
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षों की अवैध कटाई को रोकने के लिए विधेयक लाने, द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल-2026 लाने, ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति ढांचे को मजबूत बनाने के लिए नीति लाने, सैनिक कल्याण, कार्मिक कल्याण, रोजगार एवं पदोन्नति के अवसरों में वृद्धि और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने से सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।
द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल, 2026
राज्य मंत्रिमंडल ने पर्यावरण एवं जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'द राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल, 2026' के प्रारूप का अनुमोदन किया है। यह विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।
इस विधेयक के अंतर्गत राज्य वृक्ष खेजड़ी, राज्य पुष्प रोहिड़ा, बरगद, पीपल, लसोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरोंजी सहित कुल 29 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के संवर्धन एवं संरक्षण को विशेष बढ़ावा मिलेगा।
इससे अवैध रूप से वृक्षों को काटने, उखाड़ने, गिराने की प्रभावी रोकथाम हो सकेगी। साथ ही, पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने, रेगिस्तान विस्तार को रोकने, जैव विविधता को बचाने और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल असर को कम करने में सहायता मिलेगी। विधेयक में गैर वन भूमि में खड़े वृक्षों की कटाई को नियंत्रित करने तथा जवाबदेही निर्धारित करने हेतु ऐसे अपराधों को संज्ञेय एवं जमानती बनाया गया है।
दोष सिद्ध पाये जाने पर एक वर्ष का कारावास या एक लाख रुपये जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है। कोई भी व्यक्ति अपनी स्वामित्व वाली या कब्जे वाली भूमि पर खड़े किसी भी वृक्ष को अधिकृत प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं काटेगा और न ही काटने का कारण बनेगा। ऐसे अपराध में प्रयुक्त की गई वस्तुओं को जब्त किये जाने के संबंध में भी प्रावधान किये जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अधिकृत प्राधिकारी की अनुमति से किसी वृक्ष को काटता अथवा हटाता है तो प्रत्येक वृक्ष के स्थान पर उसी क्षेत्र में निर्धारित संख्या में वृक्षों का रोपण होगा। ऐसा प्रावधान भी विधेयक में शामिल किया गया है। ग्रामीण एवं आदिवासी जनजीवन में इन वृक्षों का विशेष महत्व है। औषधीय, वाणिज्यिक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से भी ये विशेष रूप से उपयोगी हैं। इस प्रस्तावित कानून से इन वृक्षों का प्रभावी संरक्षण होगा और आदिवासी एवं मरुस्थलीय अंचल के निवासियों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुँचेगा।
द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026
राज्य मंत्रिमंडल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 'द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक, 2026' के प्रारूप का अनुमोदन किया है। इसे अब विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, विवाह विच्छेद (तलाक), उत्तराधिकार, भरण-पोषण तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित रूप देना है। इस विधेयक के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर यह प्रारूप तैयार किया गया है। समिति ने संभाग स्तर पर इसके लिए व्यापक जनसुनवाई कर आमजन, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और कानून विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया। प्रावधानों के अनुसार सभी धर्मों और समुदायों की अपनी-अपनी परंपराओं एवं रीतियों (जैसे- सप्तपदी, निकाह, आनंद कारज, होली यूनियन आदि) के अनुसार विवाह संपन्न कराने की पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी। कानून लागू होने के बाद संपन्न होने वाले सभी विवाहों का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। लिव-इन संबंधों की शुरुआत तथा उनके समापन की लिखित सूचना/पंजीकरण का प्रावधान किया गया है, जिससे दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा हो सकेगी। विवाह या तलाक के पंजीकरण का ज्ञापन मिलने के 15 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार को प्रमाण पत्र जारी करना होगा या कारण बताते हुए लिखित में आवेदन खारिज करना होगा। रजिस्ट्रार द्वारा आवेदन खारिज करने पर 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अपील की जा सकेगी, जिसका निस्तारण 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा।
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि केवल पंजीकरण न होने या देरी होने मात्र से कोई विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। किसी भी सरकारी, अर्द्ध-सरकारी कंपनी, सार्वजनिक उपक्रम या स्थानीय निकाय के नियोक्ता अपने सेवा अभिलेखों में कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति में बदलाव केवल अधिकृत विवाह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही करेंगे। पंजीकरण न कराने पर 10 हजार रुपए तक और नोटिस मिलने के बाद भी अनदेखी करने पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
जानबूझकर पंजीकरण प्रक्रिया में देरी या उपेक्षा करने वाले रजिस्ट्रार पर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। विधेयक में विवाह के पश्चात उत्पन्न विवादों के निपटारे के लिए स्पष्ट न्यायिक प्रक्रिया तय की गई है।
संहिता के नियमों के उल्लंघन, जबरन/धोखे से ली गई सहमति, या नपुंसकता/अन्य कारणों के आधार पर न्यायालय द्वारा विवाह को शून्य या अकृत घोषित करने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
प्रस्तावित कानून में प्रावधान किया गया है कि यदि किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए मृत्यु होती है, तो उसकी संपत्ति का हस्तांतरण निर्धारित प्राथमिकता क्रम के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।
प्रथम श्रेणी में जीवित पति/पत्नी, उनके जीवित बच्चों, मृत बच्चों के पति/पत्नी एवं बच्चों तथा माता-पिता को रखा गया है। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन, दिवंगत भाई-बहन के पति-पत्नी एवं बच्चों, माता-पिता के भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी को रखा गया है। अन्य श्रेणी में पहली दो श्रेणी के अलावा अन्य रिश्तेदारों को रखा गया है। यदि इन श्रेणियों में कोई भी कानूनी उत्तराधिकारी नहीं मिलता है, तो संपत्ति सरकार के पास जाएगी, लेकिन सरकार भी संपत्ति से जुड़ी सभी देनदारियों व दायित्वों के अधीन होगी। मृत्यु के समय गर्भ में मौजूद शिशु (जो बाद में जीवित जन्मा हो) को भी उत्तराधिकार का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त होगा। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के लिए संचालन एवं संधारण (O&M) नीति
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति को नियमित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाए रखने के लिए संचालन एवं संधारण (Operation & Maintenance) नीति का आज मंत्रिमंडल की बैठक में अनुमोदन किया गया । इस नीति में केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों तथा इसके सभी 19 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के प्रभावी प्रबंधन और निगरानी के लिए ग्राम पंचायत, क्लस्टर समिति, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर एक 5-स्तरीय संस्थागत ढांचा गठित किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे के दैनिक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) की होगी, जो लघु सेवा प्रदाय निकाय (Micro Utilities) के रूप में कार्य करेंगी।
इन समितियों को तकनीकी मार्गदर्शन देने के लिए प्रत्येक 5 से 6 ग्राम पंचायतों के समूह पर एक 'क्लस्टर समिति' गठित की जाएगी।
गांव के बाहर के बड़े ढांचे तथा थोक जल आपूर्ति (Bulk Water Transmission) के प्रबंधन की जिम्मेदारी जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और राजस्थान जल प्रदाय एवं सीवरेज निगम (RWSSC) के पास रहेगी, जो वृहद सेवा प्रदाय निकाय (Macro Utilities) के रूप में कार्य करेंगे।
इन योजनाओं के सफल वित्तीय प्रबंधन के लिए केंद्रीय व राज्य वित्त आयोग के टाइड फंड, राज्य वित्त आयोग, बजट, विधायक और सांसद निधि, डीएमएफटी फंड, उपभोक्ता शुल्क से प्राप्त धनराशि का उपयोग किया जाएगा।
विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' (VB-G RAM G) के तहत भी मरम्मत एवं रखरखाव का कार्य किया जा सकेगा।
इस नीति से समुदाय में स्वामित्व, स्वावलम्बन एवं विकेन्द्रीकृत प्रबंधन के आधार पर दीर्घ अवधि में ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का सदुपयोग एवं संचालन सुनिश्चित होगा ।
साथ ही, लोगों को समय पर पर्याप्त मात्रा में एवं अच्छी गुणवत्ता का जल उपलब्ध हो सकेगा। राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक के (शहीद) आश्रितों को नियुक्ति नियम, 2022 में संशोधन
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन कैक्टस लिली) के दौरान राजस्थान के 326 सैनिक तुरंत शहीद हुए थे, जबकि 35 गंभीर रूप से घायल सैनिक इलाज के दौरान 1 जनवरी 1972 से 31 अक्टूबर 1972 के बीच वीरगति को प्राप्त हुए थे।
इन 35 सैनिकों को भी ऑपरेशन कैक्टस लिली के अंतर्गत 'बैटल कैजुअल्टी' (फेटल) घोषित किया गया है। इनके कुटुम्ब के भी एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान करने के लिए 'राजस्थान मृत सशस्त्र बल कार्मिक के (शहीद) आश्रितों को नियुक्ति नियम, 2022' में संशोधन को मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई है। इस संशोधन के बाद योजना का लाभ देने के लिए निर्धारित समयावधि को 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1971 से बढ़ाकर 15 अगस्त 1947 से 31 अक्टूबर 1972 कर दिया गया है। इस संबंध में 7 दिसंबर 2022 को जारी अधिसूचना और विविध सेवा नियमों में भी संशोधन किए जाएंगे ।
कैबिनेट के इस निर्णय से 1971 के युद्ध में देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन 35 वीरों के परिवारों को भी आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का हक मिल सकेगा।
पदोन्नति हेतु अनुभव में 2 वर्ष की सशर्त छूट
कार्मिकों को समय पर पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा गत वर्षों में पदोन्नति के लिए आवश्यक अनुभव में 2 वर्ष की छूट प्रदान की गई थी। फिर भी, किन्हीं कारणों से कुछ विभागों में कार्मिक इस छूट का लाभ लेने से वंचित रह गए थे। ऐसे काडरों में आवश्यकता अनुसार वांछित अनुभव में छूट देने के संबंध में इस वर्ष बजट में घोषणा की गई थी। इस बजट घोषणा की अनुपालना में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आज उन कार्मिकों को वर्ष 2026-27 में पदोन्नति हेतु अनुभव में 2 वर्ष की छूट देने का निर्णय किया गया, जिन्हें वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में यह लाभ प्राप्त नहीं हुआ था। इसके लिए विभिन्न सेवा नियमों में संशोधन कर 2 वर्ष के सशर्त शिथिलन का प्रावधान किया जाएगा। इस संशोधन से वांछित अनुभव की कमी के कारण रिक्त रहने वाले पदों को भरा जा सकेगा जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। साथ ही, सरकारी काम-काज का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा। मृत सरकारी कर्मचारी की पुत्र वूध भी अनुकम्पा नियुक्ति की पात्र कैबिनेट ने मृत सरकारी कर्मचारियों के अनुकम्पा नियुक्ति हेतु पात्र आश्रितों की सूची में 'पुत्र वधू' को भी शामिल करने का निर्णय किया है। बजट घोषणा की अनुपालना में किए गए इस फैसले से मृतक सरकारी कर्मचारी की पुत्र वधू को अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकेगी, जिससे वह परिवार का भरण-पोषण भली-भांति कर सकेगी।
राजस्थान सेवा नियम, 1951 में संशोधन
मंत्रिमंडल ने कर्मचारी कल्याण की भावना से राजस्थान सेवा नियम, 1951 में तीन संशोधन करने का निर्णय किया है।
अब राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण समाप्ति से दो वर्ष की अवधि में पद त्याग करने पर कार्मिकों से केवल प्रशिक्षण व्यय की वसूली होगी, उनसे वेतन-भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी।
वहीं, राज्य या केंद्र सरकार के विभागों अथवा उपक्रमों में नई नियुक्ति के फलस्वरूप पद त्याग करने पर प्रशिक्षण के दौरान भुगतान किए गए वेतन-भत्तों के साथ-साथ प्रशिक्षण व्यय की भी कोई वसूली नहीं की जाएगी।
इसके अलावा, एकल महिला राज्य कर्मचारियों को चाईल्ड केयर लीव एक कैलेण्डर वर्ष में 3 के स्थान पर 6 चरणों में स्वीकृत की जा सकेगी।
सरोगेसी से मातृत्व प्राप्त करने के मामलों में सरोगेट मदर को 180 दिन तथा कमीशनिंग मदर को 90 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाएगा। इससे ये महिला कर्मचारी अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकेंगी।
जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य एवं अधीनस्थ सेवा नियम में संशोधन जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा संचालित राजकीय आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में छात्रावास अधीक्षक (वार्डन) के पदों को राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा (समान पात्रता परीक्षा) नियम, 2022 में सम्मिलित किया गया है।
आज कैबिनेट ने राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (भर्ती एवं सेवा की अन्य शर्तें) नियम, 2001 में परीक्षा स्कीम, निगेटिव मार्किंग, न्यूनतम पासिंग मार्क्स 40 प्रतिशत एवं विस्तृत पाठ्यक्रम संबंधी संशोधन का अनुमोदन किया है।
इस निर्णय से टीएडी विभाग में छात्रावास अधीक्षक महिला ग्रेड-II के 254 पद सहित छात्रावास अधीक्षक ग्रेड-II के कुल 470 पद भरे जाने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
पहले ये पद शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्ति पर भरे जाते थे, लेकिन अब पृथक कैडर बनाकर सीधी भर्ती करने से राज्य के युवाओं को रोजगार मिलेगा और योग्य कार्मिकों के चयन से विभागीय हॉस्टलों व आवासीय विद्यालयों का संचालन और अधिक बेहतर हो सकेगा। राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम, 2015 में संशोधन वन विभाग में अधीनस्थ कर्मचारियों के लिए पदोन्नति के अवसरों में वृद्धि के लिए राजस्थान वन अधीनस्थ सेवा नियम, 2015 में प्रस्तावित संशोधनों को मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। इससे वनरक्षक पद से सहायक वनपाल, सहायक वनपाल पद से वनपाल एवं सर्वेयर से कनिष्ठ अभियंता के पदों पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। इस संशोधन से विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति का लाभ मिलेगा, रिक्त पद भरे जा सकेंगे, साथ ही कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग सेवा नियम संशोधन
वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 11 दिसम्बर, 2024 के द्वारा राजस्थान सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2017 में हुए संशोधन में विभिन्न विभागों में पदोन्नति के अवसर बढ़ाए गए थे। इसमें समेकित बाल विकास सेवा के संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम निदेशक/अतिरिक्त निदेशक के दो नवीन पदनाम भी थे। अब इन पदों को राजस्थान समेकित बाल विकास (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा नियम, 1998 में सम्मिलित किया गया है। पदोन्नति के इन दो अतिरिक्त अवसरों से आईसीडीएस में विभागीय कार्यों में गुणवत्ता और प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा। साथ ही राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के निरीक्षण, क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग कार्यों को गति मिलेगी। सीमेंट उद्योग हेतु औद्योगिक भूमि आवंटन मैसर्स अल्ट्राटेक सीमेन्ट लिमिटेड को जैसलमेर जिले के ग्राम पारेवर में करीब 306 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि के आवंटन की मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं हेतु भूमि आवंटन
प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 4 अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन के प्रस्तावों का अनुमोदन भी आज किया गया। प्रस्तावों के अनुसार बीकानेर जिले की तहसील पूगल के ग्राम बरजू में लगभग 228 हेक्टेयर, जैसलमेर जिले की उपनिवेशन तहसील रामगढ़ 2 के ग्राम रामगढ़ बारानी दक्षिण में लगभग 485 हेक्टेयर भूमि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एवं जैसलमेर जिले की तहसील फतेहगढ़ के ग्राम तोगा व नीम्बा में 178 हैक्टेयर भूमि और बाड़मेर जिले की तहसील शिव के ग्राम लीकड़ी में लगभग 51 हेक्टेयर भूमि सोलर-विंड हाइब्रिड परियोजना के लिए सशर्त कीमतन आवंटन की स्वीकृति दी गई है। ये परियोजनाएं प्रदेश को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहायक होंगी। साथ ही, इनसे इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियम, 2026
राज्य मंत्रिमंडल ने शासकीय सेवा में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का काल्पनिक लाभ (Notional Benefit) दिनांक 30 जून, 2016 से दिए जाने हेतु 'राजस्थान दिव्यांगजन अधिकार (संशोधन) नियम, 2026' के प्रारूप का अनुमोदन किया है।
यह निर्णय वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा में किए गए वादे की अनुपालना में किया गया है जिससे राज्य के दिव्यांग कार्मिकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। यह फैसला केंद्र सरकार की तर्ज पर तथा माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णयों (राजीव गुप्ता बनाम भारत संघ एवं एस.एस. सुंदरम प्रकरण) और भारत सरकार के कार्मिक विभाग (DoPT) द्वारा जारी निर्देशों के अनुक्रम में लिया गया है। राज्य में दिव्यांगों को पदोन्नति में दिए जा रहे 4 प्रतिशत आरक्षण के तहत अब 30 जून, 2016 से काल्पनिक लाभ (Notional Benefit) प्रदान किया जाएगा।
इस फैसले से पात्र दिव्यांग कार्मिकों की वरिष्ठता (Seniority) एवं पदोन्नति के अवसरों में सुधार होगा, जिससे उनका मनोबल और सशक्तिकरण बढ़ेगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के पश्चात संशोधित नियमों को राजस्थान राजपत्र (Gazette) में अधिसूचित कर शीघ्र लागू किया जाएगा।
जोधपुर पेयजल हेतु एस्केप जलाशय निर्माण एवं प्रभावित काश्तकारों को भूमि आवंटन राज्य मंत्रिमंडल ने जिला जैसलमेर की उपनिवेश तहसील नाचना-1 के ग्राम चिन्नू में एस्केप जलाशय (आरडी 1121) के निर्माण से प्रभावित 21 गैर-खातेदार काश्तकारों को उसी गांव में समकक्ष भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस निर्णय को एक विशेष परिस्थिति मानते हुए अपवाद स्वरूप मंजूरी दी गई है, ताकि प्रभावित काश्तकारों का पुनर्वास हो सके और वर्षों पुराना विवाद सुलझ सके। इंदिरा गांधी मुख्य नहर की बुर्जी 1121 पर एस्केप चैनल निर्माण के लिए वर्ष 1999 में 21 काश्तकारों (18 पूर्ण एवं 3 आंशिक) की लगभग 722.65 बीघा भूमि ली गई थी। उस समय औपचारिक भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही भूमि एस्केप चैनल के नाम दर्ज कर दी गई थी और काश्तकारों को विकल्प के रूप में अन्यत्र भूमि नहीं मिल सकी थी। यह एस्केप जलाशय जल जीवन मिशन के तहत जोधपुर शहर को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत आवश्यक प्रोजेक्ट है। काश्तकारों की भूमि की समस्या सुलझने से अब इस जलाशय का निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के तेजी से पूरा किया जा सकेगा। मानसून के दौरान नहर से मिलने वाले अतिरिक्त पानी का इस जलाशय में संग्रहण हो सकेगा, जिससे जोधपुर को नियमित जल आपूर्ति में मदद मिलेगी।