राजस्थान : राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को गाय वध (गोहत्या) और गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक इतनी बढ़ गई कि सदन की कार्यवाही दिनभर में पाँच बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के कारण प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए।
प्रश्नकाल में उठा मुद्दा
कार्यवाही की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई, जहां एक विधायक ने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने पर विचार कर रही है। इस पर सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि गोसंरक्षण राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में पहले से ही कई योजनाएं संचालित हैं। हालांकि, ‘राज्य माता’ दर्जे को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्रदेश में गोहत्या निषेध कानून पहले से लागू है और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
हिंगोनिया गौशाला का मामला बना विवाद का कारण
विपक्ष ने जयपुर की हिंगोनिया गौशाला से जुड़े हालिया घटनाक्रम का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति का नाम सामने आता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
इस दौरान विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और सदन के वेल में आ गए। जवाब में सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी आक्रामक रुख में दिखे, जिससे माहौल और गरमा गया।
बार-बार स्थगन
लगातार शोर-शराबे और हंगामे के चलते अध्यक्ष को पहले 20 मिनट के लिए सदन स्थगित करना पड़ा। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। विपक्ष की नारेबाजी और सत्ता पक्ष के जवाबी तेवर के बीच सदन को कुल पाँच बार स्थगित करना पड़ा।
आखिरकार दिन की कार्यवाही बाधित रही और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा टल गई।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर धार्मिक और संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए उछालने का आरोप लगाया। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही है और केवल बयानबाजी कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान इस तरह के टकराव से आगे भी सदन में गरमागरम बहस देखने को मिल सकती है।