राजस्थान के कृषि विभाग में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के तहत भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नरेश कुमार गोयल ने बुधवार को पंत कृषि भवन में कृषि आयुक्त का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूर्व आयुक्त चिन्मयी गोपाल को भावभीनी विदाई दी।
नव नियुक्त कृषि आयुक्त ने पदभार ग्रहण करने के बाद स्पष्ट किया कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए नवाचार, तकनीकी विस्तार और योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
नरेश कुमार गोयल ने कहा कि राज्य में किसानों की आय बढ़ाना प्राथमिक लक्ष्य रहेगा। इसके लिए खरीफ और रबी फसलों के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इससे उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।
आधुनिक और जैविक खेती को बढ़ावा
कृषि आयुक्त ने प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने से खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में वृद्धि संभव होगी।
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नरेश कुमार गोयल ने जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के अनुसार खेती की पद्धतियों में बदलाव लाना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे किसानों को जल संरक्षण तकनीकों और नई फसल प्रणाली के बारे में जागरूक करें, जिससे लंबे समय तक कृषि क्षेत्र को स्थिर और मजबूत बनाया जा सके।
योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचे
कृषि आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की सभी कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक बैठे किसान तक पहुंचे। इसके लिए उन्होंने निगरानी और समन्वय तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, नरेश कुमार गोयल का कृषि आयुक्त के रूप में कार्यभार संभालना राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में नवाचार, तकनीकी विकास और किसानों के हितों को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राजस्थान के कृषि क्षेत्र को भी नई दिशा मिलेगी।
Golden Hind Desk