त्योहारों पर मिलावटखोरों पर सख्ती, दवाओं की भी होगी जांच त्योहारों पर मिलावटखोरों पर सख्ती, खाद्य पदार्थों और दवाओं की होगी कड़ी निगरानी
Tuesday, 18 Aug 2026 00:00 am

Golden Hind News

त्योहारों पर मिलावटखोरों पर सख्ती, खाद्य पदार्थों और दवाओं की होगी कड़ी निगरानी

त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजारों में खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी के साथ मिलावटखोरी की आशंका भी बढ़ जाती है। आमजन को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जोखिम आधारित जांच, प्रभावी सैंपलिंग और समयबद्ध कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए।

मिलावट वाले खाद्य पदार्थों पर विशेष नजर

समीक्षा बैठक में प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि त्योहारों के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे खाद्य पदार्थों और उन क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष निगरानी की जाए, जहां मिलावट की संभावना अधिक हो सकती है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल कार्यालय स्तर पर कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से बाजारों का निरीक्षण करें और मैदानी स्तर पर सक्रिय रहें। संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलने पर उनके नमूने लिए जाएं तथा यदि कोई खाद्य सामग्री मिलावटी अथवा असुरक्षित पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।

अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सैंपलिंग की प्रक्रिया प्रभावी और जोखिम आधारित हो। इसका उद्देश्य केवल अधिक संख्या में नमूने लेना नहीं, बल्कि उन खाद्य पदार्थों पर विशेष ध्यान देना है जिनसे आमजन के स्वास्थ्य को अधिक खतरा हो सकता है।

सैंपल लेने के बाद जांच में देरी नहीं

प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाने के बाद उनकी जांच भी निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए। कई बार सैंपल लिए जाने के बाद जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया में देरी होने से कार्रवाई प्रभावित होती है। ऐसे में विभाग ने पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या असुरक्षित तत्व पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान के खिलाफ आगे की कार्रवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। विभाग की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आमजन की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। त्योहारों के दौरान मिठाइयों, दूध एवं दुग्ध उत्पादों सहित अधिक मांग वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर विशेष सतर्कता बरतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार निरीक्षण और सैंपलिंग की रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना पर्ची मिलने वाली दवाओं की भी होगी जांच

समीक्षा बैठक में केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बाजार में बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली ओटीसी यानी ओवर द काउंटर दवाओं की नियमित सैंपलिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ऐसी दवाओं की नियमित जांच के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगा कि बाजार में उपलब्ध दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों। अधिकारियों को दवाओं की सैंपलिंग और जांच की प्रक्रिया को प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। राठौड़ ने कहा कि यदि कोई दवा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसकी जांच और कानूनी कार्रवाई में किसी तरह की देरी नहीं की जाए। संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिना पर्ची मिलने वाली दवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए करते हैं। ऐसी दवाओं की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी आमजन के स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

पूरी प्रक्रिया की होगी नियमित मॉनिटरिंग

बैठक में अधिकारियों को खाद्य एवं औषधि सुरक्षा से जुड़े मामलों की पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। इसमें सैंपल लेने, प्रयोगशाला में जांच कराने, रिपोर्ट प्राप्त करने, जिम्मेदारी तय करने, कानूनी कार्रवाई करने और न्यायालय में मामलों की पैरवी तक सभी स्तर शामिल हैं। प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। लंबित मामलों में जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य समय पर उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में परेशानी न हो और मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके। विभाग का जोर केवल कार्रवाई करने पर ही नहीं, बल्कि कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को मजबूत और प्रभावी बनाने पर है। इससे मिलावटखोरी और मानकविहीन दवाओं के मामलों में जिम्मेदारी तय करने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में तेजी आने की उम्मीद है।

सोशल मीडिया के जरिए जागरूक होंगे लोग

खाद्य एवं औषधि सुरक्षा के संबंध में आमजन को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लोगों तक सरल भाषा में उपयोगी जानकारी पहुंचाई जाए। आमजन को मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की पहचान, खाद्य सामग्री के सही भंडारण और उपयोग तथा दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल के संबंध में जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को यह जानकारी देने पर भी जोर रहेगा कि बाजार से खाद्य सामग्री और दवाएं खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। दवा खरीदते समय उपभोक्ताओं को लेबल ध्यान से पढ़ने, निर्धारित मात्रा और उपयोग की अवधि की जानकारी लेने के लिए जागरूक किया जाएगा। लोगों से अपील की जाएगी कि वे एक्सपायर्ड या संदिग्ध दवाओं का इस्तेमाल न करें। किसी दवा को लेकर संदेह होने पर योग्य चिकित्सक या फार्मासिस्ट से सलाह लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

त्योहारों में बढ़ जाती है जिम्मेदारी

त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बिक्री और खपत बढ़ने के कारण खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में लोग मिठाइयां, नमकीन, दूध से बने उत्पाद और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते हैं। ऐसे समय में गुणवत्ता पर निगरानी रखना आमजन के स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद जरूरी है। सरकार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को जोखिम आधारित निगरानी के साथ-साथ प्रभावी सैंपलिंग पर ध्यान देना होगा। मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ओटीसी दवाओं की सैंपलिंग और जांच को भी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवाओं के मामलों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

समीक्षा बैठक में मौजूद रहे अधिकारी

खाद्य एवं औषधि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण डॉ. टी. शुभमंगला, अतिरिक्त आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण भगवत सिंह, औषधि नियंत्रक  अजय पाठक और संयुक्त आयुक्त डॉ. विजय प्रकाश सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, संदिग्ध खाद्य पदार्थों की प्रभावी सैंपलिंग, समयबद्ध जांच और मिलावट पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई सहित दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

आमजन भी बरतें सावधानी

सरकारी स्तर पर निगरानी और कार्रवाई के साथ आमजन की जागरूकता भी खाद्य एवं औषधि सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को खाद्य सामग्री खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, पैकिंग, लेबल और उपयोग की अवधि की जांच करनी चाहिए। संदिग्ध या असुरक्षित प्रतीत होने वाली सामग्री का उपयोग करने से बचना चाहिए। दवाओं के मामले में भी एक्सपायरी डेट, लेबल और उपयोग संबंधी निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। बिना जानकारी के दवाओं का सेवन करने के बजाय चिकित्सक या योग्य फार्मासिस्ट की सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।

राज्य सरकार की ओर से दिए गए इन निर्देशों का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण रखना तथा आमजन को सुरक्षित सामग्री उपलब्ध कराना है। विभाग की ओर से निगरानी, सैंपलिंग, जांच और कानूनी कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मिलावटखोरी और मानकविहीन दवाओं के खिलाफ प्रभावी एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।