जयपुर: भीलवाड़ा (Bhilwara) जिले की हमीरगढ़ (Hamirgarah) थाना पुलिस ने सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) एवं अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) की फोटो पोस्ट कर टिप्पणी करने वाले आरोपी आकाश भाम्भी पुत्र राजू (20) निवासी कवि नगर थाना हमीरगढ़ को गिरफ्तार किया है। एसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जिले के समस्त थाना अधिकारियों को सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर आमजन में भय और दहशत व्याप्त करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आरोपी आकाश भाम्भी द्वारा इंस्टाग्राम पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई व अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की फोटो पोस्ट कर टिप्पणी की गई थी। सोशल मीडिया पर जिला पुलिस द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारसमल जैन व सीओ श्याम सुंदर के सुपरविजन में हमीरगढ़ थाना अधिकारी दिलीप सिंह मय टीम द्वारा आरोपी आकाश को शांति भंग में गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में एएसआई नरपत सिंह, हेड कांस्टेबल शिवराज सिंह, कांस्टेबल वासुदेव एवं इंद्रा राम टीम में शामिल थे। Report: Sandeep Agarwal
भीलवाड़ा जिले में थाना हमीरगढ़ पुलिस की कार्रवाई
सोशल मीडिया पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एवं अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की फोटो पोस्ट कर टिप्पणी करने का आरोपी गिरफ्तार
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों से संवाद
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंचायतीराज संस्थाओं और सरपंचों को देश के विकास की धुरी बताया है। उन्होंने कहा कि गांव के व्यक्ति की समस्या के समाधान और हर उम्मीद का पहला केंद्र सरपंच होता है। इसलिए सरपंच का यह पहला लक्ष्य होना चाहिए कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए वह गांव के लोगों के बीच जाकर निरंतर संवाद करे। मुख्यमंत्री शुक्रवार को तक्षशिला ऑडिटोरियम में पंचायतीराज जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, ग्राम स्वराज, स्वावलंबन और जनभागीदारी के उन मूल्यों की याद दिलाती है, जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। राष्ट्रपिता का मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साझा किए अपने अनुभव
मुख्यमंत्री ने अपने सरपंच कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें गांव के लोगों के बीच काम करने का अवसर मिला, तो उन्होंने योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचाने और मोतियाबिंद कैम्प का आयोजन करने जैसे जनसेवा के अनेक कार्य किए। उन्होंने कहा कि हमारे गांव मजबूत होंगे तो राजस्थान मजबूत होगा। ग्राम पंचायतें पारदर्शी, जवाबदेह और जनभागीदारी वाली होंगी तो विकास की गति और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि पंचायतीराज के सभी जनप्रतिनिधि पूरी निष्ठा, ऊर्जा और सेवा भावना के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने पौने तीन वर्षों में प्रदेश को नई दिशा और नई गति देने का कार्य किया है। सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा को शासन की पहचान बनाया है। कानून व्यवस्था को मजबूत कर भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया है और आधारभूत ढांचे के विकास को भी गति दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास के मूलमंत्र से प्रेरणा लेते हुए किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं को अब तक 1 लाख 93 हजार पदों पर नियुक्तियां दी हैं। वहीं, 1 लाख 18 हजार पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। साथ ही, सवा लाख पदों के लिए भर्ती कलैंडर भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान’ के माध्यम से गांवों के सर्वांगीण विकास का रोडमैप तैयार कर रही है। इसी दिशा में पंचायत स्तर पर अटल ज्ञान केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें लाइब्रेरी, ई-लाइब्रेरी, ऑनलाइन कोचिंग एवं ई-मित्र जैसी सुविधाओं से ग्रामीण युवा लाभान्वित होंगे।
उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं को सशक्त बनाने के लिए किसान सम्मान निधि की राशि को बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया गया है। इस योजना के तहत 76 लाख से अधिक किसानों को 14 हजार 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है और 150 बीज बैंकों की भी स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 तक पूरे प्रदेश में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर तेजी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि को बढ़ाकर 1 हजार 450 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि को बढ़ाकर 1 हजार 450 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 3 लाख 82 हजार आवास बनवाए हैं तथा 4 लाख 53 हजार आवासों का निर्माण प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 10 हजार किलोमीटर मिसिंग लिंक सड़कों का निर्माण किया है। साथ ही, 327 अटल प्रगति पथों के लिए 813 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से 282 कार्य पूर्ण हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान को चार महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं की सौगात मिली है, जिसके तहत पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, शेखावाटी के लिए यमुना समझौता सहित किशाऊ परियोजना एवं नर्मदा परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार देवास, आईजीएनपी, गंगनहर, ब्राह्मणी नदी-बीसलपुर एवं सोम कमला अंबा-जवाई जैसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान में 7 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित हुई हैं एवं कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान में करीब 9 हजार रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं। इसी प्रकार जेजेएम के जरिये 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घुमंतू, अर्द्धघुमंतू एवं विमुक्त आवासहीन परिवारों को अब तक 52 हजार से अधिक पट्टे तथा स्वामित्व योजना के तहत 15 लाख से अधिक स्वामित्व कार्ड वितरित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 41 हजार से अधिक ओडीएफ प्लस मॉडल गांव घोषित किए हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय में लगातार तीन वर्ष में 10-10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ही 8 नई जिला परिषदें, 94 नई पंचायत समितियां और 3 हजार 467 नई ग्राम पंचायतें बनाई हैं। वहीं, वन स्टेट-वन इलेक्शन के संकल्प को भी पूरा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में स्वच्छता, रक्तदान, मेडिकल कैंप, आंगन मिलन, नमो सेवा लाभार्थी और एक पेड़ मां के नाम जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में जनप्रतिनिधियों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया और सेवा-संकल्प रथों के जरिये गांवों तक योजनाओं और नीतियों की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों से किया संवाद,उत्कृष्ट कार्यों के लिए संदेश पत्र देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और विशेष उपलब्धियों के लिए देवलिया की स्वरूप चौधरी, रूण्डल की मोहिनी देवी, बोराज के सुरेन्द्र सिंह मीणा, आसलपुर की सरला कुमावत और साईवाड़ के राजेन्द्र बुनकर को संदेश पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही, धौबलाई के रमेश चन्द शर्मा, दुर्जनियावास के नारायण लाल जाट, बस्सी की नीतू मीणा तथा वीसी के माध्यम से जुड़े लुधावई के गौरव सिंह, आंवा के दिव्यांश भारद्वाज, पोषाणा की पिन्टू देवी गर्ग, लांबी अहीर की नीरू यादव, रटावद के नरेन्द्र मीणा, ओलनाखेड़ा के दिनेश वैष्णव तथा पीलीबंगा के जगतार सिंह बराड़ ने अपने सरपंच कार्यकाल के अनुभव एवं नवाचार मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।
इस अवसर पर पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक कैलाश वर्मा, शत्रुघन गौतम, महेन्द्रपाल मीणा, कुलदीप धनकड़, सरपंच संघ अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल सहित प्रदेशभर के पंचायतीराज के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं, सभी जिलों से जनप्रतिनिधि वीसी के जरिये संवाद कार्यक्रम में जुड़े।
पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस को कहा अलविदा: डोटासरा से विवाद के बाद बोले- स्वाभिमान से समझौता नहीं
विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस से कहा अलविदा, डोटासरा से विवाद के बीच दिया इस्तीफा: बोले- स्वाभिमान से समझौता नहीं; डोटासरा ने कहा- पहले उनका पक्ष सुनेंगे
राजस्थान कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदल गया है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पार्टी से अलग होने की घोषणा कर दी। विश्वेंद्र सिंह पिछले कई दिनों से राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भरतपुर-डीग में पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहे थे। अब उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस को अलविदा कहने की बात कही है।
विश्वेंद्र सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा अंतरात्मा की आवाज और अपने इष्ट गिरिराज महाराज को ध्यान में रखकर फैसले लिए हैं। उन्होंने पार्टी में अपने कार्यकर्ताओं और अपनी निष्ठा को लेकर भी कई बातें लिखीं। सिंह ने कहा कि जिस संगठन के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया, वहां यदि उनकी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता का यह परिणाम मिलता है तो वह इससे दुखी हैं।
डोटासरा को संबोधित कर क्या कहा विश्वेंद्र सिंह ने?विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को संबोधित करते हुए अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी से अलग होने की बात कही। उन्होंने पार्टी के भीतर कथित तौर पर बढ़ रही 'चापलूसी की परंपरा' पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि वह अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान के साथ जीवन जीते आए हैं और अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। सिंह ने यह भी कहा कि अगर सच को सच कहना और गलत का साथ नहीं देना गलत माना जाता है, तो वह आगे भी अपनी बात कहते रहेंगे।
अपनी पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि ऐसी परिस्थिति में दम घुटने के बजाय स्वाभिमान के साथ अलग होना बेहतर है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को अलविदा कहने की घोषणा की।
विश्वेंद्र सिंह का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में हुए नगरीय निकाय चुनावों के बाद राजस्थान कांग्रेस के भीतर संगठन और स्थानीय नेतृत्व को लेकर सवाल उठे हैं। भरतपुर और डीग में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर भी सिंह ने प्रदेश और जिला संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
निकाय चुनाव के बाद बढ़ा था विवादविश्वेंद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच विवाद पिछले दिनों सार्वजनिक रूप से सामने आया। विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर और डीग में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने स्थानीय संगठन, टिकट वितरण और कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद उनके बयान पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा की प्रतिक्रिया भी सामने आई।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी की रीति-नीति और डोटासरा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर कांग्रेस से अलग होने की बात कही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उनका इस्तीफा पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच आया है।
डोटासरा ने विश्वेंद्र सिंह के बयान पर क्या कहा?विश्वेंद्र सिंह के आरोपों पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई थी। डोटासरा ने पार्टी में मतभेद की बात को खारिज करते हुए कहा था कि कांग्रेस राजस्थान में लगातार मजबूत हो रही है।
वहीं, विश्वेंद्र सिंह की ताजा घोषणा के बाद डोटासरा के रुख को लेकर भी चर्चा है। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि डोटासरा ने विश्वेंद्र सिंह का पक्ष सुनने और उनकी तकलीफ को समझने की बात कही है। यानी कांग्रेस की ओर से मामले को लेकर आगे बातचीत की संभावना भी बनी हुई है।
विश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस से पुराना संबंधविश्वेंद्र सिंह राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे पूर्व मंत्री रहे हैं और भरतपुर क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव रहा है। कांग्रेस से उनका जुड़ाव लंबे समय तक रहा, हालांकि उनके राजनीतिक सफर में पार्टी के साथ मतभेद और अलग-अलग राजनीतिक घटनाक्रम भी सामने आते रहे हैं।
2020 में राजस्थान कांग्रेस के भीतर सचिन पायलट और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच हुए राजनीतिक विवाद के दौरान भी विश्वेंद्र सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया था। बाद में वे फिर कांग्रेस सरकार में मंत्री बने थे।
अब 2026 में उनका कांग्रेस से अलग होना राजस्थान की राजनीति में एक नया घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि आगे उनका राजनीतिक रुख क्या होगा, इसको लेकर अभी अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में उनके बीजेपी में जाने की संभावना की चर्चा की गई है, लेकिन इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
कार्यकर्ताओं और संगठन को लेकर लगातार उठा रहे थे सवालपिछले कुछ समय से विश्वेंद्र सिंह सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस संगठन से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे। उन्होंने भरतपुर और डीग के स्थानीय संगठन, पार्टी कार्यकर्ताओं और टिकट वितरण को लेकर सवाल किए थे।
डीग कांग्रेस में भी उनके बयानों के बाद विवाद सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी की कार्यप्रणाली और टिकट वितरण पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद स्थानीय कांग्रेस नेताओं की ओर से भी जवाब दिए गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विश्वेंद्र सिंह और कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती गई। आखिरकार 2 अक्टूबर को उन्होंने कांग्रेस से अलग होने की घोषणा कर दी।
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए नया घटनाक्रमविश्वेंद्र सिंह का कांग्रेस छोड़ना ऐसे समय हुआ है जब राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां चल रही हैं। हाल ही में हुए नगरीय निकाय चुनावों के बाद सभी प्रमुख दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।
ऐसे समय में किसी वरिष्ठ नेता का पार्टी से अलग होना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि इस फैसले का चुनावी प्रभाव क्या होगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगा।
विश्वेंद्र सिंह ने फिलहाल अपनी पोस्ट में कांग्रेस छोड़ने की घोषणा की है। उन्होंने आगे की राजनीतिक भूमिका के बारे में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। इसलिए बीजेपी में शामिल होने जैसी चर्चाओं को अभी अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर है। क्या वे किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होंगे या फिलहाल स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका में रहेंगे, इस पर उनकी ओर से कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व के सामने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देने और संगठन के भीतर उठ रहे सवालों को संभालने की चुनौती है। डोटासरा और विश्वेंद्र सिंह के बीच पिछले दिनों सार्वजनिक रूप से सामने आए मतभेदों के बाद अब दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस से अपने संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने अपने फैसले को सम्मान, स्वाभिमान और अपने सिद्धांतों से जोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व को अलविदा कहा है। वहीं कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व की ओर से उनके पक्ष को सुनने और उनकी नाराजगी को समझने की बात कही गई है।
विश्वेंद्र सिंह के आरोप उनके सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि को अलग से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
गांधी जयंती पर CM भजनलाल शर्मा ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को किया नमन, गांधी सर्किल पर राज्यपाल के साथ अर्पित की पुष्पांजलि
गांधी जयंती पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अर्पित की पुष्पांजलि, शास्त्री जी को भी किया नमन
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर राजस्थान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने दोनों महान नेताओं के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर शासन सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में राम धुन का भी आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यक्रम में शामिल होकर ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ सहित अन्य भजनों का श्रवण किया। इस दौरान सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
शासन सचिवालय में मुख्यमंत्री ने किया महापुरुषों को नमनमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शुक्रवार सुबह शासन सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री ने दोनों महान नेताओं के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित राम धुन कार्यक्रम में गांधीजी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति हुई। ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे भजनों के माध्यम से महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और मानवता के संदेश को याद किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के देश के लिए योगदान को याद किया। दोनों नेताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, अनुशासन और देशसेवा की मिसाल पेश की।
गांधी सर्किल पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने की पुष्पांजलिइसके बाद राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जेएलएन मार्ग स्थित गांधी सर्किल पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
गांधी सर्किल पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं ने राम धुन की प्रस्तुति दी। छात्राओं की प्रस्तुति के दौरान वातावरण गांधीजी के प्रिय भजनों से गूंज उठा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी दोनों महापुरुषों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
गांधी जयंती हर वर्ष 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। यह दिन महात्मा गांधी के जन्मदिवस के साथ-साथ देश में अहिंसा, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में भी मनाया जाता है।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूदगांधी सर्किल पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा, सांसद मंजू शर्मा और जयपुर के महापौर सुनील कोठारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इसके अलावा मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान गांधीजी के विचारों और उनके बताए मार्ग को याद किया गया। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को अपने जीवन का आधार बनाया और इन्हीं मूल्यों के माध्यम से देशवासियों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का कार्य किया।
महात्मा गांधी के विचार आज भी प्रासंगिकमहात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और सामाजिक समानता जैसे विचारों पर आधारित रहा। उन्होंने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान पर विशेष जोर दिया। गांधीजी का मानना था कि समाज में बदलाव केवल कानूनों से नहीं बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में परिवर्तन से भी आता है।
गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में उनके विचारों को याद किया जाता है। राजस्थान में भी विभिन्न स्थानों पर गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के साथ स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गांधीजी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति भी गांधी जयंती कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहती है। जयपुर के गांधी सर्किल पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं ने राम धुन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को विशेष स्वरूप दिया।
लाल बहादुर शास्त्री को भी किया याद2 अक्टूबर को ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गांधीजी के साथ शास्त्री जी को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे। उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, ईमानदारी और अनुशासन के लिए जाना जाता है। उन्होंने देश के कठिन दौर में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा आज भी देश में व्यापक रूप से याद किया जाता है। इस नारे के माध्यम से उन्होंने देश की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों के महत्व को रेखांकित किया था।
राम धुन से गूंजा गांधी सर्किलगांधी जयंती के कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं द्वारा प्रस्तुत राम धुन ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण वातावरण बनाया। ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे भजनों का संबंध महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से रहा है।
शासन सचिवालय में भी मुख्यमंत्री ने राम धुन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भजनों का श्रवण किया और गांधीजी के विचारों को याद किया।
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता आंदोलन और महान नेताओं के योगदान से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं। स्कूली छात्राओं की प्रस्तुति के जरिए कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली।
स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेशगांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता का संदेश भी विशेष रूप से दिया जाता है। महात्मा गांधी ने अपने जीवन में स्वच्छता को महत्वपूर्ण स्थान दिया था। उनका मानना था कि स्वच्छ समाज और स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है।
जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने, कचरा निर्धारित स्थान पर डालने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।
राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में भी गांधीजी के विचारों को याद करते हुए उनके बताए मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलिमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शासन सचिवालय और गांधी सर्किल पर महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के साथ गांधी सर्किल पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में शामिल होकर मुख्यमंत्री ने दोनों महापुरुषों को नमन किया।
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों तथा शास्त्री जी के सादगी और देशसेवा के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश सामने आया।
2 अक्टूबर का दिन देश के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। एक ही दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती होने के कारण देशभर में दोनों नेताओं को याद किया जाता है। जयपुर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से भी राज्य सरकार और प्रशासन ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
जयपुर में रात को सड़कों पर उतरे महापौर सुनील कोठारी, खुद झाड़ू लगाकर जांची सफाई व्यवस्था
जयपुर में रात को सड़कों पर उतरे महापौर सुनील कोठारी, खुद झाड़ू लगाकर जांची सफाई व्यवस्था; सांसद मंजू शर्मा भी रहीं मौजूद
जयपुर नगर निगम के महापौर सुनील कोठारी ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर फील्ड में उतरकर निरीक्षण किया। महापौर गुरुवार देर रात चारदीवारी क्षेत्र में पहुंचे और बाजार बंद होने के बाद सड़कों पर सफाई व्यवस्था की स्थिति देखी। इस दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों की तैनाती, कचरा उठाने की व्यवस्था और सफाई के लिए उपलब्ध संसाधनों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सड़क पर कचरा दिखाई देने पर महापौर ने खुद झाड़ू उठाकर सफाई की।
महापौर के इस रात्रिकालीन निरीक्षण में जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा भी मौजूद रहीं। उनके साथ पार्षद अनुराधा माहेश्वरी, नगर निगम उपायुक्त बलराम मीणा सहित नगर निगम के अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सांगानेरी गेट स्थित हनुमान मंदिर से शुरू हुए निरीक्षण के दौरान चारदीवारी के प्रमुख बाजारों और आसपास के क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को देखा गया।
महापौर बनने के बाद पहला रात्रिकालीन निरीक्षणसुनील कोठारी के महापौर पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह उनका पहला रात्रिकालीन शहर निरीक्षण रहा। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से केवल रिपोर्ट लेने के बजाय मौके पर पहुंचकर सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया।
जयपुर का चारदीवारी क्षेत्र शहर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है। यहां दिनभर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, व्यापारी और पर्यटक पहुंचते हैं। बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां समाप्त होने के बाद सड़कों और दुकानों के आसपास कचरा जमा होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में रात के समय सफाई व्यवस्था किस तरह संचालित होती है, इसे देखने के लिए महापौर ने मौके का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों की मौजूदगी और उनकी तैनाती की स्थिति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली। इसके अलावा कचरा उठाने वाले वाहनों और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली गई।
सड़क पर खुद झाड़ू लगाकर दिया स्वच्छता का संदेशरात्रिकालीन निरीक्षण के दौरान जब महापौर को सड़क पर कचरा दिखाई दिया तो उन्होंने खुद झाड़ू उठाई और सफाई की। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता को लेकर लोगों को जागरूक रहने का संदेश दिया।
शहर को साफ रखने में नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के साथ आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलाना और कचरे को निर्धारित स्थान पर डालना स्वच्छ शहर के लिए जरूरी है। बाजारों में दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा भी अपनी दुकानों के आसपास सफाई बनाए रखने से सड़कों पर कचरा जमा होने की समस्या कम हो सकती है।
महापौर ने निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को समझने पर जोर दिया। उनका कहना है कि फील्ड में आने वाली परेशानियों की जानकारी होने के बाद ही व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।
2 अक्टूबर को विशेष सफाई पर फोकसमहापौर सुनील कोठारी ने कहा कि 2 अक्टूबर को राजधानी जयपुर में विशेष सफाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वह खुद रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को फील्ड में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे समझना जरूरी है। कर्मचारियों की तैनाती से लेकर सफाई संसाधनों की उपलब्धता और कचरा उठाने की व्यवस्था तक सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।
महापौर के अनुसार, निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का अध्ययन करने के बाद आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य शहर की सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और प्रमुख बाजारों में नियमित सफाई सुनिश्चित करना है।
दीपोत्सव से पहले जयपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की तैयारीआने वाले समय में दीपोत्सव का त्योहार भी है। ऐसे में जयपुर के प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महापौर ने कहा कि उनकी कोशिश है कि दीपोत्सव के दौरान जयपुर स्वच्छ और सुंदर नजर आए और शहर रोशनी से जगमगाए।
त्योहारों के दौरान बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे सफाई व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में समय पर कचरा उठाना, सड़कों की सफाई करना और सफाई कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती जरूरी हो जाती है।
चारदीवारी क्षेत्र में बड़ी संख्या में बाजार और ऐतिहासिक स्थल हैं। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी साफ-सफाई महत्वपूर्ण है। शहर की स्वच्छता जयपुर की पहचान और पर्यटन व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है।
सांसद मंजू शर्मा भी रहीं निरीक्षण में मौजूदमहापौर सुनील कोठारी के रात्रिकालीन दौरे में जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा भी शामिल हुईं। उन्होंने भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।
इस दौरान पार्षद अनुराधा माहेश्वरी, उपायुक्त बलराम मीणा और नगर निगम के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान बाजार बंद होने के बाद सड़क पर जमा होने वाले कचरे और उसके समय पर उठाव की व्यवस्था को देखा गया।
नगर निगम के लिए चारदीवारी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। दिनभर व्यापारिक गतिविधियों के कारण यहां बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है। ऐसे में बाजार बंद होने के बाद प्रभावी सफाई व्यवस्था जरूरी होती है, ताकि सुबह बाजार खुलने से पहले सड़कें साफ दिखाई दें।
चारदीवारी क्षेत्र की सफाई पर विशेष ध्यानजयपुर का चारदीवारी क्षेत्र ऐतिहासिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां हवामहल, जौहरी बाजार, बापू बाजार, त्रिपोलिया बाजार और अन्य प्रमुख बाजारों में बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
ऐसे क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए नियमित निगरानी जरूरी है। महापौर के रात्रिकालीन निरीक्षण का एक उद्देश्य यह भी रहा कि बाजार बंद होने के बाद वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों से सफाई कर्मचारियों की तैनाती, कचरा संग्रहण और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली गई। इसके आधार पर आने वाले समय में सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
जयपुर की हेरिटेज पहचान को सुरक्षित रखने पर जोरनिरीक्षण के दौरान महापौर सुनील कोठारी ने जयपुर की ऐतिहासिक पहचान और यूनेस्को हेरिटेज दर्जे को सुरक्षित रखने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।
जयपुर की चारदीवारी अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला, बाजारों और सांस्कृतिक पहचान के लिए देश-दुनिया में जानी जाती है। ऐसे में शहर को साफ रखने के साथ-साथ इसकी ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखना भी जरूरी है।
महापौर ने कहा कि जयपुर को मिली हेरिटेज पहचान को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। शहर के विकास के साथ ऐतिहासिक क्षेत्रों की सुंदरता और पहचान को बनाए रखना नगर निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अब जमीनी स्तर पर बदलाव पर रहेगी नजरमहापौर के इस रात्रिकालीन निरीक्षण के बाद अब नगर निगम की सफाई व्यवस्था में होने वाले बदलाव पर नजर रहेगी। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करना और कर्मचारियों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
जयपुर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगर निगम के साथ आम नागरिकों, व्यापारियों और सफाई कर्मचारियों की भागीदारी भी जरूरी है। खासकर चारदीवारी क्षेत्र में नियमित सफाई, समय पर कचरा उठाने और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने से शहर की तस्वीर और बेहतर हो सकती है।
महापौर सुनील कोठारी का देर रात सड़कों पर पहुंचकर सफाई व्यवस्था देखना नगर निगम की कार्यप्रणाली की जमीनी निगरानी का हिस्सा रहा। अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निरीक्षण के बाद सफाई व्यवस्था में किस तरह के सुधार किए जाते हैं और दीपोत्सव से पहले जयपुर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लक्ष्य को किस तरह लागू किया जाता है।
फलोदी में 1.50 करोड़ से मजबूत हुआ पेयजल तंत्र, 2805 ग्रामीणों को लाभ
फलोदी की तीन ढाणियों में बदली पेयजल व्यवस्था, 1.50 करोड़ से मजबूत हुआ जल तंत्र 2,805 ग्रामीणों को मिला लाभ, तीन उच्च जलाशयों और पाइपलाइन कार्यों से पेयजल सुविधा को मिला नया आधार
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों का असर अब फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की तीन ढाणियों में दिखाई देने लगा है। सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर) में मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल संबंधी विभिन्न विकास कार्य पूरे किए गए हैं। इन कार्यों से इन तीनों ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल तंत्र को मजबूती मिली है और करीब 2,805 ग्रामीणों को इसका लाभ मिल रहा है।
इन क्षेत्रों में पहले ग्रामीणों के सामने पानी की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर कई तरह की चुनौतियां रहती थीं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की व्यवस्था करना ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण विषय था। ऐसे में पेयजल infrastructure को मजबूत करने के लिए किए गए कार्यों से स्थानीय लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
मुख्यमंत्री बजट घोषणा से मिली पेयजल परियोजना को गतिग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह लोगों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री बजट घोषणा के अंतर्गत लोहावट क्षेत्र की इन तीन ढाणियों में पेयजल तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए कार्य स्वीकृत किए गए।
परियोजना के तहत करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न कार्य किए गए। इनमें तीन उच्च जलाशयों का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अन्य जरूरी कार्य शामिल हैं। इन कार्यों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत आधार देना और लोगों तक पानी की आपूर्ति को बेहतर बनाना था।
15 जनवरी 2025 को कार्यादेश जारी होने के बाद प्रस्तावित कार्यों को पूरा किया गया। जलाशयों के निर्माण के साथ पाइपलाइन संबंधी कार्य किए जाने से पेयजल तंत्र को आवश्यक आधार मिला है।
तीन ढाणियों में पहुंचा योजना का लाभइस परियोजना का लाभ लोहावट क्षेत्र की तीन प्रमुख ग्रामीण ढाणियों को मिल रहा है। इनमें सुथारों की ढाणी (इन्द्रनगर), डूडियो की ढाणी (सदरी) और पुनियों की ढाणी (नौसर) शामिल हैं।
इन तीनों क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया जाना महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। योजना के माध्यम से कुल 2,805 ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं।
पेयजल व्यवस्था मजबूत होने से ग्रामीण परिवारों को पानी की उपलब्धता को लेकर पहले की तुलना में बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। गांव और ढाणियों में विकास का सीधा असर तब दिखाई देता है जब बुनियादी जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं लोगों के घर और आसपास तक बेहतर तरीके से पहुंचती हैं।
तीन उच्च जलाशयों से मजबूत हुआ सिस्टमपरियोजना के तहत तीन उच्च जलाशयों का निर्माण किया गया है। ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में उच्च जलाशयों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इनके माध्यम से पानी के भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था को व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।
इसके अलावा संबंधित क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के कार्य भी किए गए हैं। जलाशयों और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए पेयजल तंत्र को मजबूत आधार देने का प्रयास किया गया है।
इससे केवल वर्तमान पेयजल आवश्यकता को पूरा करने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल infrastructure को आगे मजबूत करने के लिए भी आधार तैयार होगा।
पानी के इंतजार से बेहतर सुविधा की ओर बढ़े ग्रामीण क्षेत्रग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता का सीधा संबंध लोगों की दिनचर्या से होता है। जब किसी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति पर्याप्त और व्यवस्थित नहीं होती तो इसका असर परिवारों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है।
फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की इन तीन ढाणियों में पेयजल तंत्र को मजबूत करने के बाद अब ग्रामीणों को बेहतर व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। करीब 2,805 लोगों को योजना का लाभ मिलना इस परियोजना के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
सरकार की बजट घोषणाओं के तहत जब बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम गांवों और ढाणियों तक पहुंचते हैं तो उनका असर सीधे आमजन के जीवन पर दिखाई देता है। इस परियोजना में भी पानी जैसी मूलभूत जरूरत को प्राथमिकता देते हुए infrastructure को मजबूत किया गया है।
गांवों में विकास की तस्वीर को मिला नया आधारराजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की तस्वीर केवल सड़कों, भवनों या अन्य बड़े निर्माण कार्यों से नहीं बनती। पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी ग्रामीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
लोहावट क्षेत्र की इन तीन ढाणियों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने का काम इसी दिशा में एक कदम है। करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से किए गए कार्यों और 2,805 ग्रामीणों को मिले लाभ से यह स्पष्ट होता है कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का असर स्थानीय स्तर पर किस तरह दिखाई देता है।
तीन उच्च जलाशयों के निर्माण और पाइपलाइन संबंधी कार्य पूरे होने के बाद अब इन क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर आधार मिला है। ग्रामीणों के लिए पानी की सुविधा में सुधार रोजमर्रा के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बजट घोषणा से जमीन पर दिखा बदलावमुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत स्वीकृत यह परियोजना अब पूरी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव का आधार बन रही है। योजना के माध्यम से पेयजल infrastructure को मजबूत किया गया और तीन ढाणियों के हजारों ग्रामीणों तक इसका लाभ पहुंचा।
सुथारों की ढाणी, डूडियो की ढाणी और पुनियों की ढाणी में किए गए कार्य यह बताते हैं कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है जब उनका लाभ आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंचता है।
करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत, तीन उच्च जलाशयों का निर्माण, पाइपलाइन संबंधी कार्य और 2,805 ग्रामीणों को लाभ इस परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां हैं। पेयजल व्यवस्था में हुआ यह सुधार इन ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले समय के लिए बेहतर आधार तैयार कर सकता है।
इस तरह मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत लोहावट क्षेत्र की तीन ढाणियों में किए गए पेयजल कार्यों ने वर्षों से पानी की बेहतर सुविधा की जरूरत महसूस कर रहे ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद पैदा की है। गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ही समग्र ग्रामीण विकास की मजबूत नींव बनता है और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधा इस विकास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।