त्रिपुरा DGP अनुराग धनखड़ का निधन त्रिपुरा DGP अनुराग धनखड़ पुलिस मुख्यालय में मृत मिले, जानिए नीरव मोदी केस से लेकर CBI तक का पूरा सफर
Monday, 20 Jul 2026 02:30 am

Golden Hind News

त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़ का निधन: पुलिस मुख्यालय में मृत मिले, जांच जारी; जानिए उनका पूरा प्रशासनिक सफर

 त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ सोमवार को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में अपने कार्यालय में मृत पाए गए। इस घटना ने पुलिस महकमे, प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में गहरा सदमा पैदा कर दिया है। प्रारंभिक रिपोर्टों में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मृत्यु के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री माणिक साहा, मुख्य सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारी पुलिस मुख्यालय तथा अस्पताल पहुंचे। अनुराग धनखड़ को तत्काल जी.बी. पंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल को सील कर फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

मृत्यु के कारणों की जांच जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना की परिस्थितियां अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में आत्महत्या की आशंका व्यक्त की गई है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि की जाएगी।

कौन थे अनुराग धनखड़?

अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे और त्रिपुरा कैडर से संबंध रखते थे। उन्होंने अपने तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर में राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। मई 2025 में उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे DGP (इंटेलिजेंस) के पद पर कार्यरत थे।

PNB-नीरव मोदी घोटाले की जांच में निभाई अहम भूमिका

अनुराग धनखड़ को राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पहचान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में उनकी सेवाओं के कारण मिली। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े बहुचर्चित नीरव मोदी बैंक घोटाला मामले की जांच का नेतृत्व करने वाली टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

करीब 13 हजार करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले की जांच देश की सबसे चर्चित वित्तीय जांचों में शामिल रही। उनके नेतृत्व में जांच एजेंसियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की जांच आगे बढ़ाई।

CBI में संभाले कई बड़े पद

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान अनुराग धनखड़ ने CBI में पुलिस अधीक्षक (SP), उप महानिरीक्षक (DIG), संयुक्त निदेशक (Joint Director) और अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) जैसे वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। उन्हें हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच में अनुभव रखने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता था।

उनकी पहचान एक पेशेवर, निष्पक्ष और गंभीर जांच अधिकारी के रूप में बनी। कई संवेदनशील मामलों की जांच में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

1984 दंगा मामलों की SIT के अध्यक्ष रहे

गृह मंत्रालय द्वारा गठित 1984 के सिख विरोधी दंगा मामलों की विशेष जांच टीम (SIT) के अध्यक्ष के रूप में भी अनुराग धनखड़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान वर्षों पुराने मामलों की दोबारा जांच की गई और कई मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

उनके नेतृत्व में SIT ने कई लंबित मामलों की समीक्षा कर नए साक्ष्यों के आधार पर जांच को गति दी।

CISF और संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी दी सेवाएं

CBI के अलावा अनुराग धनखड़ ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में महानिरीक्षक (कार्मिक) के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 2003-04 में वे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के कोसोवो मिशन का हिस्सा रहे, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिसिंग और सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारियां निभाईं।

उनका अनुभव राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मिशनों तक फैला हुआ था, जिसके कारण उन्हें देश के अनुभवी IPS अधिकारियों में गिना जाता था।

त्रिपुरा पुलिस के लिए बड़ी क्षति

अनुराग धनखड़ की अचानक मृत्यु को त्रिपुरा पुलिस के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने भी घटना पर दुख जताया है।

विपक्ष ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि राज्य सरकार ने कहा है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ कराई जाएगी और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से यही कहा गया है कि मृत्यु के कारणों को लेकर किसी भी प्रकार का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अनुराग धनखड़ का तीन दशक से अधिक लंबा प्रशासनिक करियर कई महत्वपूर्ण जांचों, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दायित्वों और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। वहीं उनकी अचानक हुई मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।