ऊर्जा परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

राजस्थान को बिजली में आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने ऊर्जा उत्पादन और भंडारण परियोजनाओं को तेज करने के दिए निर्देश

Police0125

राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन और भंडारण परियोजनाओं को मिलेगी गति, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने दिए निर्देश

 राजस्थान सरकार प्रदेश को विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मंगलवार शाम विद्युत भवन में ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति, ऊर्जा उत्पादन, बैटरी ऊर्जा भंडारण, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, आरडीएसएस, नए ग्रिड सब-स्टेशनों और विद्युत तंत्र को मजबूत करने से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के कार्यों में भी तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश को विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए विद्युत निगमों को ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

पीक ऑवर्स की बिजली मांग अपने संसाधनों से पूरी करने पर जोर

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण क्षमता का विकास बेहद महत्वपूर्ण है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित होने से बिजली की अधिक मांग वाले पीक ऑवर्स में प्रदेश अपनी जरूरत को स्वयं के संसाधनों से पूरा करने में सक्षम होगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऊर्जा उत्पादन और भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। निर्धारित समय सीमा में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जहां भी किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आ रही है, उसका तत्काल समाधान किया जाए।

पीएम सूर्यघर योजना में 3 लाख घरों को जोड़ने का लक्ष्य

बैठक में ऊर्जा मंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन मॉडल के तहत 3 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को गति देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

सरकार का जोर प्रदेश में अक्षय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने पर है। पीएम सूर्यघर योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने पर फोकस

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2027 तक प्रदेश के सभी जिलों में कृषि क्षेत्र को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत तंत्र को मजबूत करने के कार्यों में और तेजी लाई जाए, ताकि शेष जिलों के किसानों को भी दिन में दो ब्लॉक में बिजली आपूर्ति से जोड़ा जा सके।

कृषि क्षेत्र में दिन के समय बिजली उपलब्ध होने से किसानों को सिंचाई के लिए रात में बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने, नई विद्युत लाइनों के विस्तार और नए सब-स्टेशनों के निर्माण पर काम किया जा रहा है।

26 जिलों में किसानों को दिन में दो ब्लॉक में बिजली

बैठक में ऊर्जा सचिव आरती डोगरा ने बताया कि प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के दो ब्लॉक में विद्युत आपूर्ति से जोड़ा जा चुका है। शेष जिलों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए विद्युत तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि तीनों डिस्कॉम्स ने पायलट आधार पर 172 मेगावाट/688 मेगावाट ऑवर बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं।

इसके अलावा उत्पादन निगम और अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा करीब 12,400 मेगावाट ऑवर क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

ऊर्जा भंडारण क्षमता में वृद्धि होने से प्रदेश में बिजली उत्पादन और खपत के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा से होने वाले उत्पादन को स्टोर कर आवश्यकता के समय उपयोग किया जा सकेगा।

राजस्थान में बिजली की मांग में लगातार बढ़ोतरी

बैठक में ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक शिवप्रसाद नकाते ने प्रदेश में बिजली की खपत और मांग से जुड़े आंकड़ों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को राजस्थान में अब तक की सर्वाधिक 4040 लाख यूनिट विद्युत खपत दर्ज की गई। खास बात यह रही कि इतनी अधिक खपत के बावजूद बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आया।

उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश में बिजली की दैनिक औसत खपत 3369 लाख यूनिट रही, जो पिछले वर्ष जुलाई की तुलना में करीब 22 प्रतिशत अधिक है।

इसी अवधि में प्रदेश में बिजली की सर्वाधिक डिमांड 18,164 मेगावाट रही। यह पिछले वर्ष जुलाई की तुलना में करीब 24 प्रतिशत अधिक है।

बिजली की मांग में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ट्रांसमिशन और वितरण तंत्र को भी मजबूत कर रही है।

ग्रिड सब-स्टेशनों और विद्युत तंत्र को मजबूत करने पर जोर

समीक्षा बैठक में बजट में घोषित ग्रिड सब-स्टेशनों के निर्माण कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा की गई। ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए ग्रिड सब-स्टेशनों से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए।

उन्होंने कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बिजली को उपभोक्ताओं तक निर्बाध रूप से पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को भी मजबूत करना जरूरी है।

इसके लिए नई विद्युत लाइनों का विस्तार, ट्रांसमिशन क्षमता में वृद्धि और नए सब-स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है।

स्मार्ट मीटर लगाने की प्रगति की भी समीक्षा

ऊर्जा मंत्री ने बैठक में स्मार्ट मीटर स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से स्मार्ट मीटर लगाने के कार्य को निर्धारित गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी। सरकार विद्युत क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के जरिए व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

बढ़ती मांग के बावजूद निर्बाध बिजली आपूर्ति

बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में पिछले वर्ष की तुलना में बिजली की खपत और अधिकतम मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके बावजूद प्रदेश में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने बताया कि 18 जुलाई को रिकॉर्ड विद्युत खपत के दौरान भी बिजली आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं हुआ। यह प्रदेश के विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण तंत्र की क्षमता को दर्शाता है।

हालांकि भविष्य में बिजली की मांग और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार उत्पादन क्षमता, ऊर्जा भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में जोधपुर तथा अजमेर विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. भंवरलाल वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े। उत्पादन निगम के सीएमडी देवेंद्र श्रृंगी, ऊर्जा विभाग के सलाहकार नवीन अरोड़ा सहित वितरण निगमों, अक्षय ऊर्जा निगम और प्रसारण निगम के निदेशक तकनीकी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहे।

बैठक के दौरान ऊर्जा क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।

राज्य सरकार का लक्ष्य राजस्थान को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ अक्षय ऊर्जा, सौर ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता के विस्तार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युत तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

Golden Hind Desk