
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को राज्य में कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को अपराधियों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी क्षेत्र में होने वाले अपराधों की जवाबदेही सीधे संबंधित रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) की होगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों को फटकार लगाते हुए कहा कि संगठित अपराध, साइबर अपराध और नशा तस्करी के मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गोगुंदा में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस जारी किया गया। वहीं, अलवर, श्रीगंगानगर और भरतपुर में हाल में हुई आपराधिक घटनाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों और उनके आकाओं पर ऐसी कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। उन्होंने कहा कि लगातार अच्छे परिणाम मिलने के बावजूद एक भी अप्रिय घटना पुलिस और प्रदेश की छवि को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 की तुलना में संगठित अपराध और फायरिंग की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इस गिरावट की गति और तेज करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने अवैध हथियारों की सप्लाई चेन को संगठित अपराध की रीढ़ बताते हुए इसे पूरी तरह तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में आर्म्स एक्ट के मामलों में वृद्धि हुई है, वहां केवल हथियार बरामद करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क का पता लगाकर सरगनाओं तक पहुंचते हुए उसे ध्वस्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने अपराधियों के सोशल और फाइनेंशियल नेटवर्क को समाप्त करने पर जोर देते हुए कहा कि सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ाई जाए और अपराधियों को फॉलो करने वाले युवाओं पर विशेष नजर रखी जाए। साथ ही भू-माफिया गतिविधियों, हवाला लेन-देन और अपराधियों के आय के स्रोतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। ड्रग तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त, कुर्क और ध्वस्त करने की कार्रवाई में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए साइबर पेट्रोलिंग बढ़ाने और साइबर सेल में विशेष कार्मिक तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई कर आमजन का विश्वास बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर ठगी का कोई भी नेटवर्क राजस्थान में सक्रिय नहीं रहना चाहिए।
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराधों को अत्यंत गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों में त्वरित एवं कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षकों को एनडीपीएस, गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर, अवैध हथियारों तथा संगठित अपराध से जुड़े लंबित मामलों का व्यक्तिगत विश्लेषण कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने सभी जिलों में नियमित रूप से सीएलजी (कम्युनिटी लाइजन ग्रुप) की बैठकें आयोजित करने तथा उनकी मुख्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि पुलिस और आमजन के बीच बेहतर संवाद एवं समन्वय स्थापित हो सके तथा प्राप्त सुझावों एवं शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग तथा पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी रेंज महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।