बिहार-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था अब और भी कड़ी कर दी गई है। खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े 10 से ज्यादा संदिग्ध आतंकी नेपाल के रास्ते ठाकुरगंज से बिहार में घुसने की फिराक में हैं। ये आतंकी जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश, हरकत-उल जिहाद अल-इस्लामी और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टर इस्लामिक संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
सुरक्षा बलों का हाई अलर्ट
सुपौल, सीतामढ़ी, अररिया और किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में सशस्त्र सीमा बल और स्थानीय पुलिस ने निगरानी और तेज कर दी है। इस खुफिया इनपुट के आधार पर सुपौल जिले से सटी नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। SSB और बिहार पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त बढ़ा दी है, खासकर वीरपुर, निर्मली और कोसी नदी के दियारा क्षेत्रों में। सुपौल के एसपी शैशव यादव ने 16 मई को भीमनगर थाने का निरीक्षण किया और रात्रि पेट्रोलिंग सहित गहन निगरानी के निर्देश दिए। किशनगंज में भी 15 किमी के दायरे में आधार वेरिफिकेशन, फिंगरप्रिंटिंग और रेटिना स्कैन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। बिहार-नेपाल सीमा पर रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक कर्फ्यू लागू है, जो अगले दो महीनों तक रहेगा।
भारत-पाक तनाव का नतीजा
सीमा पर यह सख्ती ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी भारत-पाक तनाव का नतीजा है, जिसके तहत 7 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। नेपाल के साथ बिहार की 729 किमी लंबी खुली सीमा को हमेशा से ही संवेदनशील माना गया है। हालांकि, नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने भारत को भरोसा दिया है कि उनकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं होगा.
घुसपैठ की साजिश
खुफिया सूचनाओं के मुताबिक ISI और बांग्लादेशी संगठन नेपाल के रास्ते घुसपैठ की साजिश रच रहे हैं।इस दौरान प्रशासन ने स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है। SSB और पुलिस की संयुक्त टीमें सीमा पर हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं, लेकिन खुली सीमा और स्थानीय सहायता से घुसपैठ की आशंका इसके बावजूद बनी हुई है।
सार्वजनिक स्थानों पर अलर्ट
इधर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल, धर्मशाला और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जांच अभियान तेज कर दिया गया है. आतंकियों की संभावित गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे और एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया हैट. साथ ही खुफिया एजेंसियां स्थानीय स्तर पर संदिग्ध लोगों पर नजर बनाए हुए हैं यह पहला मौका नहीं है.
बिहार-नेपाल सीमा का इस्तेमाल
जब बिहार में आतंकियों की घुसपैठ की बात सामने आई है. इससे पहले भी कई बार बिहार-नेपाल सीमा का इस्तेमाल आतंकियों और तस्करों द्वारा किया जाता रहा है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आसान आवाजाही और ढीले सुरक्षा प्रबंध की वजह से यह क्षेत्र आतंकियों के लिए सुरक्षित रूट माना जाता है पुलिस मुख्यालय ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें. तीनों आतंकियों की तस्वीर और विवरण जल्द ही सार्वजनिक किए जाने की संभावना है, ताकि लोग भी पहचान करने में मदद कर सकें.