
राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी की है। बुधवार को हेल्थ भवन में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (SMHA) की दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री राठौड़ ने की। इसमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, संस्थानों के पंजीकरण, आत्महत्या रोकथाम, नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी और जनजागरूकता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के तहत नशा मुक्ति केंद्रों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की अधिसूचना में नशा मुक्ति केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है। ऐसे में इन केंद्रों के संचालन और सेवाओं की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक में प्रोविजनल पंजीकरण के नवीनीकरण और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को स्थायी पंजीकरण देने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। राज्य में अब तक 29 मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का प्रोविजनल पंजीकरण पूरा हो चुका है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी और मामलों की समीक्षा को मजबूत करने के लिए संभाग स्तर पर मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड (DMHRB) के गठन के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित बोर्ड में न्यायिक अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, मनोचिकित्सक एवं चिकित्सा विशेषज्ञ, मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्ति, उनके केयरगिवर या गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है।
इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के निरीक्षण के लिए जिला स्तर पर समितियों के गठन को लेकर सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजे जा चुके हैं।
राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए संचालित Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 को लोगों का लगातार समर्थन मिल रहा है। बैठक में जानकारी दी गई कि हेल्पलाइन पर अब तक कुल 1,11,377 कॉल प्राप्त हो चुकी हैं।
इनमें 95,305 कॉल लोगों द्वारा स्वयं की गईं, जबकि 16,072 कॉल Tele-MANAS की ओर से शुरू की गईं। अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में समय पर सहायता उपलब्ध कराने और लोगों को हेल्पलाइन की जानकारी देने पर विशेष जोर दिया।
राजस्थान में आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान 10 सितंबर, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से 10 अक्टूबर, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस तक चलेगा।
अभियान के दौरान रैलियां, कार्यशालाएं, क्विज प्रतियोगिताएं, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताएं तथा सोशल मीडिया अभियान आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना, मानसिक बीमारी से जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक को कम करना तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है।
बैठक में बच्चों, किशोरों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष चर्चा हुई। राज-ममता और मनदर्पण कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में तनाव प्रबंधन, भावनात्मक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में कम से कम मासिक आधार पर मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव परामर्श और जागरूकता सत्र आयोजित करने की योजना पर भी चर्चा की गई।
राज-ममता और Mental Well-being मॉड्यूल के लिए राज्य स्तर पर 9 सितंबर को प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद 10 से 20 सितंबर तक जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
बैठक में आत्महत्या रोकथाम को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसके लिए प्रभावी निगरानी और जागरूकता तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित परामर्श से गंभीर परिस्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक मानव संसाधन की भी समीक्षा की गई। विशेषज्ञों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी सहयोग और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की अध्यक्ष गायत्री राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संस्थागत ढांचे के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी सहयोग और आमजन में जागरूकता जरूरी है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. शिव गौतम ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। उन्होंने मानसिक बीमारी से जुड़े सामाजिक भ्रम और झिझक को कम करने तथा विशेष रूप से युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, निदेशक जन स्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, OSD NHM संतोष गोयल, राज्य नोडल अधिकारी NMHP डॉ. सांवरमल स्वामी सहित मनोचिकित्सक, विभागीय अधिकारी और अन्य सदस्य मौजूद रहे।
राजस्थान सरकार की ओर से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को संस्थागत रूप से मजबूत करने, नशा मुक्ति केंद्रों को नियमन के दायरे में लाने, Tele-MANAS जैसी सेवाओं को बढ़ावा देने और स्कूलों तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले समय में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।