत जारी किया है।
इस कानून के तहत सरकार आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखने के लिए उत्पादन, वितरण और स्टॉक को नियंत्रित कर सकती है।