महिला सशक्तिकरण पर सांसद मंजू शर्मा का बड़ा बयान महिलाओं को केवल भागीदारी नहीं, प्रतिनिधित्व भी जरूरी—सांसद मंजू शर्मा
Monday, 13 Apr 2026 02:30 am

Golden Hind News

महिलाओं को केवल भागीदारी नहीं, प्रतिनिधित्व भी चाहिए — सांसद

राजधानी जयपुर में आयोजित महिला युवा संसद कार्यक्रम में मंजू शर्मा ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में प्रभावी प्रतिनिधित्व भी मिलना चाहिए।

यह कार्यक्रम ‘नारी शक्ति: विकसित भारत की आवाज’ विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें युवा महिला प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।


 महिला आरक्षण पर स्पष्ट संदेश

सांसद मंजू शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने बताया कि इस कानून का उद्देश्य वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करना है, जिससे नीति निर्माण में उनकी भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ेगा।


महिलाओं के विकास में सरकार की भूमिका

सांसद ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि:

जैसी पहलें महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा रही हैं।


 महिला युवा संसद में सक्रिय भागीदारी

इस कार्यक्रम में महिला प्रतिभागियों ने भी अपने विचार खुलकर रखे।
उन्होंने:

जैसे विषयों पर चर्चा की।


संवाद और जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भी महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया और बताया कि वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व किस प्रकार बढ़ रहा है।

इस पहल का उद्देश्य युवाओं, विशेष रूप से युवतियों को राजनीति, नीति निर्माण और सामाजिक नेतृत्व के लिए प्रेरित करना है।


निष्कर्ष

महिला युवा संसद जैसे मंच न केवल युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर देते हैं, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने और उसमें सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रेरित करते हैं।

सांसद मंजू शर्मा का यह संदेश स्पष्ट करता है कि महिलाओं का सशक्तिकरण तभी पूर्ण होगा, जब उन्हें निर्णय लेने वाले पदों पर उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।