प्रदेश में गत ढाई वर्ष में एक करोड़ से अधिक वंचित पात्रों को मिली खाद्य सुरक्षा, सरकार ने बताया सामाजिक न्याय की बड़ी उपलब्धि
राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के दायरे का व्यापक विस्तार करते हुए पिछले ढाई वर्षों में 1 करोड़ 77 हजार 182 वंचित एवं पात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ा है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने शुक्रवार को सचिवालय स्थित मंत्रालय भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक खाद्य सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान में कुल 4.37 करोड़ लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें पिछले ढाई वर्षों में जोड़े गए लाभार्थियों की संख्या कुल लाभार्थियों का लगभग 23 प्रतिशत है। उनके अनुसार यह केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मिलने से परिवारों को नियमित खाद्यान्न उपलब्ध होने के साथ-साथ कई अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आया है।
सुमित गोदारा ने कहा कि सरकार ने खाद्य सुरक्षा से वंचित पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2024 से 31 अगस्त 2024 के बीच 12 लाख 95 हजार 664 नए लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल किया गया। इसके बाद 26 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा खाद्य सुरक्षा पोर्टल दोबारा शुरू किए जाने के पश्चात बड़े स्तर पर आवेदन प्राप्त हुए और 87 लाख 81 हजार 518 पात्र व्यक्तियों को एनएफएसए के अंतर्गत जोड़ा गया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से खाद्य सुरक्षा सूची में नाम जुड़ने की प्रतीक्षा कर रहे लाखों परिवारों को इस निर्णय से राहत मिली। विभाग ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने, पात्रता की जांच में पारदर्शिता लाने और समयबद्ध तरीके से लाभ प्रदान करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष प्रयास किए। मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी सरकार प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए इसी तरह कार्य करती रहेगी।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा योजना के विस्तार को लेकर उल्लेखनीय कार्य हुआ है। जयपुर, सीकर, जोधपुर, बाड़मेर और भीलवाड़ा ऐसे जिले रहे जहां सर्वाधिक नए लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने पात्र परिवारों की पहचान कर समय पर उनका पंजीकरण सुनिश्चित किया, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों को योजना का लाभ मिला।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री गोदारा ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम केवल मुफ्त राशन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि एनएफएसए के तहत पंजीकृत परिवारों को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी इन्हीं परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी योजना के तहत 450 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का निःशुल्क दुर्घटना बीमा प्रदान किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत 25 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है। मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और घरेलू खर्चों में महत्वपूर्ण राहत मिल रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उनका लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से विभाग लगातार तकनीकी सुधार, ई-गवर्नेंस और पारदर्शी व्यवस्था पर काम कर रहा है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े डेटा का नियमित सत्यापन और डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
मंत्री ने मानसून के दौरान राशन वितरण की विशेष व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए लाभार्थियों को तीन माह का निःशुल्क राशन एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को राहत मिलेगी तथा उन्हें बार-बार उचित मूल्य की दुकानों पर नहीं जाना पड़ेगा।
प्रेस वार्ता में सुमित गोदारा ने 'गिव अप अभियान' को भी सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि नवंबर 2024 में शुरू किए गए इस अभियान के तहत आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा का लाभ छोड़ने की अपील की गई थी। इस अभियान को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और लगभग 67 लाख लोगों ने स्वेच्छा से अपना नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटवा लिया।
इसके अतिरिक्त करीब 27 लाख लाभार्थियों के ई-केवाईसी नहीं कराने के कारण उनके नाम भी सूची से हटाए गए। मंत्री ने कहा कि इन दोनों प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप राज्य की 4.46 करोड़ की निर्धारित एनएफएसए सीमा के मुकाबले लगभग 1.03 करोड़ स्थान रिक्त हुए। इन रिक्त स्थानों पर वास्तविक पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों को शामिल किया गया, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे लाखों लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल सका।
उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके पात्र हैं। इससे खाद्य सुरक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है। मंत्री के अनुसार, इस अभियान ने यह भी साबित किया कि यदि समाज का सक्षम वर्ग स्वेच्छा से आगे आए तो सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
सुमित गोदारा ने बताया कि राजस्थान सरकार के 'गिव अप अभियान' की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में इस पहल को राजस्थान सरकार की 'बेस्ट प्रैक्टिस' के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह राज्य सरकार की पारदर्शी कार्यप्रणाली और नवाचार आधारित प्रशासनिक प्रयासों की पहचान है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है कि प्रदेश का कोई भी पात्र और जरूरतमंद परिवार खाद्य सुरक्षा के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए विभाग लगातार पात्र व्यक्तियों की पहचान, तकनीकी सुधार, ई-केवाईसी, पोर्टल संचालन और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से योजना का विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी सरकार इसी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी ताकि सामाजिक सुरक्षा का दायरा और मजबूत हो तथा गरीब परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा योजना केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों के जीवन में स्थिरता, सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने वाली व्यापक सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि जब जरूरतमंद परिवारों को भोजन, स्वास्थ्य, बीमा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा मिलती है, तभी समावेशी विकास का लक्ष्य वास्तविक रूप से प्राप्त किया जा सकता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा के साथ अन्य कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रभावी ढंग से लागू कर रही है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक पात्र नागरिक को उसका अधिकार समय पर मिल सके।
GOLDEN HIND DESK