जयपुर: राजस्थान में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रदेशभर में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को बढ़ावा देने के लिए नए प्रशिक्षण और ऋण सहायता कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को व्यवसायिक कौशल, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता विकास से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने, उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और डिजिटल भुगतान प्रणाली की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक भी पहुंचा सकें।
सरकार की इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऋण सहायता है। महिला स्वयं सहायता समूहों को बैंकों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही समय पर ऋण चुकाने वाले समूहों को प्रोत्साहन राशि और अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी देने का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे महिलाओं को साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकेंगी।
ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और राज्य सरकार की अन्य महिला सशक्तिकरण योजनाओं के साथ समन्वय में लागू किया जाएगा। प्राथमिकता उन समूहों को दी जाएगी, जो कृषि आधारित गतिविधियों, डेयरी, पशुपालन, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और सेवा क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।
इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिला स्वयं सहायता समूह न केवल परिवार की आय बढ़ाते हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिलाएं जब आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विभाग की ओर से यह भी बताया गया है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी जिला स्तर पर की जाएगी और प्रत्येक स्वयं सहायता समूह के कार्यों का नियमित मूल्यांकन होगा। सफल समूहों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के अवसर भी दिए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने इस घोषणा का स्वागत किया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि अगर प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता समय पर मिले, तो वे अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ा सकती हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।