कोटा डोरिया-एरी सिल्क से बनेगा प्रीमियम फैब्रिक

कोटा डोरिया और एरी सिल्क का संगम, भारत को मिलेगा नया प्रीमियम हैंडलूम फैब्रिक

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कोटा डोरिया को मिलेगी नई पहचान, पूर्वोत्तर के एरी सिल्क से होगा संगम

प्रीमियम फैब्रिक विकसित करने की दिशा में बड़ी पहल, ओम बिरला से मिला प्रतिनिधिमंडल

जयपुर : राजस्थान की पारंपरिक हस्तकरघा कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। अब राजस्थान के प्रसिद्ध कोटा डोरिया और पूर्वोत्तर भारत के मशहूर एरी सिल्क को मिलाकर नया प्रीमियम फैब्रिक विकसित किया जाएगा। इस पहल को भारतीय हस्तकरघा उद्योग के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

रविवार को कोटा स्थित लोकसभा कैंप कार्यालय में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के सचिव संजय जाजू के नेतृत्व में फैशन डिजाइनरों और बुनकरों का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मिला। इस दौरान दोनों पारंपरिक वस्त्र शैलियों के संयोजन पर विस्तार से चर्चा हुई।

ओम बिरला ने कहा कि कोटा डोरिया केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि हाड़ौती क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और बुनकरों की वर्षों की मेहनत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब इसे पूर्वोत्तर के एरी सिल्क के साथ जोड़ा जाएगा तो देश की दो समृद्ध हस्तकरघा परंपराओं को नई पहचान मिलेगी और हजारों कारीगरों के लिए रोजगार एवं बाजार के नए अवसर खुलेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री Narendra Modi के ‘5F Vision’ — Farm to Fibre, Fibre to Fabric, Fabric to Fashion, Fashion to Foreign — को मजबूती देने वाली है। इससे भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल सकती है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस परियोजना से राजस्थान और पूर्वोत्तर भारत के बुनकरों, डिजाइनरों और हस्तशिल्प कारीगरों को एक साझा मंच मिलेगा। साथ ही भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय फैशन इंडस्ट्री में नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। कोटा के फैशन डिजाइनरों ने भी इस टेक्सटाइल फ्यूजन को लेकर अपने सुझाव साझा किए।

इससे पहले DoNER सचिव संजय जाजू ने कैथून स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का दौरा किया। उनके साथ जिला कलेक्टर पीयूष समारिया और नॉर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट्स एंड हैंडलूम्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NEHHDC) के प्रतिनिधि मारा कोचो भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कोटा डोरिया की पारंपरिक बुनाई प्रक्रिया को करीब से देखा और एरी सिल्क के साथ उसके संयोजन की संभावनाओं पर चर्चा की।

संजय जाजू ने कहा कि प्रस्तावित योजना के तहत ऐसा विशेष फैब्रिक तैयार किया जाएगा जिसमें एरी सिल्क की मुलायम बनावट और कोटा डोरिया की हल्की एवं पारदर्शी बुनावट का बेहतरीन मेल होगा। इस नए फैब्रिक को देश और विदेश के प्रीमियम बाजारों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा।

जल्द होगा एमओयू

इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए NEHHDC और राजस्थान सरकार के जिला उद्योग केंद्र (DIC) के बीच जल्द ही एमओयू किए जाने की तैयारी है। इसके तहत संयुक्त डिजाइन विकास, कारीगरों के प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा।

गौरतलब है कि एरी सिल्क अपनी मजबूती, गर्माहट और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के लिए जाना जाता है, जबकि कोटा डोरिया अपनी खास चौकड़ीदार बुनावट और हल्केपन के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में दोनों पारंपरिक वस्त्र शैलियों का यह संगम भारतीय हस्तकरघा उद्योग को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

Golden Hind Desk