
जयपुर। मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil एवं हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के साथ यमुना जल परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) के प्रमुख बिंदुओं को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक के दौरान किशाऊ बांध परियोजना से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यमुना जल परियोजना के तहत पानी को पारंपरिक नहरों की बजाय पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाने का प्रस्ताव है। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनेगी।
सीआर पाटिल ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े छह राज्यों के विभिन्न मुद्दों का समाधान हो चुका है और जल्द ही इससे संबंधित एमओए पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस परियोजना से राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा सहित कई राज्यों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यमुना जल परियोजना राजस्थान, विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी तथा लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र और हरियाणा सरकार के सहयोग से परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही दशकों से लंबित जल परियोजनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई गति मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लागू होने के बाद राजस्थान को अपने हिस्से का पानी मिलने लगेगा, जिससे किसानों, उद्योगों और आमजन को व्यापक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य में जल प्रबंधन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हर व्यक्ति तक पानी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारें प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं। रेणुका, लखवार और किशाऊ परियोजनाओं के क्रियान्वयन से राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक में वर्षा जल संरक्षण और उसे राजस्थान तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार, राजस्थान जल संसाधन विभाग और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।