SI भर्ती परीक्षा में कड़ी सुरक्षा, नकल पर सख्ती

उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा 2025: 7.7 लाख अभ्यर्थियों के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम, नकल पर सख्त कार्रवाई

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उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा 2025: 7.7 लाख अभ्यर्थियों के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम, नकल पर सख्त कार्रवाई

 राजस्थान में आगामी 5 और 6 अप्रैल को आयोजित होने वाली उप-निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा-2025 को लेकर व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग ने इस बार अभूतपूर्व स्तर पर कड़े इंतजाम किए हैं। इसी क्रम में आयोग सदस्य हेमंत प्रियदर्शी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।

बैठक में परीक्षा के सफल और सुरक्षित संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने जानकारी दी कि इस परीक्षा का आयोजन प्रदेश के 26 जिला मुख्यालयों और 15 उपखंड मुख्यालयों सहित कुल 41 शहरों में किया जाएगा। इसके लिए 1174 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग 7 लाख 70 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे।


 नकल और पेपर लीक पर सख्त कानून लागू

राजस्थान में सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए कड़े कानूनों को इस परीक्षा में सख्ती से लागू किया जाएगा। राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2022 के तहत नकल, पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और अन्य किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी पर कठोर दंड का प्रावधान है।

इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा दोषियों पर 10 लाख से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, परीक्षा से संबंधित खर्च की वसूली और संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार किसी भी प्रकार की अनियमितता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।


 ब्लूटूथ नकल पर तकनीकी शिकंजा

पिछले वर्षों में सामने आए नकल के नए-नए तरीकों को देखते हुए इस बार तकनीकी स्तर पर भी विशेष तैयारियां की गई हैं। पुलिस के तकनीकी विशेषज्ञों ने ब्लूटूथ आधारित नकल के खिलाफ विशेष रिसर्च कर नई तकनीक विकसित की है।

अब परीक्षा केंद्रों पर सूक्ष्म से सूक्ष्म ब्लूटूथ डिवाइस को भी आसानी से पकड़ा जा सकेगा। इससे नकल माफिया के मंसूबों पर बड़ा झटका लगेगा। साथ ही, पूर्व में नकल या पेपर लीक मामलों में शामिल रहे आरोपियों और डिबार अभ्यर्थियों पर भी पुलिस की विशेष नजर रखी जा रही है।


 रियल टाइम वीडियो रिकॉर्डिंग से निगरानी

परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार सभी परीक्षा केंद्रों पर रियल टाइम डेट और टाइम स्टैम्प के साथ वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि परीक्षा के दौरान होने वाली हर गतिविधि का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

इस तकनीक के माध्यम से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की स्थिति में प्रमाण के रूप में वीडियो फुटेज का उपयोग किया जा सकेगा। इससे न केवल नकल करने वालों पर रोक लगेगी, बल्कि मेहनती अभ्यर्थियों का भरोसा भी मजबूत होगा।


 त्रिस्तरीय जांच और सख्त ड्रेस कोड

परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की सुरक्षा जांच के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। केंद्रों पर महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, जो मेटल डिटेक्टर के माध्यम से जांच करेंगे।

ड्रेस कोड को भी सख्ती से लागू किया गया है। पुरुष अभ्यर्थियों को आधी आस्तीन के कपड़े और चप्पल पहनकर आने की अनुमति होगी, जबकि महिलाओं को भी निर्धारित सादे वस्त्रों में आना होगा। जूते, पूरी आस्तीन के कपड़े और किसी भी प्रकार के आभूषण या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

हालांकि सिख धर्म के अभ्यर्थियों को धार्मिक प्रतीकों के साथ प्रवेश की अनुमति दी गई है, लेकिन सुरक्षा जांच के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाएगी।


 परीक्षा केंद्रों के आसपास सख्ती

परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 100 मीटर के दायरे में स्थित सभी साइबर कैफे और ई-मित्र केंद्रों को परीक्षा अवधि के दौरान बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, केंद्रों पर किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीमें लगातार निरीक्षण करेंगी ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।


 सतर्कता दल और डिजिटल मॉड्यूल से निगरानी

परीक्षा की निगरानी के लिए विशेष सतर्कता दल गठित किए गए हैं, जो परीक्षा से पहले और बाद में केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो तुरंत रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही आयोग ने प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने के लिए डिजिटल मॉड्यूल भी लागू किया है। अब केंद्राधीक्षक कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से सभी आवश्यक प्रपत्र आसानी से भर सकेंगे। इससे कागजी कार्यवाही कम होगी और अधिकारी परीक्षा की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।


 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा-2025 को लेकर राजस्थान में इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को अपनाया गया है। लगभग 7.7 लाख अभ्यर्थियों के लिए आयोजित इस विशाल परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध नजर आ रहा है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा किए गए इन कड़े इंतजामों से यह स्पष्ट है कि सरकार और प्रशासन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पूरी तरह गंभीर हैं।

इस बार की सख्त व्यवस्थाएं न केवल नकल माफिया पर लगाम लगाएंगी, बल्कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करेंगी।

Golden Hind Desk