जयपुर।
राजस्थान सरकार ने राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से लगभग 700 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना को स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत बिजली नेटवर्क का व्यापक स्तर पर डिजिटलाइजेशन किया जाएगा, जिससे बिजली आपूर्ति अधिक सुचारु, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित हो सकेगी।
योजना की पृष्ठभूमि
राज्य में बढ़ती बिजली मांग, तकनीकी नुकसान, लाइन फॉल्ट और शिकायत निवारण में देरी जैसी समस्याओं को देखते हुए सरकार ने बिजली वितरण तंत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को समान रूप से मजबूत किया जाएगा।
डिजिटलाइजेशन के प्रमुख घटक
इस योजना के अंतर्गत बिजली वितरण प्रणाली के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को तकनीकी रूप से उन्नत किया जाएगा—
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चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटरों की स्थापना
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स्मार्ट ग्रिड तकनीक के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग
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सब-स्टेशन और फीडर स्तर पर डिजिटल नियंत्रण प्रणाली
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स्वचालित फॉल्ट डिटेक्शन और त्वरित मरम्मत व्यवस्था
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डेटा एनालिटिक्स के जरिए मांग और आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन
बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान पर नियंत्रण
डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद बिजली चोरी और तकनीकी लाइन लॉस पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। स्मार्ट मीटर और निगरानी प्रणाली से अनियमित खपत तुरंत सामने आएगी, जिससे वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
उपभोक्ता सेवाओं में सुधार
इस योजना से उपभोक्ताओं को कई नई सुविधाएं मिलेंगी—
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सटीक और पारदर्शी बिलिंग प्रणाली
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ऑनलाइन शिकायत पंजीकरण और ट्रैकिंग
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बिजली कटौती और फॉल्ट की पूर्व सूचना
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मोबाइल और वेब आधारित सेवाओं का विस्तार
नियंत्रण एवं निगरानी केंद्र
राज्य की बिजली वितरण कंपनियों के स्तर पर आधुनिक कमांड और कंट्रोल सेंटर विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों से पूरे नेटवर्क की निगरानी की जाएगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों पर विशेष फोकस
सरकार का लक्ष्य है कि डिजिटल बिजली व्यवस्था का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुंचे। इसके लिए फीडर और ट्रांसफॉर्मर स्तर तक तकनीकी उन्नयन किया जाएगा।
प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता
डिजिटल नेटवर्क से ऊर्जा विभाग और वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। योजनाओं के क्रियान्वयन, खर्च और परिणामों की निगरानी आसान होगी, जिससे जवाबदेही तय की जा सकेगी।
भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की तैयारी
ऊर्जा विभाग के अनुसार यह निवेश केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास, शहरीकरण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसी बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।