आईजीएनपी क्षेत्र में जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए बनेगी समेकित कार्ययोजना, किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
राजस्थान सरकार ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) क्षेत्र में जल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से एक व्यापक एवं समेकित कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रेशर इरिगेशन, फार्म डिग्गी, पीएम-कुसुम, नहरों के आधुनिकीकरण तथा अन्य कृषि एवं सिंचाई योजनाओं को एकीकृत कर ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो और किसानों को अधिक उत्पादन के साथ बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
मुख्य सचिव ने यह निर्देश शासन सचिवालय में आयोजित इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र के क्रॉपिंग पैटर्न एवं जल उपयोग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) विभाग, कृषि विभाग, जल संसाधन विभाग, ऊर्जा विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
आईजीएनपी की भूमिका प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण
मुख्य सचिव ने कहा कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 30 लाख हेक्टेयर कमांड क्षेत्र आता है, जिसमें से करीब 21 लाख हेक्टेयर भूमि सीधे नहर के माध्यम से सिंचित होती है। यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान के उन क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा साबित हुई है, जहां कभी सिंचाई के सीमित साधन थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उपलब्ध जल का वैज्ञानिक और दक्षतापूर्ण उपयोग किया जाए, ताकि प्रति बूंद पानी से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार नई कार्ययोजना तैयार कर रही है।
विकसित राजस्थान-2047 के विजन से जुड़ी पहल
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार विकसित राजस्थान-2047 के विजन के अनुरूप कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु-अनुकूल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बदलती जलवायु परिस्थितियों और सीमित जल संसाधनों को देखते हुए जल संरक्षण तथा जल उत्पादकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ सिंचाई जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध योजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन करना होगा।
तैयार होगा व्यापक रिवर बेसिन प्लान
बैठक में आईजीएनपी क्षेत्र के लिए व्यापक रिवर बेसिन प्लान तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे कमांड क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कर यह पता लगाया जाए कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल सबसे उपयुक्त रहेगी और किस प्रकार जल उपयोग की दक्षता बढ़ाई जा सकती है।
इसके साथ ही क्षेत्रवार क्रॉपिंग पैटर्न का विश्लेषण कर ऐसी फसल प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।
'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' मिशन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार के 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' मिशन के उद्देश्यों को आईजीएनपी क्षेत्र की कार्ययोजना में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इसके तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जल की बचत के साथ उत्पादन भी बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि जल एवं आर्थिक उत्पादकता से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप योजनाएं तैयार कर किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाएगा।
प्रेशर इरिगेशन और फार्म डिग्गियों पर विशेष जोर
बैठक में प्रेशर इरिगेशन प्रणाली के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आईजीएनपी के विशेषकर द्वितीय चरण में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी प्रणालियों का तेजी से विस्तार किया जाए।
इसके साथ ही किसानों को फार्म डिग्गियों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने तथा उन्हें सोलर आधारित सिंचाई प्रणालियों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। इससे जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी, सिंचाई अधिक प्रभावी होगी और भूजल पर निर्भरता भी कम होगी।
पीएम-कुसुम योजना का होगा बेहतर उपयोग
मुख्य सचिव ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से अधिकाधिक किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली से जोड़ा जाए। इससे किसानों की बिजली पर निर्भरता कम होगी, सिंचाई लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग और कृषि विभाग मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करें जिनसे किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता
मुख्य सचिव ने कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) विभाग को नोडल एजेंसी की भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्यानिकी तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग संचालित योजनाओं को एकीकृत करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे और संसाधनों का भी अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा।
अनुसंधान संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों की होगी अहम भूमिका
बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर-सीएजेडआरआई तथा अन्य अनुसंधान संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान परियोजनाएं तैयार की जाएं।
उन्होंने इसबगोल, क्लस्टर बीन (ग्वार) तथा कम पानी में अधिक लाभ देने वाली अन्य फसलों की उन्नत किस्मों के विकास एवं प्रसार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण
सरकार किसानों तक नई तकनीकों को पहुंचाने के लिए एक्सपोजर विजिट, फील्ड ट्रायल और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण उपायों, उन्नत बीजों तथा वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को तेजी से अपनाते हैं तो उत्पादन लागत कम होगी और प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकेगी।
जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी उत्पादकता
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भविष्य में जल संकट की चुनौती को देखते हुए जल उपयोग दक्षता बढ़ाना आवश्यक है। प्रेशर इरिगेशन, फार्म डिग्गी, नहर आधुनिकीकरण तथा सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई जैसी पहलें न केवल जल संरक्षण में सहायक होंगी, बल्कि कृषि उत्पादन को भी नई दिशा देंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो पश्चिमी राजस्थान के किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त होगा और कृषि क्षेत्र अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बन सकेगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
राज्य सरकार की यह पहल केवल सिंचाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कृषि प्रणाली को अधिक आधुनिक, वैज्ञानिक और बाजार उन्मुख बनाना भी है। फसल विविधीकरण, जल उपयोग दक्षता, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और अनुसंधान आधारित खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ यह कार्ययोजना लागू होती है तो आईजीएनपी क्षेत्र देश में जल प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई का एक सफल मॉडल बन सकता है। इससे जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तीनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल, आयुक्त उद्यानिकी श्वेता चौहान, कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल सहित कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग, जल संसाधन विभाग, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर-सीएजेडआरआई, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की।
GOLDEN HIND DESK