होर्मुज संकट के बीच UAE इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने को तैयार, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस समुद्री रास्ते को फिर से खोलने के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोर्स में शामिल होने को तैयार है।
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, UAE न केवल इस पहल का समर्थन कर रहा है, बल्कि सऊदी अरब सहित अन्य देशों को भी इस मिशन में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इस फोर्स का मुख्य उद्देश्य ईरान के हमलों से जहाजों की सुरक्षा करना और उन्हें सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना होगा।
बहरीन का समर्थन, UN में प्रस्ताव की तैयारी
इस पहल को अब तक बहरीन का समर्थन मिल चुका है। UAE और बहरीन मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि इस इंटरनेशनल टास्कफोर्स को वैश्विक मान्यता मिल सके।
अमेरिका भी चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट को जल्द से जल्द खोला जाए, लेकिन मौजूदा हालात में बिना सैन्य सुरक्षा के यह संभव नहीं माना जा रहा है।
ईरान के हमलों से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हालिया हमलों का सबसे अधिक असर UAE पर पड़ा है। खासतौर पर उसके तेल निर्यात से जुड़े बंदरगाहों को निशाना बनाया गया है। 14 मार्च को फुजैराह ऑयल फैसिलिटी पर हुए हमले ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी थी।
इसके अलावा, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगियों के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल, कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी बेस भी निशाने पर हैं।
ट्रम्प का दावा—ईरान ने टैंकर गुजरने दिए
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान ने हाल ही में 10 तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने दिया। उनके मुताबिक, इन टैंकरों पर पाकिस्तान का झंडा था और यह कदम ईरान की ओर से भरोसा जताने के लिए उठाया गया।
ट्रम्प ने कहा कि पहले 8 टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी गई और बाद में 2 और टैंकरों को जाने दिया गया, जिससे बातचीत के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं।
जंग के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब 28वें दिन में पहुंच चुका है। जहां एक ओर लगातार हवाई हमले और सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए हैं।
पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस युद्ध को आगे बढ़ने से रोका जा सके। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को एकतरफा बताते हुए उन पर असहमति जताई है।
वैश्विक असर—तेल, उड़ानें और ईंधन संकट
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का असर अब पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा वहन करता है। इसके बंद होने से तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
श्रीलंका जैसे देशों ने ईंधन की कमी के चलते राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया है, वहीं वियतनाम में एयरलाइंस ने महंगे जेट फ्यूल के कारण उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। UAE का इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने का फैसला इस संकट को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Golden Hind Desk