
राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी, मानव तस्करी और संगठित साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारतीय युवाओं को विदेश में आकर्षक वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम के साइबर स्कैम सेंटर तक पहुंचाता था। वहां उनके पासपोर्ट और पहचान संबंधी दस्तावेज जब्त कर उन्हें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य ऑनलाइन ठगी से जुड़े अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
राजस्थान पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त महत्वपूर्ण सूचना, तकनीकी विश्लेषण और लंबे समय तक की गई जांच के आधार पर पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंच बनाई। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें मानव तस्करी, जबरन श्रम और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध के तत्व भी शामिल हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के डाटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें विभिन्न माध्यमों से कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम भेजा गया था। इनमें से कई लोग अभी तक भारत वापस नहीं लौटे हैं।
भारत लौटे कुछ पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि विदेश पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज छीन लिए गए। इसके बाद उन्हें साइबर स्कैम सेंटर में कैद जैसी परिस्थितियों में रखा गया और रोजाना घंटों तक ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और भारी आर्थिक दंड की धमकी दी जाती थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बेरोजगार युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी का झांसा देते थे। उन्हें बताया जाता था कि वे ग्राहक सेवा, डेटा एंट्री, डिजिटल मार्केटिंग या अन्य कॉर्पोरेट कार्य करेंगे।
लेकिन विदेश पहुंचते ही वास्तविकता पूरी तरह अलग होती थी। वहां उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे और उन्हें स्कैम सेंटर में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। सुबह लगभग 9 बजे से रात 11:30 बजे तक लगातार काम कराया जाता था। किसी भी प्रकार का विरोध करने पर शारीरिक हिंसा, भोजन रोकने और हजारों डॉलर का जुर्माना लगाने की धमकी दी जाती थी।
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) और सागर सिंह, दोनों निवासी ब्यावर, को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से मोबाइल फोन, पासपोर्ट, विदेशी यात्रा संबंधी दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
डिजिटल जांच में पुलिस को विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन सेवाओं, फर्जी जीपीएस लोकेशन, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Binance और अन्य अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।
इन दोनों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई करते हुए जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी उस समय टूरिस्ट वीजा के माध्यम से म्यांमार जाने की तैयारी कर रहे थे।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि साइबर स्कैम सेंटर में पहुंचने के बाद पहले उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से संपर्क करने का काम सौंपा जाता था।
आरोपी पहले कई दिनों तक सामान्य बातचीत कर पीड़ितों का विश्वास जीतते थे। इस दौरान वे उनके परिवार, आय, बैंकिंग व्यवस्था, व्यवसाय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद पीड़ितों को क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन निवेश योजनाओं में भारी मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
ठगी से प्राप्त धनराशि पहले भारत में संचालित म्यूल बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी, विशेष रूप से USDT, में बदलकर चीन और कंबोडिया में बैठे नेटवर्क संचालकों तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस के अनुसार प्रत्येक आरोपी की इस नेटवर्क में अलग भूमिका थी।
राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) कंबोडिया के पोइपेट स्थित स्कैम कंपाउंड में एचआर की भूमिका निभाता था। वह भारतीय युवाओं की भर्ती करता था और उन्हें अधिक वेतन का लालच देकर विदेश भेजने के बदले कमीशन प्राप्त करता था।
सागर सिंह फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से दोस्ती करता था। कई दिनों तक बातचीत कर उनकी आर्थिक जानकारी एकत्र करता और फिर उन्हें टीम लीडर के पास भेज देता, जहां निवेश के नाम पर ठगी की जाती थी।
जीतूराज उर्फ जेम्स के नाम पर क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर खाता संचालित था। वह साइबर ठगी से प्राप्त धन को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाने का काम करता था। इसके अलावा वह भारत से म्यूल बैंक खाते, मोबाइल सिम और युवाओं के पासपोर्ट उपलब्ध कराने में भी सक्रिय था।
रवि कुमार उर्फ माही वर्ष 2023 से कंबोडिया के स्कैम सेंटर में सक्रिय था। वह नए लोगों को फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों को जाल में फंसाने का प्रशिक्षण देता था। बाद में वह म्यांमार स्थित नए साइबर स्कैम सेंटर में जाने की तैयारी कर रहा था।
अनिल कुमार उर्फ डेविल, जो जीतूराज का भाई है, लगभग एक वर्ष तक कंबोडिया के स्कैम सेंटर में सक्रिय रहा। उसे म्यांमार के एक स्कैम सेंटर में कथित "कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर" के नाम पर भेजा जा रहा था, लेकिन पुलिस ने उड़ान भरने से पहले ही उसे कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया।
राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पासपोर्ट, विदेशी वीजा, मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग संबंधी जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इन साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके।
पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क की जड़ें कई देशों तक फैली हुई हैं और जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी संभव है।
राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक ऑफरों पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। किसी भी एजेंट या कंपनी के माध्यम से विदेश जाने से पहले उसकी वैधता और सरकारी अनुमति की पूरी जांच करें।
यदि किसी व्यक्ति को साइबर धोखाधड़ी, फर्जी नौकरी, ऑनलाइन निवेश या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल या अपने नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।
इस पूरे ऑपरेशन को स्टेट साइबर क्राइम थाना की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन तथा डीएसपी एवं थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने की। टीम में इंस्पेक्टर नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार सामोता, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, दौलतराम, कांस्टेबल सुभाष कुमार तथा चालक कांस्टेबल सूबे सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राजस्थान पुलिस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और मानव तस्करी से जुड़े इस नेटवर्क के खिलाफ जांच जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है तथा पूरे गिरोह की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों का पता लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।