राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मरीजों के इलाज में गंभीर अनियमितताओं और कर्तव्य में घोर लापरवाही के मामलों में दो डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि चार अन्य डॉक्टरों की पेंशन पर रोक लगा दी गई है।
सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों में कोताही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इन मामलों की जांच लंबे समय से लंबित थी, जिसमें मरीजों की शिकायतें, विभागीय जांच रिपोर्ट और मेडिकल ऑडिट शामिल थे।
किन आरोपों में हुई कार्रवाई
जिन डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई है, उन पर आरोप हैं:
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मरीजों के इलाज में गंभीर लापरवाही
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ड्यूटी से बिना अनुमति अनुपस्थिति
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सरकारी अस्पतालों में रहते हुए निजी प्रैक्टिस
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आपातकालीन सेवाओं में गैर-जिम्मेदाराना रवैया
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विभागीय आदेशों की अवहेलना
जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद राज्य सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल नौकरी नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी का क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाला हर मरीज सरकार की प्राथमिकता है और उसके जीवन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर त्वरित कार्रवाई की जाए और जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।
स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। कई जिलों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को अपने रिकॉर्ड दुरुस्त करने और ड्यूटी में अनुशासन बरतने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय स्तर पर निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।
पेंशन रोकने का फैसला
चार डॉक्टरों की पेंशन रोकने का निर्णय भी अहम माना जा रहा है। सरकार ने साफ किया है कि सेवा काल में की गई गंभीर लापरवाही से कोई भी व्यक्ति पेंशन जैसे अधिकार से वंचित हो सकता है।
जनता और मरीजों की प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले का आम जनता और मरीज संगठनों ने स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन अब पहली बार इतनी सख्त कार्रवाई देखने को मिली है।
आगे की कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में चल रही अन्य जांचों के निष्कर्ष आने के बाद और अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठा रही है।