
राजस्थान सरकार ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर शुरू किए गए 'गिव अप अभियान' के माध्यम से प्रदेश के 1 करोड़ 56 हजार 511 नए पात्र लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत खाद्य सुरक्षा का लाभ उपलब्ध कराया गया है। राज्य सरकार के अनुसार यह अभियान सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि अभियान के दौरान करीब 93 लाख 48 हजार 596 सक्षम लोगों ने स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा का लाभ छोड़ दिया। इससे योजना में नए पात्र परिवारों को शामिल करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हुआ और लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे जरूरतमंद लोगों को राहत मिली।
बुधवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात कर गिव अप अभियान की सफलता पर उनका आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा और मार्गदर्शन में शुरू किया गया यह अभियान गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि प्रदेश का कोई भी पात्र व्यक्ति केवल सीमा पूरी होने के कारण खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित न रहे।
राजस्थान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत लाभार्थियों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में निर्धारित है। प्रदेश में लगभग 4.46 करोड़ लाभार्थियों की सीमा पहले ही पूरी हो चुकी थी। इसके कारण नए पात्र परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर 1 नवंबर 2024 से 'गिव अप अभियान' शुरू किया गया। अभियान का उद्देश्य आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा का लाभ छोड़ने के लिए प्रेरित करना था, ताकि उनकी जगह जरूरतमंद परिवारों को योजना से जोड़ा जा सके।
सरकार के अनुसार अभियान को आम जनता का व्यापक समर्थन मिला। लगभग 93.48 लाख सक्षम लाभार्थियों ने स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ छोड़ दिया।
इसके बाद 26 जनवरी 2025 को खाद्य सुरक्षा पोर्टल दोबारा खोला गया, जिससे नए पात्र परिवार आवेदन कर सके।
खाद्य सुरक्षा पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 87 लाख 60 हजार 847 लोगों को योजना से जोड़ा गया।
इसके अलावा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इससे पहले भी 12 लाख 95 हजार 664 लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ दिया जा चुका था।
इन दोनों चरणों को मिलाकर अब तक 1 करोड़ 56 हजार 511 नए पात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा चुकी है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने इसे राजस्थान के इतिहास की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा उपलब्धियों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर स्वैच्छिक रूप से लाभ छोड़ने और नए पात्र लोगों को योजना से जोड़ने का यह अभियान सामाजिक भागीदारी और संवेदनशील शासन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंत्री ने बताया कि यह अभियान केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के दौरान चलाए गए 'गिव अप अभियान' की तर्ज पर शुरू किया गया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार उज्ज्वला योजना में लगभग 1 करोड़ 16 लाख लोगों ने स्वेच्छा से गैस सब्सिडी छोड़ी थी, उसी तरह राजस्थान में भी लोगों ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए खाद्य सुरक्षा का लाभ छोड़ा, जिससे गरीब परिवारों को योजना का लाभ मिल सका।
सरकार के अनुसार खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल होने के बाद लाभार्थियों को केवल रियायती खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।
इनमें प्रमुख रूप से—
जैसी योजनाएं शामिल हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि गिव अप अभियान का उद्देश्य केवल लाभार्थियों की संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे।
इस अभियान ने आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राज्य सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू किया गया यह अभियान "सशक्त राजस्थान–समृद्ध राजस्थान" के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार के अनुसार खाद्य सुरक्षा, सामाजिक न्याय और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे, ताकि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहे।