
राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रसूताओं सहित गंभीर मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, गायत्री राठौड़ ने सभी ब्लड सेंटरों को प्रतिदिन ई-रक्तकोष पोर्टल पर रक्त उपलब्धता का अद्यतन विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय पर हर महीने कम से कम एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।
मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रक्त उपलब्ध होने से प्रसूताओं के गंभीर ऑपरेशन के दौरान समय पर रक्त मिल सकेगा। इससे मरीजों के परिजनों को रिप्लेसमेंट ब्लड की व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और आपातकालीन उपचार में देरी भी नहीं होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों को स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय पर हर महीने कम से कम एक रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा।
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि सभी रक्तदान शिविरों में केवल राजकीय ब्लड सेंटर की अधिकृत रक्त संग्रहण टीम के माध्यम से ही रक्त संग्रह किया जाए। इससे संबंधित क्षेत्र के ब्लड बैंकों में पर्याप्त रक्त भंडार बनाए रखने में मदद मिलेगी।
बैठक में सभी ब्लड सेंटरों को निर्देश दिए गए कि वे प्रतिदिन ई-रक्तकोष पोर्टल पर उपलब्ध रक्त की जानकारी अपडेट करें। इससे पूरे प्रदेश में विभिन्न ब्लड बैंकों की स्थिति की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर किसी भी जिले में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना आसान होगा।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
प्रमुख शासन सचिव ने उन ब्लड बैंकों पर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए जहां बड़ी मात्रा में संग्रहित रक्त डिस्कार्ड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्त की अनावश्यक बर्बादी रोकना आवश्यक है और ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान बीकानेर, उदयपुर, बांसवाड़ा, जनाना अस्पताल जयपुर, एमडीएम अस्पताल जोधपुर, श्रीगंगानगर और एसएमएस अस्पताल जयपुर में दर्ज मातृ मृत्यु के मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
प्रमुख शासन सचिव ने संबंधित चिकित्सकों के साथ उपचार व्यवस्था और चिकित्सा प्रोटोकॉल पर चर्चा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश दिए। आदिवासी बहुल जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं के पोषण और नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों की सूची तैयार करने तथा खराब उपकरणों की तत्काल मरम्मत या प्रतिस्थापन के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा दवाइयों और आवश्यक उपभोग्य सामग्री की उपलब्धता की समीक्षा भी की गई। मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
मानसून को देखते हुए प्रमुख शासन सचिव ने जर्जर भवनों में संचालित सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल सुरक्षित भवनों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी डिलीवरी पॉइंट वाले अस्पतालों में आवश्यक संसाधन, दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध रखने को कहा गया, ताकि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि रक्तदान को बढ़ावा देने, ई-रक्तकोष पोर्टल की नियमित मॉनिटरिंग और अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे कदमों से प्रदेश में मातृ एवं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।