जयपुर में कॉलेज के पास पटाखा गोदाम पर रेड, 1000 किलो विस्फोटक जब्त जयपुर में कॉलेज से 300 मीटर दूर मिला पटाखा गोदाम, पुलिस ने 10 से ज्यादा ठिकानों पर मारी रेड
Thursday, 18 Jun 2026 02:30 am

Golden Hind News

खोनागोरियान पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने अवैध पटाखा गोदामों और फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार देर रात व्यापक अभियान चलाया। पुलिस कमिश्नरेट की विशेष टीम (CST) ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से अधिक स्थानों पर एक साथ दबिश देकर बड़ी मात्रा में पटाखे, बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की। कार्रवाई के दौरान कई गोदामों की जांच की गई, जबकि एक गोदाम को तय सीमा से अधिक विस्फोटक सामग्री मिलने पर तत्काल सील कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद राजधानी में अवैध पटाखा कारोबार और स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान रात 10 बजे से लेकर करीब 1 बजे तक चलाया गया। अभियान का उद्देश्य ऐसे गोदामों और फैक्ट्रियों की पहचान करना था, जहां नियमों के विपरीत पटाखों और विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया जा रहा है। हाल ही में खोनागोरियान क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड में आठ लोगों की मौत के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरे शहर में विशेष निगरानी अभियान शुरू किया था।

लाइसेंस से कहीं ज्यादा मिला विस्फोटक स्टॉक

कार्रवाई के दौरान जमवारामगढ़ रोड स्थित बड़ी का बास क्षेत्र में नाई की थड़ी से सुमेल रोड जाने वाले मार्ग पर स्थित एक लाइसेंसधारी गोदाम की जांच की गई। जांच में सामने आया कि गोदाम को केवल 600 किलोग्राम पटाखों के भंडारण की अनुमति थी, लेकिन मौके पर 1,000 किलोग्राम से अधिक बारूद और पटाखे रखे मिले। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक कांटे से पूरे स्टॉक का वजन कराया, जिसमें करीब 300 से अधिक कार्टनों में विस्फोटक सामग्री पाई गई।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गोदाम को सील कर दिया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि गोदाम किराए पर लिया गया था और दो दुकानों में इसका संचालन किया जा रहा था। मौके पर कुल 18 दुकानें बनी हुई थीं, जिनमें से दो दुकानों में बड़ी मात्रा में पटाखों का स्टॉक रखा गया था।

जयसिंहपुरा थाना प्रभारी मुकेश मीणा ने बताया कि गोदाम किराए पर लेने वाले व्यक्ति की पहचान दीपक खंडेलवाल के रूप में हुई है। उनकी जयपुर के चांदी की टकसाल क्षेत्र में "भारतीय पटाखा शॉप" नाम से दुकान संचालित होती है। अब पुलिस लाइसेंस की शर्तों और स्टॉक की वैधता की भी जांच कर रही है।

कॉलेज और छात्रावास के पास मिले गोदाम

सीएसटी की टीम ने सुमेल रोड पर एलएन मित्तल कॉलेज के पास भी दो पटाखा गोदामों की जांच की। ये गोदाम कॉलेज से लगभग 300 मीटर की दूरी पर संचालित पाए गए। दोनों गोदाम "पूर्णिमा" नाम से संचालित हो रहे थे। गोदाम संचालक अनिल अग्रवाल ने दावा किया कि उनके पास 1,500-1,500 किलोग्राम भंडारण का लाइसेंस है।

हालांकि पुलिस जांच के दौरान गोदाम में निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक होने की बात सामने आई। संचालक ने बताया कि फिलहाल गोदाम में करीब 600 से 700 किलोग्राम पटाखे रखे हुए हैं और पुलिस ने निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त स्टॉक की बात कही थी।

सबसे गंभीर बात यह रही कि गोदाम शैक्षणिक संस्थान और छात्रावास के बेहद करीब संचालित हो रहे थे। हालांकि संचालक ने दावा किया कि गोदाम कॉलेज से डेढ़ किलोमीटर दूर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह दूरी करीब 300 मीटर बताई जा रही है। यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती, तो बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की जान खतरे में पड़ सकती थी।

आवासीय इलाकों में भी मिला अवैध भंडारण

विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने चेनपुरा क्षेत्र में फोर्थ आरएसी के पास "मैजिक फायर वर्क्स" नाम से संचालित एक अवैध पटाखा कारखाने और गोदाम का भी पता लगाया। इसके अलावा जमवारामगढ़ थाना क्षेत्र के हीरावाला बस स्टैंड के पास शराब के ठेके के पीछे दो अवैध गोदामों पर कार्रवाई की गई।

हीरावाला से रूपवास लिंक रोड और जमवारामगढ़ मार्ग पर भी दो-दो गोदामों का पता चला, जहां आवासीय क्षेत्र के बीच बड़ी मात्रा में पटाखे और विस्फोटक सामग्री रखी गई थी। पुलिस इन गोदामों के मालिकों की पहचान करने और लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों की जांच में जुटी है।

स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कार्रवाई के दौरान सामने आया कि जिन क्षेत्रों में छापेमारी की गई, वहां लंबे समय से पटाखा गोदाम और फैक्ट्रियां संचालित हो रही थीं। ऐसे में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीट सिस्टम लागू होने के बावजूद अवैध गोदामों का वर्षों तक संचालन होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

कई स्थानों पर निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक बारूद और पटाखे मिले, जबकि कुछ जगहों पर बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के विस्फोटक सामग्री रखी जा रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गोदामों के बारे में क्षेत्र में पहले से जानकारी थी, लेकिन कभी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

खोनागोरियान हादसे के बाद तेज हुई कार्रवाई

कुछ दिन पहले खोनागोरियान क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड में आठ लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने राजधानी में अवैध पटाखा कारोबार और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया। घटना के बाद पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने पूरे शहर में अवैध फैक्ट्रियों और गोदामों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे।

इसके तहत डोर-टू-डोर सर्वे, लाइसेंसधारी गोदामों का सत्यापन और अवैध भंडारण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नियम का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जवाबदेही तय करने की मांग

सीएसटी की कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि समय रहते निगरानी होती तो इतने बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण कैसे जारी रहा। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विस्फोटक सामग्री का भंडारण केवल निर्धारित मानकों और सुरक्षित दूरी पर ही किया जाना चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास ऐसे गोदाम गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

जांच जारी

पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिन गोदामों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है, उनके खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी लाइसेंसधारी गोदामों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना को रोका जा सके।

पुलिस का कहना है कि राजधानी में अवैध पटाखा कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में भी इसी तरह के विशेष अभियान लगातार चलाए जाएंगे।