RCA चुनाव: 32 वोट साथ थे, फिर क्यों पीछे हटे पराक्रम? RCA चुनाव में क्यों पीछे हटे पराक्रम सिंह राठौड़? बोले- 32 वोट साथ थे, फिर भी नामांकन वापस लिया
Monday, 05 Oct 2026 00:00 am

Golden Hind News

RCA चुनाव में किसके कहने पर पीछे हटे पराक्रम सिंह राठौड़? बोले- 32 वोट साथ थे, पार्टी के फैसले का किया सम्मान 

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव में नामांकन वापसी के साथ ही सियासी और क्रिकेट प्रशासन से जुड़ा घटनाक्रम चर्चा में आ गया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ के बेटे तथा चूरू क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पराक्रम सिंह राठौड़ ने RCA अध्यक्ष पद से अपना नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने के बाद पराक्रम सिंह ने अपने फैसले को लेकर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी।

पराक्रम सिंह राठौड़ का दावा है कि उनके पैनल के साथ 32 वोट थे और उन्हें चुनाव में मजबूत समर्थन हासिल था। इसके बावजूद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि पार्टी और सरकार के स्तर पर जो फैसला हुआ, उसका सम्मान करते हुए उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का निर्णय लिया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पराक्रम राठौड़ ने बृजकिशोर उपाध्याय के समर्थन में अपनी दावेदारी वापस ली। उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है।

नामांकन वापसी से पहले क्या था चुनावी समीकरण?

RCA चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए कई नाम सामने आए थे। इनमें स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और बृजकिशोर शर्मा/उपाध्याय का नाम प्रमुख रूप से सामने आया।

पराक्रम सिंह राठौड़ ने भी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। उनके साथ एक पैनल भी चुनाव मैदान में था। रिपोर्टों के अनुसार, उनके पैनल में अलग-अलग पदों के लिए अन्य उम्मीदवारों ने भी नामांकन दाखिल किया था।

इस बीच पराक्रम सिंह की ओर से यह दावा किया गया कि उनके पास 32 वोटों का समर्थन था। यही वजह रही कि उनके नामांकन वापस लेने के बाद RCA चुनाव का समीकरण अचानक बदल गया।

32 वोट होने के दावे के बावजूद क्यों वापस लिया नामांकन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पराक्रम सिंह राठौड़ के अनुसार उनके पास 32 वोटों का समर्थन था, तो उन्होंने चुनाव से पीछे हटने का फैसला क्यों किया?

नामांकन वापस लेने के बाद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पार्टी के फैसले के खिलाफ जाना नहीं था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पराक्रम ने कहा कि जब सरकार के स्तर पर बृजकिशोर उपाध्याय को अध्यक्ष बनाने और उनकी टीम को कार्यकारिणी में शामिल करने का निर्णय हुआ, तो उन्होंने अपने नामांकन से पीछे हटने का फैसला किया।

उन्होंने अपने फैसले को पार्टी और सरकार के निर्णय के सम्मान से जोड़ा। यानी उनके बयान के मुताबिक, यह फैसला चुनावी समर्थन की कमी के कारण नहीं बल्कि आपसी सहमति और संगठन के निर्णय के तहत लिया गया।

क्या किसी वरिष्ठ नेता ने नामांकन भरने से रोका?

RCA चुनाव के इस पूरे घटनाक्रम में यह सवाल भी उठा कि आखिर पराक्रम सिंह को नामांकन दाखिल करने से किसने रोका या फिर नामांकन वापस लेने का फैसला किसके कहने पर हुआ?

उपलब्ध रिपोर्टों में पराक्रम सिंह के हवाले से पार्टी के फैसले और सरकार के स्तर पर हुई सहमति को नामांकन वापसी की वजह बताया गया है। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में 32 वोटों के दावे के आधार पर उनके नामांकन वापस लेने को लेकर सवाल भी उठाए गए।

हालांकि, किसी व्यक्ति द्वारा उन्हें सीधे तौर पर चुनाव से हटने का निर्देश दिए जाने की बात को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं रखा जा सकता। इसलिए इस पूरे मामले में पराक्रम सिंह के सार्वजनिक बयान और उपलब्ध रिपोर्टों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

राजेंद्र राठौड़ की भूमिका पर भी चर्चा

पराक्रम सिंह के RCA चुनाव से पीछे हटने के बाद उनके पिता राजेंद्र सिंह राठौड़ की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। राजेंद्र राठौड़ राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में रहे हैं और उनके बेटे की RCA में सक्रियता को भी राजनीतिक नजरिए से देखा गया।

हालांकि, पराक्रम सिंह ने अपने नामांकन वापस लेने के पीछे अपने पिता की किसी भूमिका का कोई स्पष्ट आरोप नहीं लगाया। उनका सार्वजनिक पक्ष पार्टी और सरकार के फैसले का सम्मान करने पर केंद्रित रहा।

यह भी उल्लेखनीय है कि पराक्रम सिंह इससे पहले चूरू क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। 2024 में चूरू जिला क्रिकेट संघ के चुनाव को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा था। उस समय RCA स्तर पर उनके अध्यक्ष चुने जाने को लेकर विवाद सामने आया था।

बृजकिशोर उपाध्याय के समर्थन में हटे पराक्रम

नामांकन वापस लेने के बाद पराक्रम सिंह राठौड़ ने बृजकिशोर उपाध्याय के समर्थन की बात कही। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्होंने उपाध्याय को अपना करीबी बताते हुए उनके साथ काम करने की बात कही है।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, पराक्रम ने नामांकन वापस लेने के फैसले को स्वैच्छिक बताया और बृजकिशोर शर्मा के समर्थन की बात कही। वहीं अन्य रिपोर्टों में पार्टी और सरकार के फैसले को भी इस कदम की वजह बताया गया है।

इसके साथ ही पराक्रम सिंह के पैनल से जुड़े कुछ अन्य उम्मीदवारों ने भी अपना नामांकन वापस लिया। रिपोर्टों के अनुसार, उनके गुट से सुशील जैन और गोविंद उपाध्याय सहित अन्य नाम भी नामांकन वापसी की प्रक्रिया में शामिल रहे।

RCA चुनाव में नेता पुत्रों की चर्चा

इस बार RCA चुनाव में राजनीतिक परिवारों से जुड़े कई नामों की मौजूदगी ने चुनाव को चर्चा में ला दिया। अध्यक्ष पद के लिए धनंजय सिंह खींवसर और पराक्रम सिंह राठौड़ जैसे नाम सामने आए। इसके अलावा सांसद और मंत्रियों से जुड़े परिवारों के अन्य सदस्यों ने भी अलग-अलग पदों के लिए नामांकन दाखिल किया था।

इसी वजह से RCA चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज रहीं। हालांकि RCA एक खेल संस्था है और चुनाव की प्रक्रिया उसके नियमों के तहत होती है।

अब आगे क्या?

पराक्रम सिंह राठौड़ के नामांकन वापस लेने के बाद अध्यक्ष पद के चुनाव का समीकरण बदल गया। उन्होंने बृजकिशोर उपाध्याय के समर्थन में पीछे हटने की बात कही। वहीं अन्य उम्मीदवारों के नामांकन और चुनावी प्रक्रिया के आधार पर आगे की तस्वीर तय हुई।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा पराक्रम सिंह के 32 वोटों के दावे और इसके बावजूद नामांकन वापस लेने को लेकर हुई। उनका कहना है कि उनके पास समर्थन था, लेकिन पार्टी और सरकार के फैसले को उन्होंने प्राथमिकता दी।

RCA चुनाव से जुड़े इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजस्थान क्रिकेट प्रशासन में राजनीतिक परिवारों की सक्रियता और संगठनात्मक सहमति को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, पराक्रम सिंह के सार्वजनिक बयान के आधार पर इतना स्पष्ट है कि उन्होंने अपने नामांकन वापसी को पार्टी के फैसले और बृजकिशोर उपाध्याय के समर्थन से जोड़ा है।