मालपुरा में करोड़ों के संदिग्ध GST कर अपवंचन का खुलासा, 4 फर्मों पर राज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई
राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में तिलहन, खाद्य तेल और रिफाइंड चीनी के कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के संदिग्ध कर अपवंचन का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की प्रवर्तन शाखा-तृतीय (Enforcement Wing-III) ने इंटेलिजेंस इनपुट और डेटा विश्लेषण के आधार पर चार प्रमुख व्यावसायिक फर्मों पर सर्च एवं जब्ती (Search & Seizure) की बड़ी कार्रवाई की है।
प्रारंभिक जांच में विभाग को बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग और बिना वास्तविक माल परिवहन के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पास किए जाने के संकेत मिले हैं। विभाग का मानना है कि इस कथित गड़बड़ी से सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इंटेलिजेंस इनपुट के बाद हुई कार्रवाई
राज्य कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई इंटेलिजेंस इनपुट और विश्लेषणात्मक डेटा के आधार पर की गई। विभाग को लंबे समय से इन फर्मों के कारोबारी लेनदेन में अनियमितताओं की सूचना मिल रही थी। इसके बाद विस्तृत निगरानी और दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर मालपुरा स्थित चार फर्मों पर एक साथ छापेमारी की गई।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने फर्मों के व्यावसायिक रिकॉर्ड, लेखा दस्तावेज, खरीद-बिक्री से जुड़े बिल और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की।
फर्जी बिलिंग के मिले संकेत
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि संबंधित फर्मों द्वारा माल का वास्तविक परिवहन किए बिना ही बड़ी मात्रा में बिल जारी किए गए। ऐसे बिलों के माध्यम से अन्य कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ दिए जाने की आशंका जताई गई है।
जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट केवल वास्तविक व्यापारिक लेनदेन और वैध कर भुगतान की स्थिति में ही स्वीकार्य होता है। यदि बिना माल की आपूर्ति के केवल बिल जारी किए जाते हैं तो इसे फर्जी बिलिंग और कर अपवंचन की श्रेणी में माना जाता है।
दस्तावेजों का नहीं मिला संतोषजनक मिलान
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान उपलब्ध कराए गए व्यावसायिक दस्तावेजों का लेखा पुस्तकों से संतोषजनक मिलान नहीं हो सका। कई वित्तीय रिकॉर्ड और कारोबारी दस्तावेजों में भी विसंगतियां पाई गईं।
इसके बाद जांच दल ने आगे की जांच के लिए कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए।
लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त
सर्च अभियान के दौरान विभाग ने बिल बुक, रजिस्टर, वित्तीय रिकॉर्ड के अलावा लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं। इन उपकरणों में मौजूद डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच और विस्तृत स्क्रूटनी की जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड से वास्तविक लेनदेन, बिलिंग पैटर्न और कर भुगतान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
एक ही व्यक्ति चला रहा था चारों फर्म
प्रारंभिक जांच में विभाग के सामने एक और महत्वपूर्ण तथ्य आया है। अधिकारियों के अनुसार चारों व्यावसायिक फर्मों का संचालन एक ही व्यक्ति द्वारा किए जाने के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन फर्मों का उपयोग व्यवस्थित तरीके से फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के नेटवर्क के रूप में किया जा रहा था।
6.56 करोड़ रुपये के लेनदेन जांच के दायरे में
राज्य कर विभाग के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान इन चारों फर्मों के करीब 6.56 करोड़ रुपये के कर संबंधी संव्यवहार संदिग्ध पाए गए हैं।
विभाग अब इन सभी लेनदेन की विस्तृत जांच कर रहा है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इनमें वास्तविक कारोबार कितना था और फर्जी बिलिंग के जरिए कितना इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया या पास किया गया।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है। जब्त किए गए दस्तावेजों, कंप्यूटर डेटा और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की गहन जांच जारी है।
जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि—
- फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट की वास्तविक राशि कितनी है।
- वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां कितनी हुईं।
- कर अपवंचन की कुल राशि कितनी है।
- किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका इसमें शामिल है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित फर्मों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ जीएसटी अधिनियम के तहत कर वसूली, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कर चोरी पर विभाग की सख्ती जारी
राज्य कर विभाग लगातार डेटा एनालिटिक्स, इंटेलिजेंस इनपुट और डिजिटल निगरानी के जरिए संदिग्ध कारोबारियों पर नजर रख रहा है। विभाग का कहना है कि फर्जी बिलिंग, बिना माल परिवहन के बिल जारी करना और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करना राजस्व को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे मामलों में भविष्य में भी इसी तरह की प्रवर्तन कार्रवाई जारी रहेगी।
GOLDEN HIND DESK