राजस्थान में मातृ मृत्युदर घटी, डॉक्टरों की भर्ती के निर्देश

बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन से राजस्थान में मातृ मृत्युदर में कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के निर्देश

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बेहतर चिकित्सीय प्रबंधन से प्रदेश में मातृ मृत्युदर में कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के निर्देश

राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और जरूरत का आकलन कर आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव सोमवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं फॉलोअप, प्रसव सखी कार्यक्रम तथा नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे।

सितंबर में मातृ मृत्यु के मामलों में कमी

बैठक में मुख्य सचिव ने 6 सितम्बर से 17 सितम्बर तक प्रदेश में हुई मातृ मृत्यु की अस्पतालवार समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अस्पताल प्रभारियों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से प्रत्येक मामले की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने बताया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप और प्रसव पूर्व जांच सेवाओं की निगरानी का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। अगस्त में 73 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए थे, जबकि सितंबर में यह संख्या घटकर 35 रही।

मुख्य सचिव ने उदयपुर जिले में हुई मातृ मृत्यु के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय स्तर से टीम भेजकर वहां की व्यवस्थाओं और मामलों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण जांच और उपचार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती

मुख्य सचिव ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर डॉक्टरों की जरूरत की मैपिंग की जाए। इसके आधार पर जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

मॉड्यूलर ओटी के अपग्रेडेशन पर जोर

मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के अपग्रेडेशन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में होने वाले ऑपरेशन के भार के अनुसार मॉड्यूलर ओटी की जरूरत का आकलन किया जाए।

जहां अतिरिक्त मॉड्यूलर ओटी की आवश्यकता है, वहां इनकी संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। जरूरत पड़ने पर इसके लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को बजट प्रस्ताव भेजने की बात भी कही गई।

प्रसव सखी कार्यक्रम की नियमित निगरानी

मुख्य सचिव ने प्रसूताओं की सुविधा के लिए संचालित प्रसव सखी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने इसे अस्पतालों में बेहतर तरीके से लागू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला के अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक उसे आवश्यक सहायता और सुविधाएं आसानी से मिलनी चाहिए। इसके लिए अस्पताल के संबंधित स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने प्रसव सखी कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और समन्वय की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षा

मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में संचालित नियोनेटल आईसीयू (NICU) तथा जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में संचालित SNCU एवं NICU की नियमित समीक्षा करने को कहा।

उन्होंने निर्देश दिए कि इन इकाइयों में जरूरी उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध रहे। गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार मिले और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था प्रभावी हो।

उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि सभी जिलों में सम्बद्ध मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अन्य चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों की नियमित मेंटरिंग जारी रखी जाए।

उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चारों प्रसव पूर्व जांच समय पर मिलनी चाहिए। प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद भी उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल में किसी भी स्तर पर गैप नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाने के लिए रेफरल सेवाओं को मजबूत करने और उनकी लगातार निगरानी करने पर भी जोर दिया।

बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक आरएमएससीएल श्री पुखराज सैन, आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण श्री अविचल चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी श्री हरजीलाल अटल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

GOLDEN HIND DESK