
नगर निगम चुनाव की मतगणना से पहले भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने सभी पार्षद प्रत्याशियों को शनिवार दोपहर 12 बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा है। इसके बाद प्रत्याशियों को एक स्थान पर शिफ्ट किए जाने की तैयारी है।
पार्टी की ओर से प्रत्याशियों को 22 सितंबर तक का जरूरी सामान साथ लाने के लिए कहा गया है। हालांकि, पार्टी स्तर पर इसे प्रशिक्षण शिविर से जोड़कर बताया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे मतगणना के बाद बोर्ड गठन तक प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भाजपा की ओर से पार्षद प्रत्याशियों को फोन कर प्रशिक्षण शिविर के बारे में जानकारी दी जा रही है। सभी प्रत्याशियों को निर्धारित समय पर पार्टी मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद उन्हें एक स्थान पर ले जाने की तैयारी है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक जयपुर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की रणनीति पर काम किया जा रहा है। उदयपुर सहित कई नगर निकायों में प्रत्याशियों को प्रशिक्षण शिविर के नाम पर एकजुट रखने की तैयारी की जा रही है।
जयपुर नगर निगम चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होगी। इसके बाद 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव प्रस्तावित है।
मतगणना और महापौर चुनाव के बीच करीब एक सप्ताह का समय है। ऐसे में राजनीतिक दल अपने संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
भाजपा की कोशिश मानी जा रही है कि नतीजे आने के बाद उसके विजयी पार्षद किसी दूसरे राजनीतिक दल के संपर्क में न जाएं। खासकर ऐसी स्थिति में जहां किसी दल को बोर्ड बनाने के लिए कुछ अतिरिक्त पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़े।
नगर निगम चुनाव में कई वार्डों में मुकाबला करीबी रहने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में मतगणना के बाद बोर्ड गठन के लिए एक-एक पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर किसी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन में अहम हो सकता है। इसी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संभावित विजयी प्रत्याशियों पर नजर बनाए हुए हैं।
भाजपा की तैयारी के बीच कांग्रेस ने भी अपने पार्षद प्रत्याशियों को लेकर रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अभी बाड़ेबंदी को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
कांग्रेस के लिए भी संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखना महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर उन निकायों में जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम रहने की संभावना है।
निकाय चुनाव के नतीजों के बाद निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि भाजपा या कांग्रेस को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त पार्षदों की जरूरत पड़ती है, तो निर्दलीय विजेताओं का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
इसी वजह से दोनों प्रमुख राजनीतिक दल संभावित निर्दलीय विजेताओं के समीकरण पर भी नजर रख रहे हैं। हालांकि, वास्तविक स्थिति 14 सितंबर को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे, लेकिन इसके बाद भी राजनीतिक गतिविधियां जारी रहेंगी। 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उप महापौर के चुनाव के कारण दोनों प्रमुख दलों के लिए यह अवधि महत्वपूर्ण होगी।
भाजपा ने फिलहाल अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रत्याशियों को 22 सितंबर तक का सामान साथ लाने के निर्देश इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। अब सभी की नजर 14 सितंबर की मतगणना पर है, जिसके बाद जयपुर नगर निगम में बोर्ड गठन का राजनीतिक गणित साफ होगा।