जयपुर : राजस्थान विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग तथा पंचवर्षीय विधि महाविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा में विधि एवं न्याय की अवधारणा विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ सफल समापन. तीसरे दिन 4 सत्रों में 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया.
समापन समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष तथा राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र रहे डॉ. सतीश पूनिया ने अपने वक्तव्य में राजस्थान विश्वविद्यालय से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए भारतीय संस्कृति तथा भारतीयता की अवधारणा में संस्कृत के स्थान पार टिप्पणी करते हुए विश्व पटल पर संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा को मिल रही पहचान पर प्रकाश डाला. डा. पूनिया ने भारतीय विधि तथा दंड प्रणाली की उत्कृष्टता को रेखांकित करते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 के महत्व को भी रेखांकित किया. समारोह में न्यू जर्सी अमेरिका के वेद विद्वान तथा चिकित्सा शास्त्री डा. रमेश गुप्ता ने वैदिक सभ्यता के इतिहास पर व्याख्यान देते हुए भारतीय सभ्यता और संस्कृत साहित्य के इतिहास पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला.
समारोह के विशिष्ठ अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राम सेवक दुबे ने वेद को ब्रह्माण्ड भर का संविधान बताया. प्रो. दुबे ने भावी अधिवक्ताओं को शास्त्रों से उद्धरण देते हुए बताया कि किस प्रकार सत्य और शर्मा के पक्ष में तर्क तथा विधि का प्रयोग करना ही न्याय है.
समापन समारोह के सारस्वत अतिथि तथा भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव तथा प्रख्यात चिंतक प्रो. सच्चिदानंद मिस्र ने विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया. प्रो. मिस्र ने संविधान तथा दंडनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि विधि तथा संविधान के बिना मत्स्य न्याय तथा अराजकता की स्थिति हो जाएगी. प्रो. मिस्र ने कहा कि विद्वानों तथा नीति निर्माताओं का दायित्व है कि यह पहचान करें कि प्राचीन दंड प्रणाली के वे कौन से तत्व हैं जो वर्तमान न्याय व्यवस्था में लुप्त हो गए हैं.
भारतीय ज्ञान परंपरा एवं संस्कृति को सारे विश्व में मिल रही मान्यता : डा. सतीश पूनिया
Related News
शिक्षा संवाद कार्यक्रम: शिक्षक समाज की दिशा तय करने वाले, नैतिक मूल्यों पर जोर—मदन दिलावर
राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, नैतिक एवं आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा जिले में आयोजित शिक्षा संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है।
कोटा के सियाम ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में कोटा और बूंदी जिलों के करीब 627 प्रधानाचार्य, कार्यवाहक प्रधानाचार्य और शिक्षा अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को समझना, संवाद स्थापित करना और सुधार के लिए सुझाव लेना था।
शिक्षक समाज के निर्माताशिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। एक शिक्षक ही श्रेष्ठ नागरिक, वैज्ञानिक, उद्योगपति, राजनेता और समाज के जिम्मेदार व्यक्तित्व तैयार करता है। इसलिए शिक्षक का स्थान समाज में अत्यंत सम्माननीय है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का जीवन विद्यार्थियों के लिए आदर्श होता है। बच्चे न केवल किताबों से बल्कि शिक्षक के व्यवहार, आचरण और व्यक्तित्व से भी सीखते हैं। ऐसे में शिक्षकों को सार्वजनिक और निजी जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन करना आवश्यक है।
प्रधानाचार्य की जिम्मेदारीमदन दिलावर ने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय का मुखिया होता है और उसका आचरण पूरे विद्यालय के वातावरण को प्रभावित करता है। समय की पाबंदी, सकारात्मक व्यवहार और नेतृत्व क्षमता के जरिए प्रधानाचार्य अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रेरित कर सकते हैं।
एलुमनाई मीट से विकास को बढ़ावाविद्यालयों के विकास के लिए शिक्षा मंत्री ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि सभी प्रधानाचार्य अपने स्कूलों के पूर्व छात्रों (एलुमनाई) से संपर्क स्थापित करें। उन्होंने कहा कि कई पूर्व छात्र आज बड़े पदों पर कार्यरत हैं और वे अपने स्कूल के विकास में सहयोग करने के इच्छुक रहते हैं।
एलुमनाई मीट के माध्यम से स्कूलों में भवन, फर्नीचर, स्मार्ट क्लासरूम और अन्य सुविधाओं के लिए आर्थिक और संसाधन सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही स्थानीय भामाशाहों को भी स्कूल विकास में जोड़ने की बात कही गई।
नशामुक्ति अभियान पर जोरकार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों को नशामुक्त बनाने की अपील की। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्र में गुटखा, बीड़ी और तंबाकू का सेवन रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर सूची तैयार करने को भी कहा गया जो इन आदतों में लिप्त हैं।
बच्चों के नाम पर भी ध्यानएक अनोखी पहल के तहत शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रवेश के समय बच्चों के नाम पर भी ध्यान दिया जाए। यदि किसी बच्चे का नाम भविष्य में उसके लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है, तो अभिभावकों को समझाकर बेहतर नाम रखने का सुझाव दिया जाए। इसके लिए राज्य सरकार 3 हजार अच्छे नामों की सूची भी उपलब्ध कराएगी।
प्रार्थना सभा को बनाएं रोचकविद्यालयों में होने वाली प्रार्थना सभा को रोचक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए शिक्षा मंत्री ने सुझाव आमंत्रित किए। इस दौरान कई नवाचारों की जानकारी सामने आई, जिनमें बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास शामिल थे।
एआई आधारित शिक्षा की पहलकार्यक्रम में तकनीकी नवाचार भी चर्चा का विषय रहा। कोटा के अर्जुनपुरा स्कूल के व्याख्याता गजेंद्र गौतम द्वारा विकसित एआई आधारित ऐप्स की सराहना करते हुए शिक्षा मंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। इन ऐप्स के जरिए छात्र चैटबॉट की मदद से भूगोल विषय पढ़ रहे हैं, जो डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।
खेल गतिविधियों को बढ़ावाशिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के लिए खेल गतिविधियां अनिवार्य हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि पीटीआई शिक्षक भी रोजाना अलग-अलग कक्षाओं को खेल के पीरियड दें, जिससे सभी छात्रों को खेलों में भाग लेने का अवसर मिले।
शिक्षकों की ड्यूटी और व्यवस्थाएंउन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर अधिक से अधिक समय शिक्षण कार्य में लगाया जाएगा। बीएलओ और अन्य कार्यों में लगे शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
मानवीय मूल्यों पर जोरकार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षा विशेषज्ञों ने भी मानवीय मूल्यों की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पहले स्वयं इन मूल्यों को अपनाना होगा, तभी वे विद्यार्थियों में इन्हें विकसित कर पाएंगे।
निष्कर्षशिक्षा संवाद कार्यक्रम केवल एक बैठक नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के भविष्य का निर्माण करने वाले सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
राजस्थान सरकार की यह पहल आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
भुसावर कृषि महाविद्यालय को मिली नई सौगात, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने किया नए भवनों का लोकार्पण
राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने शुक्रवार को श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर की अधीनस्थ इकाई कृषि महाविद्यालय, भुसावर (भरतपुर) में नवनिर्मित प्रशासनिक एवं अकादमिक भवन, छात्रावास, कन्या छात्रावास और कैंटीन का लोकार्पण किया। समारोह में कृषि, उद्यानिकी एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, वैर विधायक बहादुर सिंह कोली, विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होती है और कृषि विश्वविद्यालय किसानों के भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक भवनों का निर्माण तभी सार्थक होगा, जब यहां से निकलने वाले विद्यार्थी ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से कृषि और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, सहनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनना चाहिए। राज्यपाल ने कृषि शिक्षा से प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने स्टार्टअप, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और कृषि अनुसंधान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया। कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल के स्वागत, वृक्षारोपण और नए भवनों के लोकार्पण से हुई। इसके बाद उन्होंने महाविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया तथा महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित 'भुसावर एट ए ग्लांस' का विमोचन भी किया। समारोह का शुभारंभ वंदे मातरम्, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ।
इस अवसर पर कृषि, उद्यानिकी एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि भुसावर क्षेत्र उद्यानिकी उत्पादन के लिए प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां आम, नींबू और अमरूद का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी तथा नकली खाद बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का भी आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर 32वीं तथा राजस्थान में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि अनुसंधान, उन्नत फसल किस्मों के विकास और कृषि विस्तार गतिविधियों के माध्यम से प्रदेश के 12 जिलों में किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाया जा रहा है।
समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया।
हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड ने मदन दिलावर से की भेंट, वार्षिक अधिवेशन पर चर्चा, पुस्तक विमोचन
हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से की शिष्टाचार भेंट, वार्षिक अधिवेशन पर हुई चर्चा
हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड राजस्थान राज्य के पदाधिकारियों ने मंगलवार सुबह उदयपुर सर्किट हाउस में प्रदेश के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान संगठन के राज्य, संभाग और जिला स्तर के अधिकारियों ने मंत्री का स्वागत-अभिनंदन किया और आगामी वार्षिक अधिवेशन को लेकर विस्तृत चर्चा की।
यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही, बल्कि संगठनात्मक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस अवसर पर संगठन और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
भव्य स्वागत और सम्मान समारोहउदयपुर सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। संभाग मुख्यालय आयुक्त (जनसंपर्क) श्री गौरीकांत शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मंत्री का मेवाड़ी परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया।
राज्य सचिव नरेंद्र ऑदिच्य ने उन्हें मेवाड़ी पाग पहनाई, वहीं राज्य संगठन आयुक्त रिपूदमन गिल ने स्काउट स्कार्फ भेंट किया। अन्य पदाधिकारियों ने उपर्णा ओढ़ाकर एवं पुष्प गुच्छ देकर मंत्री का अभिनंदन किया। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद सभी सदस्यों ने गर्मजोशी के साथ मंत्री का स्वागत किया।
वार्षिक अधिवेशन को लेकर अहम चर्चाबैठक के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने अप्रैल माह में आयोजित होने वाले वार्षिक अधिवेशन को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस अधिवेशन में राज्यभर से स्काउट एवं गाइड सदस्य शामिल होंगे, जिसमें विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, सांस्कृतिक गतिविधियां और संगठनात्मक बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
मंत्री मदन दिलावर ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
पुस्तक ‘अंतर्दृष्टि’ का हुआ विमोचनकार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कविता सागर द्वारा लिखित पुस्तक ‘अंतर्दृष्टि: समाज और मन – समाजशास्त्र, दर्शन और मनोविज्ञान की संयुक्त यात्रा’ का विमोचन।
यह पुस्तक मानव जीवन को समझने के तीन प्रमुख आयाम—दर्शन, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र—को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत करती है। पुस्तक में कुल आठ अध्याय शामिल हैं, जिनमें मानव व्यवहार, सामाजिक संरचना और मानसिक प्रक्रियाओं का गहन विश्लेषण किया गया है।
मंत्री मदन दिलावर ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनाएं समाज को समझने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने लेखिका के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए इसे शिक्षाविदों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया।
शिक्षा और सामाजिक विकास पर जोरइस अवसर पर मंत्री ने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्काउट एंड गाइड जैसे संगठन युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सेवा भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। स्काउट एंड गाइड जैसे संगठनों को और अधिक सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कई अधिकारी और पदाधिकारी रहे मौजूदइस कार्यक्रम में कई प्रमुख पदाधिकारी और अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें राज्य प्रशिक्षण आयुक्त प्रदीप मेघवाल, संभाग आयुक्त गोपाल मेहता मेनारिया, जिला सहायक राज्य संगठन आयुक्त शांता वैष्णव, जिला ट्रेनिंग कमिश्नर ईश्वरी रेगर, जिला मुख्यालय आयुक्त (रेंजर) डॉ. कविता सागर, राज्य मुख्यालय के पवन कुमार, भरतपुर के सहायक राज्य संगठन आयुक्त भरत लाल प्रजापत और जिला ऑर्गेनाइजर सुभाष सहित कई अन्य सदस्य शामिल रहे।
सभी ने मिलकर संगठन के विकास और आगामी योजनाओं पर चर्चा की और इसे और मजबूत बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।
संगठन की भूमिका और महत्वहिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड देश के प्रमुख युवा संगठनों में से एक है, जो बच्चों और युवाओं में अनुशासन, सेवा और नेतृत्व के गुण विकसित करता है। यह संगठन समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।
राजस्थान में भी यह संगठन तेजी से विस्तार कर रहा है और हजारों युवा इससे जुड़कर समाज सेवा में योगदान दे रहे हैं।
निष्कर्षउदयपुर में आयोजित यह शिष्टाचार भेंट कार्यक्रम संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय का प्रतीक रहा। वार्षिक अधिवेशन को लेकर हुई चर्चा और पुस्तक विमोचन जैसे कार्यक्रमों ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
मंत्री मदन दिलावर की मौजूदगी और उनके सकारात्मक दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि सरकार युवाओं के विकास और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन न केवल संगठन को मजबूती देंगे बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक साबित होंगे।
साइंस में 99.8%, आर्ट्स में 99.6% और कॉमर्स में 99.2% तक अंक, बेटियों का दबदबा कायम
राजस्थान: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणामों के साथ ही टॉपर लिस्ट भी सामने आ गई है। इस वर्ष तीनों स्ट्रीम—साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स—में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। खास बात यह रही कि टॉपर्स में बड़ी संख्या में छात्राओं ने जगह बनाकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
साइंस स्ट्रीम टॉपर लिस्टसाइंस स्ट्रीम में इस वर्ष प्रीति ने 500 में से 499 अंक हासिल कर 99.8 प्रतिशत के साथ प्रदेश में टॉप किया। इसके अलावा कई विद्यार्थियों ने 99 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए।
प्रीति – 499 अंक – 99.8% प्राची – 498 अंक – 99.6% सुरेश कुमार – 498 अंक – 99.6% प्रियांशु बंसल – 497 अंक – 99.4% दिव्या मीणा – 497 अंक – 99.4% आर्यन यादव – 497 अंक – 99.4% कृतिका मटोलिया – 497 अंक – 99.4% रावल – 497 अंक – 99.4% शिवराज चौधरी – 496 अंक – 99.2% हिमांशु बागड़ी – 496 अंक – 99.2%साइंस स्ट्रीम में टॉपर्स के अंक यह दर्शाते हैं कि प्रतिस्पर्धा इस बार काफी कड़ी रही और छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
आर्ट्स स्ट्रीम टॉपर लिस्टआर्ट्स स्ट्रीम में भी कई विद्यार्थियों ने 99 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर शानदार प्रदर्शन किया।
नरपत – 498 अंक – 99.6% नव्या मीणा – 498 अंक – 99.6% नैन्सी चौधरी – 498 अंक – 99.6% रविना कुमारी – 497 अंक – 99.4% आरती मुंड – 497 अंक – 99.4% सुनीता चौधरी – 497 अंक – 99.4% तनिषा राठौड़ – 497 अंक – 99.4% आशुतोष – 497 अंक – 99.4% खुशी चौधरी – 497 अंक – 99.4% सवाई राम – 497 अंक – 99.4%आर्ट्स स्ट्रीम में टॉपर्स की संख्या अधिक रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस स्ट्रीम में छात्रों की भागीदारी और प्रदर्शन दोनों मजबूत रहे।
कॉमर्स स्ट्रीम टॉपर लिस्टकॉमर्स स्ट्रीम में भी विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जहां टॉप स्कोर 99.2 प्रतिशत तक रहा।
कंगना कौशलानी – 496 अंक – 99.2% काश्वी शर्मा – 495 अंक – 99% भूमिका वैष्णव – 492 अंक – 98.2% मुस्कान – 491 अंक – 98.2% ईशा जांगिड़ – 490 अंक – 98% हर्षिता – 490 अंक – 98% करीना बंसल – 490 अंक – 98% सुनील चौधरी – 490 अंक – 98% रोहित सांगार – 489 अंक – 97.8% विजय जसोटानी – 489 अंक – 97.8% बेटियों का फिर दबदबातीनों स्ट्रीम की टॉपर लिस्ट पर नजर डालें तो साफ है कि इस वर्ष भी छात्राओं का प्रदर्शन शानदार रहा। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स—हर स्ट्रीम में बेटियों ने टॉप रैंक हासिल कर यह साबित किया कि वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
निष्कर्षRBSE 12वीं परीक्षा 2026 की टॉपर लिस्ट इस बात का प्रमाण है कि इस वर्ष विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत और लगन के साथ परीक्षा दी। उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों ने न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। बेटियों का शानदार प्रदर्शन समाज के लिए प्रेरणादायक है और यह शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाता है।
जैसलमेर के 2 सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र पास नहीं, 24 स्कूलों का रिजल्ट 50% से कम
राजस्थान के जैसलमेर जिले में 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले के दो सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र पास नहीं हुआ, जबकि 22 सरकारी और 2 निजी स्कूलों का परिणाम 50 प्रतिशत से भी कम रहा।
जानकारी के अनुसार, नाचना क्षेत्र के बाहला और पांचे का तला स्थित सरकारी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी परीक्षा में सफल नहीं हो सका। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाती है।
रिजल्ट का आंकड़ाजिले में जहां एक ओर 172 सरकारी स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किया, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। इससे शिक्षा विभाग के सामने गुणवत्ता सुधार की चुनौती खड़ी हो गई है।
शिक्षकों की कमी बनी बड़ी वजहभुर्जगढ़ के प्रधानाचार्य गणपतराम ने बताया कि गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री आए छात्रों की कॉपियों की दोबारा जांच करवाई जाएगी और आगे सुधार के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि स्कूल में 19 स्वीकृत पदों में से 7 पद खाली हैं। कई विषयों जैसे गणित, विज्ञान, संस्कृत और अंग्रेजी के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई।
वहीं प्रभुपुरा गांव के हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य सुभाष चौधरी ने बताया कि उनके स्कूल में 21 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 7 शिक्षक ही कार्यरत हैं और 14 पद खाली हैं। वरिष्ठ शिक्षकों की कमी भी परिणाम पर असर डाल रही है।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवालभुर्जगढ़ के सरपंच प्रतिनिधि जसवंतसिंह जोधा ने कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं पर खर्च तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि खराब परिणाम शिक्षा व्यवस्था की असल स्थिति को उजागर कर रहे हैं।
निष्कर्ष:जैसलमेर में सामने आए ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।