
प्रदेश में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने तथा पशुपालकों के हितों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग की एक महत्वपूर्ण बजट समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार पशुपालकों और पशुधन के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बजट में स्वीकृत सभी योजनाओं और कार्यों को शत-प्रतिशत पूरा किया जाए और कोई भी योजना अधूरी न रहे।
बैठक के दौरान वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि अधिकांश योजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जा चुकी हैं। हालांकि उन्होंने शेष कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
प्रमुख शासन सचिव विकास सीताराम भाले सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 35 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण हो चुका है, जबकि 19 लाख से अधिक पशुओं का बीमा किया जा चुका है।
इसके अलावा लगभग 7 हजार दावों का निस्तारण कर पशुपालकों को 14 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। मंत्री ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिए कि वे दावों के निस्तारण में तेजी लाएं और लंबित मामलों को जल्द खत्म करें।
मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) के प्रभावी संचालन पर भी बैठक में चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 16 लाख से अधिक पशुपालकों को इस सेवा का लाभ मिला है और 62 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया गया है।
मंत्री जोराराम कुमावत ने निर्देश दिए कि हर गांव को इस सेवा से जोड़ा जाए और कॉल सेंटर को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। उन्होंने प्रचार-प्रसार बढ़ाने पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक पशुपालक इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना की धीमी प्रगति पर मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन के दौरान यदि कहीं अनुचित शुल्क वसूला जा रहा है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और इसे फ्लैगशिप कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए।
बैठक में 16 मार्च से शुरू हुए एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण अभियान की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि 16 मई तक चलने वाले इस अभियान को पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
उन्होंने लंपी और कर्रा जैसी मौसमी बीमारियों पर नियंत्रण के लिए मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है क्योंकि पशुपालकों की आजीविका इससे जुड़ी होती है।
बैठक में वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं के तहत स्वीकृत संस्थानों के भवन निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 80 प्रतिशत से अधिक भूमि आवंटन का कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा नए डिग्री और डिप्लोमा कॉलेजों की स्थापना, रिक्त पदों पर भर्ती और ब्लॉक स्तरीय प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण पर भी चर्चा की गई।
कुल मिलाकर, यह बैठक पशुपालन विभाग की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। जोराराम कुमावत द्वारा दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि सरकार पशुपालकों के हितों को लेकर गंभीर है और योजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही है।
इन प्रयासों से न केवल पशुधन का संरक्षण होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।