मुख्य सचिव से IMF-SARTTAC निदेशक की मुलाकात मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से IMF-SARTTAC निदेशक हेराल्ड फिंगर की शिष्टाचार भेंट, सार्वजनिक निवेश प्रबंधन पर चर्चा
Monday, 21 Sep 2026 00:00 am

Golden Hind News

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से IMF-SARTTAC निदेशक हेराल्ड फिंगर की शिष्टाचार भेंट, सार्वजनिक निवेश प्रबंधन को मजबूत करने पर चर्चा

 सहायता केंद्र (SARTTAC) के निदेशक श्री हेराल्ड फिंगर ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राज्य में सार्वजनिक निवेश प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करने, निवेश की दक्षता बढ़ाने तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में राज्य में सार्वजनिक निवेश की योजना, उसके प्रभावी क्रियान्वयन और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने सार्वजनिक निवेश को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में आवश्यक प्रक्रियाओं एवं तकनीकी व्यवस्थाओं पर विचार साझा किए।

सार्वजनिक निवेश प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर

बैठक में सार्वजनिक निवेश प्रबंधन प्रमुख चर्चा का विषय रहा। राज्य में विकास कार्यों और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए किए जाने वाले निवेश की दक्षता बढ़ाने तथा संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई।

सार्वजनिक निवेश किसी भी राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, ऊर्जा और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं में सरकारी निवेश के माध्यम से विकास को गति मिलती है। ऐसे में निवेश की योजना बनाते समय प्राथमिकताओं का निर्धारण, उपलब्ध संसाधनों का उचित आवंटन और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण माना जाता है।

बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि सार्वजनिक निवेश से संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाकर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में दक्षता कैसे बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही सार्वजनिक निवेश के परिणामों और उसके प्रभाव का बेहतर आकलन करने से जुड़े विषयों पर भी विचार साझा किए गए।

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को तकनीक आधारित बनाने पर चर्चा

मुख्य सचिव और SARTTAC निदेशक के बीच सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाने पर भी चर्चा हुई। वर्तमान समय में सरकारी वित्तीय व्यवस्थाओं में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग से प्रक्रियाओं को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने में सहायता मिल रही है।

बैठक में वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण, डेटा आधारित निगरानी और सरकारी वित्तीय प्रणालियों में तकनीकी सुधारों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। वित्तीय प्रक्रियाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग से कार्यों की निगरानी, रिकॉर्ड प्रबंधन और सूचना के आदान-प्रदान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

राज्य स्तर पर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता को महत्वपूर्ण आधार माना गया। इसी संदर्भ में तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने और वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

GST सुधारों पर भी हुआ विचार-विमर्श

बैठक के दौरान GST सुधारों से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन और उससे संबंधित प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

GST व्यवस्था में तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है। कर प्रशासन, रिटर्न प्रक्रिया, भुगतान और संबंधित वित्तीय गतिविधियों में डिजिटल प्रणालियों के उपयोग से प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलती है। बैठक में राज्य की कर एवं वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने से संबंधित विषयों पर विचार साझा किए गए।

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के व्यापक संदर्भ में GST से संबंधित सुधारों को भी महत्वपूर्ण माना गया। बैठक में वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से तकनीक आधारित व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।

SNA-SPARSH व्यवस्था पर भी चर्चा

मुख्य सचिव और SARTTAC निदेशक के बीच SNA-SPARSH व्यवस्था से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। केंद्र और राज्य सरकारों की वित्तीय व्यवस्थाओं में डिजिटल प्रक्रियाओं के उपयोग और सरकारी धन के प्रबंधन से जुड़े सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने के संदर्भ में SNA-SPARSH महत्वपूर्ण विषय रहा।

बैठक में इस व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने, भुगतान एवं वित्तीय प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने तथा सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता को मजबूत करने से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।

राज्य कोषागार के डिजिटलीकरण पर विचार

बैठक में राज्य कोषागार के डिजिटलीकरण से जुड़े विषय भी प्रमुखता से उठाए गए। कोषागार प्रणाली सरकारी वित्तीय प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इसकी प्रक्रियाओं को डिजिटल तकनीक के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाने से कार्यों में तेजी और पारदर्शिता लाने में मदद मिल सकती है।

चर्चा के दौरान राज्य कोषागार से संबंधित डिजिटल व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा वित्तीय प्रक्रियाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए गए। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से वित्तीय सूचनाओं के प्रबंधन और विभिन्न स्तरों पर निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

राज्य में वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करना है। इसी दृष्टिकोण से कोषागार के डिजिटलीकरण से जुड़े विषय बैठक के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल रहे।

निवेश की योजना और क्रियान्वयन में दक्षता बढ़ाने पर जोर

बैठक में सार्वजनिक निवेश की योजना और क्रियान्वयन में दक्षता बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया। किसी भी सार्वजनिक परियोजना की सफलता के लिए बेहतर योजना, संसाधनों का उचित प्रबंधन और समयबद्ध क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होता है।

इस संदर्भ में परियोजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश और योजनाओं की निगरानी जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सार्वजनिक निवेश से अपेक्षित परिणाम हासिल करने के लिए वित्तीय प्रबंधन और परियोजना क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

बैठक में सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के साथ-साथ निवेश से जुड़े निर्णयों में दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में चर्चा

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। बैठक में वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और तकनीकी साधनों के माध्यम से उनकी निगरानी को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर विचार किया गया।

डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से वित्तीय गतिविधियों की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में दक्षता बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इससे सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और SARTTAC निदेशक हेराल्ड फिंगर की बैठक में राज्य के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। सार्वजनिक निवेश प्रबंधन, GST सुधार, SNA-SPARSH और कोषागार के डिजिटलीकरण जैसे विषयों पर चर्चा के माध्यम से वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर विशेष शासन सचिव, वित्त (बजट) श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार तथा SARTTAC के रेजिडेंट पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट एडवाइजर श्री स्टीफन टर्नबुल भी उपस्थित रहे।

बैठक में राज्य के सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन और सार्वजनिक निवेश से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने तथा सार्वजनिक निवेश की योजना और क्रियान्वयन में दक्षता बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर विचार साझा किए।

मुख्य सचिव और SARTTAC प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई यह शिष्टाचार भेंट राज्य की सार्वजनिक वित्तीय व्यवस्थाओं, निवेश प्रबंधन और डिजिटल वित्तीय प्रणालियों से जुड़े विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर रही। बैठक में वित्तीय प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के उपयोग और सार्वजनिक निवेश की दक्षता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न पहलुओं को चर्चा के केंद्र में रखा गया।