बहराना धाम संघर्ष समिति ने प्रशासन की कमेटी का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- सीधे समाधान चाहिए भैराणा धाम के संतों ने बेनीवाल के समझौते को नकारा, बोले : बेनीवाल से हमारा कोई लेना देना नहीं है
Tuesday, 02 Jun 2026 02:30 am

Golden Hind News

जयपुर। दादूपंथ की तपोस्थली बहराना धाम को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच बहराना धाम संघर्ष समिति ने प्रशासन द्वारा प्रस्तावित कमेटी को अस्वीकार कर दिया है। समिति का कहना है कि कमेटी के अधिकार, संरचना और भूमिका को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, इसलिए वह ऐसी किसी कमेटी का हिस्सा नहीं बनेगी।

संघर्ष समिति की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में बताया गया कि 5 अप्रैल 2026 को दादू दयाल जी महाराज की लगभग 500 वर्ष पुरानी तपोस्थली बहराना धाम के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था। 15 अप्रैल से संत लगातार तपस्या और धरना कर रहे हैं।

समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि 26 मई को जिला प्रशासन के साथ हुई वार्ता में उनकी सात प्रमुख मांगों में से अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन गई थी। हालांकि 27 मई को प्रशासन की ओर से केवल यह आश्वासन दिया गया कि रिको परियोजना से जुड़े कार्यों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी।

समिति का आरोप है कि प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कमेटी में कौन-कौन सदस्य होंगे, उसका अध्यक्ष कौन होगा, उसके अधिकार क्या होंगे और संत समाज की भूमिका क्या रहेगी। इसी कारण संघर्ष समिति ने कमेटी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

राजनीतिक बयानों से दूरी

प्रेस वार्ता में संत समाज ने स्पष्ट किया कि 27 मई को आंदोलन के मंच से दिए गए किसी भी राजनीतिक बयान से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि बहराना धाम संघर्ष समिति का उद्देश्य केवल "बहराना धाम बचाओ और रिको हटाओ" आंदोलन है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

हालांकि समिति ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल आंदोलन के समर्थन में आए थे और वे दादूपंथ से जुड़े श्रद्धालु हैं। संत समाज ने कहा कि उनका मंच धार्मिक और पर्यावरण संरक्षण का मंच था, न कि राजनीतिक मंच।

मुख्यमंत्री पर जताया भरोसा

संघर्ष समिति ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पर भरोसा जताते हुए कहा कि राज्य सरकार संतों का सम्मान करने वाली सरकार है और मुख्यमंत्री धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। समिति को उम्मीद है कि सरकार बहराना धाम, पर्यावरण और स्थानीय हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी।

समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रशासन को साधु-संतों के साथ बिंदुवार चर्चा कर व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही कहा कि यदि मुख्यमंत्री कोई सार्थक निर्णय लेते हैं तो संघर्ष समिति पूर्ण सहयोग करेगी।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें

संघर्ष समिति ने दोहराया कि वह विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन पर्यावरण और धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाकर विकास स्वीकार्य नहीं होगा।