बारिश से पहले अजमेर में बड़ा एक्शन: 80 लाख रुपये के तीन डीवाटरिंग पम्प शुरू, जलभराव से राहत के लिए 24 घंटे रहेंगे तैनात
मानसून के दौरान होने वाले जलभराव से शहरवासियों को राहत दिलाने के उद्देश्य से नगर निगम अजमेर ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के निर्देश पर नगर निगम ने लगभग 80 लाख रुपये की लागत से तीन आधुनिक डीवाटरिंग पम्प सेट खरीदे हैं। रविवार को सागर विहार कॉलोनी में आयोजित कार्यक्रम में इन पम्पों का लोकार्पण किया गया। ये पम्प विशेष रूप से उन क्षेत्रों में तैनात किए जाएंगे जहां हर वर्ष भारी बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि शहर के नागरिकों को बारिश के मौसम में जलभराव जैसी समस्याओं से राहत दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने अत्याधुनिक तकनीक से लैस डीवाटरिंग पम्प सेट खरीदे हैं। इन पम्पों की सहायता से तेज बारिश के दौरान सड़कों और कॉलोनियों में जमा पानी को तेजी से निकाला जा सकेगा, जिससे आमजन को राहत मिलेगी और यातायात भी प्रभावित नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक डीवाटरिंग पम्प सेट 50 हॉर्स पावर क्षमता का है। तीनों पम्पों की संयुक्त क्षमता 150 हॉर्स पावर है। प्रत्येक पम्प प्रति घंटे लगभग 4 लाख लीटर पानी बाहर निकालने में सक्षम है। इस प्रकार तीनों पम्प मिलकर भारी मात्रा में जल निकासी कर सकेंगे, जिससे जलभराव की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
देवनानी ने जानकारी दी कि प्रत्येक डीवाटरिंग पम्प सेट में 12.50 हॉर्स पावर के चार-चार पम्प लगाए गए हैं। इन पम्पों के साथ जनरेटर सेट भी उपलब्ध कराया गया है ताकि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी जल निकासी का कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रखा जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में इस तरह की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि ये आधुनिक डीवाटरिंग पम्प विशेष रूप से सागर विहार, वन विहार और गुलमोहर कॉलोनी जैसे जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। इन इलाकों में हर वर्ष भारी बारिश के दौरान पानी भरने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन क्षेत्रों में जल निकासी तेजी से हो सकेगी और लोगों को लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि केवल पम्प लगाने तक ही कार्य सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल निकासी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए अन्य आवश्यक कार्य भी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गुलमोहर कॉलोनी एवं पत्रिका कार्यालय के समीप से गुजरने वाले दोनों नालों को पक्का कराया गया है। इससे बरसात के दौरान पानी का प्रवाह सुचारु रहेगा और नालों में रुकावट आने की संभावना कम होगी। इससे जलभराव की समस्या पर स्थायी रूप से नियंत्रण पाने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सागर विहार क्षेत्र में समस्या के पूर्ण समाधान के लिए भविष्य में दो और स्थायी डीवाटरिंग पम्प सेट स्थापित किए जाएंगे। इन पम्पों के स्थापित होने के बाद पूरे क्षेत्र में जल निकासी की क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी तथा बारिश के दौरान लोगों को राहत मिलेगी।
देवनानी ने कहा कि नगर निगम और जिला प्रशासन मानसून के दौरान पूरी तरह सतर्क रहेंगे। बारिश के समय इन पम्पों की निगरानी के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि किसी भी स्थान पर जलभराव की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल समस्या उत्पन्न होने के बाद समाधान करना नहीं, बल्कि पहले से तैयारी कर नागरिकों को परेशानियों से बचाना है।
इस अवसर पर उन्होंने अजमेर शहर के समग्र विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, पर्यटन, आधारभूत सुविधाओं और रोजगार के क्षेत्र में अजमेर को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं अनुशासित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना की जाएगी। यह संस्थान प्रदेश की बेटियों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करेगा।
अजमेर के सौंदर्यीकरण को लेकर उन्होंने कहा कि शहर के मुख्य प्रवेश द्वार पर विशेष आकर्षक लाइटिंग के साथ एंट्री प्लाजा गेट बनाया जा रहा है। इसके अलावा अंबेडकर सर्किल तक लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से फव्वारों, घुमटियों और अन्य सौंदर्यीकरण कार्यों को अंजाम दिया जाएगा। इन परियोजनाओं से शहर की सुंदरता बढ़ने के साथ पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।
उन्होंने बताया कि 250 करोड़ रुपये की लागत से वरुण सागर झील का पुनरुद्धार एवं सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद झील का संरक्षण होने के साथ-साथ यह क्षेत्र पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकेगा। इसके अतिरिक्त चौरसियावास तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य भी तेजी से जारी है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा।
युवाओं में विज्ञान एवं नवाचार की भावना विकसित करने के उद्देश्य से पंचशील क्षेत्र में साइंस पार्क विकसित किया जा रहा है। इस पार्क में अत्याधुनिक प्लेनेटोरियम की स्थापना भी की जाएगी, जहां दिन के समय भी तारों और अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों का अनुभव किया जा सकेगा। यह परियोजना विद्यार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
पर्यटन विकास की दिशा में उन्होंने बताया कि अजयसर लेपर्ड सफारी को भी जल्द शुरू किया जाएगा। इससे अजमेर आने वाले पर्यटकों को नया पर्यटन स्थल मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
रोजगार सृजन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अजमेर में विकसित किए जा रहे आईटी पार्क में तीन बड़ी कंपनियों को प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। आईटी पार्क शुरू होने के बाद स्थानीय युवाओं को शहर में ही रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे और उन्हें अन्य शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि अजमेर को शिक्षा, पर्यटन, उद्योग, विज्ञान और आधुनिक शहरी सुविधाओं से लैस एक विकसित शहर के रूप में स्थापित करना है। जलभराव से राहत के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बारिश का मौसम शुरू होने से पहले डीवाटरिंग पम्पों की व्यवस्था, नालों का सुदृढ़ीकरण और भविष्य में अतिरिक्त पम्प लगाने की योजना यह संकेत देती है कि इस बार प्रशासन जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार है। यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाता है तो सागर विहार, वन विहार, गुलमोहर कॉलोनी सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों के हजारों लोगों को मानसून के दौरान बड़ी राहत मिल सकेगी।
GOLDEN HIND DESK