मुख्तार अंसारी मौत केस फिर सुर्खियों में, वकील बोले- जहर के सबूत Mukhtar Ansari की मौत पर सवाल: 2 साल बाद भी बैरक सील, वकील ने लगाए जहर देने के आरोप
Saturday, 28 Mar 2026 02:30 am

Golden Hind News

Mukhtar Ansari की मौत के करीब दो साल बाद भी यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

जहां आधिकारिक जांच में उनकी मौत को हार्ट अटैक बताया गया था, वहीं अब उनके वकील और परिवार ने इसे साजिश करार देते हुए नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्तार अंसारी की मौत 28 मार्च 2024 को बांदा जेल में हुई थी। इससे कुछ दिन पहले उन्होंने बाराबंकी कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर अपनी जान को खतरा बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जेल में उन्हें खाने में धीमा जहर (स्लो पॉइजन) दिया जा रहा है।

अब उनके वकील रणधीर सिंह सुमन का दावा है कि उनके पास जहर देने से जुड़े सबूत हैं। वे मजिस्ट्रियल जांच को “खानापूर्ति” बताते हुए इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

जांच में क्या सामने आया

मृत्यु के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। करीब 5 महीने चली जांच के बाद 16 सितंबर 2024 को रिपोर्ट सामने आई, जिसमें मौत की वजह हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफार्क्शन) बताई गई।

जांच रिपोर्ट के अनुसार:

इसके अलावा, मेडिकल रिपोर्ट में हृदय की मांसपेशियों में ब्लॉकेज और अन्य समस्याओं का जिक्र किया गया, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौत बीमारी के कारण हुई।

 परिवार और वकील के आरोप

हालांकि, मुख्तार अंसारी के परिवार और वकील इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि:

उनके बेटे उमर अंसारी ने भी आरोप लगाया कि शव की स्थिति सामान्य नहीं थी, जिससे हार्ट अटैक वाली थ्योरी पर सवाल उठते हैं।

 5 करोड़ की सुपारी का दावा

इस केस में एक और बड़ा दावा सामने आया है। मुख्तार अंसारी ने 2021 में कोर्ट को दी गई एक अर्जी में कहा था कि जेल में उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है और इसके लिए 5 करोड़ रुपए की सुपारी दी गई है।

हालांकि, इस दावे के समर्थन में अब तक कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

 बैरक नंबर-16 अब भी सील

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बांदा जेल की बैरक नंबर-16, जहां मुख्तार अंसारी को रखा गया था, आज भी सील है। उनके कपड़े, किताबें और निजी सामान भी जांच प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखे गए हैं।

जेल प्रशासन के अनुसार, यह सब कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और केस पूरी तरह समाप्त होने तक ऐसे ही रहेगा।

 कानूनी विशेषज्ञों की राय

कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जहर देने या सुपारी जैसे आरोपों को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

वहीं, कुछ पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कैदी ने अपनी मौत से पहले खतरे की आशंका जताई हो और कुछ ही दिनों बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है।

 निष्कर्ष

Mukhtar Ansari की मौत अब भी एक विवादित मुद्दा बनी हुई है। एक ओर सरकारी जांच इसे प्राकृतिक मौत बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार और वकील इसे साजिश मान रहे हैं।

अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है और क्या नए सबूत इस केस की दिशा बदलते हैं। फिलहाल, यह मामला कानून और जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।