जमुई कांड: 15-20 दिन में स्पीडी ट्रायल की तैयारी जमुई कांड में बड़ा एक्शन, 15-20 दिन में स्पीडी ट्रायल की तैयारी; IAS-IPS अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
Friday, 25 Sep 2026 00:00 am

Golden Hind News

जमुई कांड में बड़ा एक्शन: 15-20 दिनों में स्पीडी ट्रायल की तैयारी, IAS-IPS अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

जमुई: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित छेड़खानी और दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब प्रशासन का फोकस मामले को स्पीडी ट्रायल के जरिए तेजी से अदालत तक पहुंचाने पर है। जिला प्रशासन ने अगले 15 से 20 दिनों के भीतर स्पीडी ट्रायल से जुड़ी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने का लक्ष्य तय किया है।

जमुई के जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने संयुक्त प्रेस वार्ता में मामले में अब तक हुई कार्रवाई और आगे की रणनीति की जानकारी दी। इस संवेदनशील मामले की निगरानी के लिए IPS अधिकारी दीप्ति मोनाली और IAS अधिकारी शिप्रा चौधरी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब अदालत में तेजी की तैयारी

पुलिस के अनुसार मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव और हरेराम यादव गिरफ्तार किए जा चुके हैं। नंदन यादव पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने से घायल हुआ था, जबकि हरेराम यादव भागने के दौरान घायल हुआ। इलाज के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।

प्रशासन अब जांच से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई और दस्तावेजी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दे रहा है, ताकि मामले की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अदालत के समक्ष आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

सोशल मीडिया पर भी पुलिस की बड़ी कार्रवाई

जमुई कांड के बाद घटना से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं। प्रशासन के मुताबिक 225 लोगों/ऑनलाइन गतिविधियों को चिन्हित किया गया है। इनमें पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री और AI से तैयार कथित फर्जी सामग्री से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन गंभीर विषय है। इसी वजह से लोगों से अपील की गई है कि घटना से जुड़े फोटो, वीडियो या ऐसी कोई भी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा न करें जिससे पीड़िता की पहचान सामने आए।

AI से बनाए गए वीडियो पर भी नजर

प्रशासन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कथित AI-generated वीडियो को लेकर भी लोगों को सावधान किया है। अधिकारियों के मुताबिक घटना को लेकर गलत या मनगढ़ंत सामग्री प्रसारित करने से जांच प्रभावित हो सकती है।

पुलिस ने ऐसे मामलों में साइबर कार्रवाई शुरू की है और संबंधित लोगों को नोटिस देकर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।

पीड़िता की पहचान सार्वजनिक न करने की अपील

जिलाधिकारी नवीन ने लोगों से अपील की है कि इस संवेदनशील मामले में सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी, कहानी या पीड़िता से जुड़ी निजी जानकारी साझा न करें।

प्रशासन का कहना है कि पीड़िता की निजता और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी से व्यवहार किया जाना चाहिए। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी सामग्री से बचने की अपील की गई है।

अब 15-20 दिनों पर टिकी नजर

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब प्रशासन के सामने अगली चुनौती जांच और कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की है। 15 से 20 दिनों में स्पीडी ट्रायल से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि अंतिम सजा अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। फिलहाल प्रशासन और पुलिस का जोर मामले की जांच, साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर है।