
Bhajan Lal Sharma ने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को जल संरक्षण का संदेश देते हुए Bisalpur Dam स्थित श्री महादेव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” का शुभारंभ किया।
यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन और जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल भविष्य सुनिश्चित करना है।
गंगा दशहरा भारतीय संस्कृति और आस्था का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने जल को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की सबसे बड़ी आवश्यकता है। राजस्थान जैसे राज्य में, जहां जल संकट समय-समय पर गंभीर चुनौती बनकर सामने आता है, वहां जल संरक्षण और जल प्रबंधन की महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के माध्यम से आमजन को जल बचाने के लिए प्रेरित कर रही है।
बीसलपुर डैम प्रदेश की जल आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है और लाखों लोगों की प्यास बुझाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने यहां चल रहे जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन कार्यों की प्रगति का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य गुणवत्ता, समयबद्धता और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका धरातल पर सही तरीके से लागू होना भी उतना ही आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जल संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रभावी प्रबंधन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में जल संकट को कम करने के लिए जलाशयों का पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन, नदियों और तालाबों के संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचना को मजबूत करने जैसे अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को भी जल बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना न रहकर जनभागीदारी का अभियान बन सके।
उन्होंने कहा कि यदि आज जल संरक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले समय में जल संकट और भी भयावह रूप ले सकता है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और जल के अत्यधिक दोहन के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि वह जल का विवेकपूर्ण उपयोग करे और अनावश्यक जल बर्बादी को रोके। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपने घरों, खेतों और कार्यस्थलों पर जल बचाने के छोटे-छोटे उपाय अपनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन का मूल मंत्र है। यदि जल सुरक्षित रहेगा तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझें और जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जल की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए जल बचाना केवल मानव हित नहीं बल्कि सम्पूर्ण प्रकृति की रक्षा के लिए भी आवश्यक है।
इस अवसर पर जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यों और योजनाओं की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण, तालाब गहरीकरण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए कई परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए ताकि जनता को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने युवाओं और सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग जल संरक्षण को अपना दायित्व नहीं मानेगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया जाएगा ताकि जल संरक्षण जनआंदोलन का रूप ले सके।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति में जल संरक्षण की परंपरा सदियों पुरानी रही है। यहां बावड़ियां, तालाब और जोहड़ जैसे पारंपरिक जल स्रोत हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता का उदाहरण हैं। आज आवश्यकता है कि हम उन परंपराओं को पुनर्जीवित करें और आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर जल संकट का समाधान खोजें। राज्य सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अंत में प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” से जुड़कर जल बचाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति जल संरक्षण के लिए एक छोटा कदम भी उठाएगा, तो यह सामूहिक प्रयास प्रदेश को जल समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सुरक्षित, समृद्ध और हरित भविष्य के निर्माण के लिए जल संरक्षण को जन-जन का संकल्प बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।