ज्ञानेश कुमार को लेकर बढ़ा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर घमासान, SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद की चर्चा
Thursday, 24 Sep 2026 00:00 am

Golden Hind News

ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों से सियासी हलचल, SIR पर बढ़ा विवाद

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाते हुए उनके पद पर बने रहने को लेकर भी मांगें उठाई हैं।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय पैनल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, मतदाताओं के नाम हटाने, Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और SIR से संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह सवाल उठाया कि क्या आयोग की ओर से जारी कुछ फैसलों और निर्देशों में सभी सदस्यों की पर्याप्त भागीदारी और जानकारी सुनिश्चित हुई थी। रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने और अपील से जुड़े मामलों तथा गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने से संबंधित मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।

चुनाव आयोग ने दिया जवाब

रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय लेने से पहले तीनों आयुक्तों सहित आयोग के अधिकारियों को अपने सुझाव और विचार रखने का अधिकार है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं। आयोग ने SIR समेत चुनावी सुधारों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े निर्णयों को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया है। उसके अनुसार, ECINet सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं और अनधिकृत बदलाव या छेड़छाड़ को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय लागू हैं। आयोग ने कहा कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून के अनुरूप हैं।

SIR क्या है और क्यों चर्चा में है?

Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद पात्र तथा अपात्र प्रविष्टियों की जांच करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों के स्तर पर दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाता है।

हाल के महीनों में SIR को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक और कानूनी बहस हुई है। पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR के दौरान 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें से 22 लाख से अधिक लोगों ने दोबारा नाम शामिल करने के लिए अपील की। आयोग ने बताया कि कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं, जिनमें नाम जोड़ने और हटाने दोनों से संबंधित मामले शामिल थे।

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की जांच को भी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने SIR के दौरान आम मतदाताओं को होने वाली संभावित परेशानियों और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल

चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपने सवाल और तेज कर दिए हैं। विभिन्न विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली की जांच, SIR पर पुनर्विचार और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर चर्चा की मांग की है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों को गंभीर विषय बताया है। वहीं, अलग-अलग दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और आयोग की जवाबदेही को लेकर भी बयान दिए हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और मांगें राजनीतिक पक्ष के बयान हैं। इन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार कौन हैं?

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। वे इससे पहले चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। उनके प्रशासनिक करियर में केंद्र और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण पद शामिल रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उनकी जिम्मेदारी देश की चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करना है। इनमें मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम, मतदान प्रक्रिया, चुनाव अधिकारियों का समन्वय और निर्वाचन से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।

सितंबर 2026 में भी ज्ञानेश कुमार चुनाव संबंधी कई गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। PIB की 14 सितंबर की जानकारी के अनुसार, उन्होंने भूटान की तीन दिवसीय यात्रा भी की थी। इससे पहले सितंबर में उन्होंने युवाओं, Electoral Literacy Clubs और Booth Level Officers से संबंधित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।

आगे क्या?

फिलहाल इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। एक तरफ रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर कुछ मुद्दों पर दर्ज आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, वहीं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अलग-अलग विचार संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

SIR को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर भी चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में अदालतों, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की ओर से सामने आने वाले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

फिलहाल मुख्य मुद्दे: