अजमेर में आउटर रिंग रोड से बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था, ₹892 करोड़ की योजना को लेकर देवनानी ने गडकरी से की मुलाकात
राजस्थान के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहर अजमेर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और शहरी यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित आउटर रिंग रोड परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। इस महत्वपूर्ण परियोजना को गति देने के लिए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की और जल्द मंजूरी देने की मांग रखी।
इस मुलाकात के दौरान देवनानी ने अजमेर शहर की वर्तमान ट्रैफिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि अजमेर एक ऐसा शहर है, जहां धार्मिक, पर्यटन और प्रशासनिक गतिविधियों का अत्यधिक दबाव रहता है। ऐसे में शहर की सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे जाम की समस्या आम हो गई है।
देवनानी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में अजमेर के लिए प्रस्तावित आउटर रिंग रोड की डीपीआर तैयार करने हेतु 3 करोड़ रुपये की स्वीकृति पहले ही दे दी है। इसके साथ ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा इस परियोजना के लिए लगभग 892 करोड़ रुपये की विस्तृत योजना तैयार कर ली गई है। उन्होंने कहा कि अब इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी बेहद जरूरी है।
अजमेर की भौगोलिक और सांस्कृतिक स्थिति को देखते हुए यह परियोजना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। शहर में विश्व प्रसिद्ध तीर्थराज पुष्कर स्थित है, जहां हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इसके अलावा, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह भी अजमेर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाती है। इन दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण शहर में सालभर भारी संख्या में लोगों का आवागमन बना रहता है।
इसके अलावा अजमेर प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां कई राज्य स्तरीय विभागों के मुख्यालय स्थित हैं, जिसके चलते सरकारी कामकाज के लिए भी बड़ी संख्या में लोग शहर में आते-जाते रहते हैं। देवनानी ने बताया कि वर्तमान में अजमेर से रोजाना करीब 800 रोडवेज बसों का अंतरजिला और अंतरराज्यीय संचालन होता है, जिनसे हजारों यात्रियों का आवागमन होता है।
पर्यटन सीजन के दौरान स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। पुष्कर मेले जैसे बड़े आयोजनों के समय लाखों श्रद्धालु और पर्यटक अजमेर-पुष्कर क्षेत्र में पहुंचते हैं, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती है। इसके अलावा, भारी वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही भी शहर की सड़कों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
इन सभी समस्याओं को देखते हुए आउटर रिंग रोड परियोजना को एक दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। देवनानी ने कहा कि रिंग रोड बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का प्रवेश कम होगा और बाहरी यातायात को शहर के बाहर से ही डायवर्ट किया जा सकेगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि प्रदूषण स्तर में भी गिरावट आएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना से अजमेर और पुष्कर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। बेहतर सड़क सुविधा मिलने से पर्यटकों को आवागमन में आसानी होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है। देवनानी ने कहा कि रिंग रोड के निर्माण से अजमेर विकास प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। इसके आसपास नए आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों का विकास संभव होगा, जिससे शहर के विस्तार को भी नई दिशा मिलेगी।
मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना के महत्व को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि इस पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अजमेर जैसे महत्वपूर्ण शहर के विकास के लिए इस तरह की परियोजनाएं आवश्यक हैं और केंद्र सरकार इस दिशा में सहयोग करेगी।
देवनानी ने गडकरी से अनुरोध किया कि तैयार डीपीआर के आधार पर जल्द से जल्द आवश्यक बजट स्वीकृत किया जाए और संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि आमजन को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
इस दौरान देवनानी ने अन्य केंद्रीय नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी से भी चर्चा की। इन बैठकों में अजमेर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और अन्य विकास कार्यों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना समय पर शुरू होती है और निर्धारित अवधि में पूरी हो जाती है, तो अजमेर की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहर में यातायात का दबाव कम होगा और लोगों को सुगम व सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।
कुल मिलाकर, आउटर रिंग रोड परियोजना अजमेर के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। यह न केवल ट्रैफिक समस्या का समाधान करेगी, बल्कि शहर के समग्र विकास को भी नई दिशा देगी। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस परियोजना को कब मंजूरी देती है और इसका निर्माण कार्य कब शुरू होता है।
Golden Hind Desk