पीएम-कुसुम योजना ने अन्नदाता को बनाया ऊर्जादाता, राजस्थान बना हरित ऊर्जा का अग्रणी केंद्र मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पीएम-कुसुम योजना के लाभार्थी किसानों से किया संवाद
राजस्थान में कृषि क्षेत्र को सस्ती, भरोसेमंद और दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर देने की दिशा में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी पीएम-कुसुम योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को योजना के लाभार्थी किसानों से संवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों की खुशहाली और आर्थिक सुरक्षा के लिए बीज से बाजार तक अनेक योजनाएं संचालित की हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पीएम-कुसुम जैसी योजनाएं किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएम-कुसुम योजना किसानों के लिए केवल सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह अतिरिक्त आय, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन रही है।
5 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के 2,300 से ज्यादा सौर संयंत्र स्थापित
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार राजस्थान में पीएम-कुसुम योजना के कम्पोनेंट-ए और कम्पोनेंट-सी के अंतर्गत अब तक 5 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के 2 हजार 300 से ज्यादा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियां सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। प्रदेश में वर्षभर पर्याप्त धूप उपलब्ध रहने के कारण सौर ऊर्जा को कृषि क्षेत्र से जोड़ने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इसी क्षमता का उपयोग करते हुए राज्य में किसानों, कृषि फीडरों और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से स्थापित सौर संयंत्र न केवल बिजली की जरूरत पूरी करने में सहायता कर रहे हैं, बल्कि इससे कृषि क्षेत्र में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फीडर स्तर पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता के आधार पर राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। यह उपलब्धि प्रदेश की अक्षय ऊर्जा क्षमता और राज्य सरकार की हरित ऊर्जा के क्षेत्र में प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
2027 तक किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का संकल्प
राजस्थान सरकार ने वर्ष 2027 तक प्रदेश के किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।
वर्तमान में प्रदेश के 26 जिलों के 3 लाख 34 हजार से अधिक किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों के किसानों को दिन के समय कृषि बिजली उपलब्ध कराई जाए।
दिन में बिजली मिलने से किसानों को सिंचाई के दौरान कई व्यावहारिक कठिनाइयों से राहत मिलती है। रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करने की आवश्यकता कम होती है और किसान अपनी कृषि गतिविधियों को अधिक सुविधाजनक तरीके से संचालित कर सकते हैं।
दिन के समय बिजली की उपलब्धता का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि सौर ऊर्जा उत्पादन और कृषि बिजली आपूर्ति को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में स्थायित्व बढ़ाने के साथ कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को भी लाभ मिल सकता है।
बिजली व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही सरकार
किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लिए केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मजबूत प्रसारण और वितरण तंत्र भी आवश्यक है। राज्य सरकार ने इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में प्रसारण तंत्र को मजबूत करने के लिए 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के 61 ग्रिड सब स्टेशन तथा 33 केवी के 498 सब स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
इन विद्युत अधोसंरचना परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने, विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने तथा नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित बिजली को प्रभावी ढंग से ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता को मजबूत करना है।
राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य में बिजली के मजबूत नेटवर्क का महत्व और भी अधिक है। सौर ऊर्जा उत्पादन केंद्र अक्सर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थापित होते हैं। ऐसे में उत्पादन केंद्रों से बिजली को उपभोक्ताओं और कृषि फीडरों तक पहुंचाने के लिए मजबूत प्रसारण व्यवस्था जरूरी है।
12,400 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने पर काम
नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ ऊर्जा भंडारण भी महत्वपूर्ण हो गया है। सौर ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से दिन के समय होता है, जबकि बिजली की मांग अलग-अलग समय पर बदलती रहती है। ऐसे में बैटरी ऊर्जा भंडारण जैसी तकनीक भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान में 12 हजार 400 मेगावाट ऑवर बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित होने से बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक प्रभावी उपयोग का रास्ता भी तैयार होगा।
राजस्थान में सौर ऊर्जा की विशाल क्षमता को देखते हुए ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं भविष्य में राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
किसान बने ऊर्जा उत्पादक
पीएम-कुसुम योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक किसानों को ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया से जोड़ना है। परंपरागत रूप से किसान बिजली और सिंचाई के उपभोक्ता के रूप में देखे जाते रहे हैं, लेकिन सौर ऊर्जा के विस्तार ने उन्हें ऊर्जा उत्पादक बनने का अवसर भी दिया है।
योजना के माध्यम से किसान अपनी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने अथवा विभिन्न मॉडल के माध्यम से सौर ऊर्जा उत्पादन से जुड़ सकते हैं। इससे कृषि क्षेत्र में आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
मुख्यमंत्री ने इसी बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि पीएम-कुसुम योजना ने अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह बदलाव केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी इसका व्यापक महत्व है। जब किसान ऊर्जा उत्पादन से जुड़ते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश, रोजगार, तकनीकी सेवाओं और आधारभूत ढांचे के विकास की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
राजस्थान की हरित ऊर्जा क्षमता को मिल रहा विस्तार
राजस्थान देश के प्रमुख सौर ऊर्जा राज्यों में शामिल है। प्रदेश के बड़े हिस्से में उपलब्ध खुली भूमि और वर्षभर पर्याप्त सौर विकिरण सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराते हैं।
राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को सौर ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास राजस्थान की व्यापक हरित ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ कृषि क्षेत्र की बिजली आवश्यकताओं को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा करना है।
पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर संयंत्रों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ने की संभावना है। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम करने और कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में भी योगदान मिल सकता है।
किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि की राशि को 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया गया है। इसके अलावा किसानों को बिजली बिलों में 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है।
कृषि क्षेत्र में बिजली की लागत किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव डालती है। ऐसे में बिजली बिलों पर मिलने वाला अनुदान किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता का माध्यम है।
सरकार का प्रयास है कि कृषि क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता, लागत और विश्वसनीयता से जुड़ी चुनौतियों को कम किया जाए। दिन में बिजली की उपलब्धता और सौर ऊर्जा के विस्तार को इसी व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
पशुपालकों के लिए भी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 1 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ पशुपालन का भी महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में किसानों और पशुपालकों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाली योजनाएं ग्रामीण परिवारों की आय के विविधीकरण में मदद कर सकती हैं।
कृषि, पशुपालन, ऊर्जा और वित्तीय सहायता को एक-दूसरे से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाभार्थी किसानों से मुख्यमंत्री का सीधा संवाद
पीएम-कुसुम योजना के लाभार्थी किसानों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सौर ऊर्जा उत्पादक किसानों से उनके अनुभव जाने और योजना से उनके जीवन में आए बदलावों पर चर्चा की।
किसानों से संवाद का उद्देश्य केवल योजना की उपलब्धियों को प्रस्तुत करना नहीं था, बल्कि जमीन पर योजना के प्रभाव को समझना भी था। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के बाद किसानों के सामने आने वाले अवसरों, अनुभवों और व्यावहारिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई।
किसानों द्वारा साझा किए गए अनुभव इस बात को समझने में महत्वपूर्ण हैं कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं का ग्रामीण परिवारों की आय, ऊर्जा उपलब्धता और कृषि गतिविधियों पर किस प्रकार प्रभाव पड़ रहा है।
जोधपुर, बीकानेर और अजमेर से भी जुड़े किसान
कार्यक्रम में जयपुर के अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी अधिकारी और सौर ऊर्जा उत्पादक किसान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
जोधपुर, बीकानेर और अजमेर से अधिकारियों तथा सौर ऊर्जा उत्पादक किसानों ने वीसी के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।
राजस्थान के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से किसानों की भागीदारी यह दर्शाती है कि सौर ऊर्जा आधारित कृषि योजनाओं का विस्तार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक किया जा रहा है।
कृषि और ऊर्जा के बीच मजबूत हो रहा संबंध
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता सिंचाई तथा बिजली की उपलब्धता से गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे में कृषि बिजली व्यवस्था को मजबूत करना किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जाता है।
पीएम-कुसुम योजना इस संबंध को एक नए स्तर पर ले जाती है। इसमें किसान बिजली के केवल उपभोक्ता नहीं रहते, बल्कि सौर ऊर्जा उत्पादन से जुड़कर ऊर्जा व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं।
इस मॉडल के जरिए एक ओर सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास होता है, तो दूसरी ओर सौर ऊर्जा के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। यही कारण है कि पीएम-कुसुम योजना को कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के बीच सेतु के रूप में देखा जा रहा है।
दिन की बिजली से किसानों को राहत
कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली उपलब्ध होना किसानों के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। रात में सिंचाई करने के दौरान किसानों को खेतों में सुरक्षा, मौसम और अन्य परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
दिन में बिजली मिलने से किसान अपनी सिंचाई गतिविधियों को अपने कृषि कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्थित कर सकते हैं। इससे कृषि कार्यों की योजना बनाने में सुविधा मिलती है और खेतों में बिजली उपकरणों के संचालन की निगरानी भी आसान हो सकती है।
राजस्थान सरकार द्वारा 2027 तक सभी किसानों को दिन में कृषि बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर निर्धारित किया गया है।
सौर ऊर्जा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
सौर ऊर्जा परियोजनाओं का प्रभाव केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहता। परियोजनाओं की स्थापना, संचालन और रखरखाव से जुड़े कार्यों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और सेवाओं की मांग पैदा हो सकती है।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में तकनीशियन, विद्युत कर्मचारी, रखरखाव सेवाएं, परिवहन, सुरक्षा और अन्य सहायक सेवाओं की जरूरत होती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर विकसित होने की संभावना रहती है।
किसानों की भूमि और स्थानीय संसाधनों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।
हरित ऊर्जा की दिशा में राजस्थान की भूमिका
राजस्थान में अक्षय ऊर्जा की विशाल संभावनाओं को देखते हुए राज्य को देश के प्रमुख हरित ऊर्जा केंद्रों में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सौर ऊर्जा संयंत्रों की बढ़ती संख्या, विद्युत प्रसारण नेटवर्क का विस्तार और ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की योजनाएं राज्य की ऊर्जा व्यवस्था में दीर्घकालिक बदलाव की ओर संकेत करती हैं।
पीएम-कुसुम योजना इस बदलाव को कृषि क्षेत्र तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। यदि किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की प्रक्रिया व्यापक स्तर पर जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
किसानों के लिए योजना क्यों महत्वपूर्ण
पीएम-कुसुम योजना की उपयोगिता को कई स्तरों पर समझा जा सकता है। पहला, यह कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है। दूसरा, यह किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ती है। तीसरा, यह कृषि बिजली आपूर्ति को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में मदद कर सकती है।
इसके अलावा, सौर ऊर्जा उत्पादन से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। इस तरह योजना का उद्देश्य केवल बिजली उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि किसानों को ऊर्जा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना भी है।
मुख्यमंत्री ने इसी व्यापक उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि पीएम-कुसुम योजना किसानों के लिए अतिरिक्त आय और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कृषि क्षेत्र
कृषि क्षेत्र में ऊर्जा की मांग लगातार बनी रहती है। सिंचाई पंप, कृषि उपकरण और अन्य गतिविधियों के लिए बिजली आवश्यक है। ऐसे में सौर ऊर्जा जैसे स्थानीय और नवीकरणीय स्रोत कृषि क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सौर ऊर्जा का विस्तार किसानों को भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जोड़ने का अवसर देता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा उत्पादन का विकेंद्रीकरण भी संभव हो सकता है।
राजस्थान में पीएम-कुसुम योजना के तहत 5 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित होना इस दिशा में राज्य की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
सरकार का लक्ष्य: सभी जिलों में दिन की बिजली
वर्तमान में 26 जिलों के 3.34 लाख से अधिक किसानों को दिन में कृषि बिजली उपलब्ध होने के बाद अब सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सभी जिलों तक इस सुविधा का विस्तार करना है।
2027 तक सभी किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा करने के लिए उत्पादन, प्रसारण और वितरण तीनों स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक होंगे।
ग्रिड सब स्टेशनों की स्थापना, उच्च क्षमता वाले प्रसारण नेटवर्क का विस्तार और ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा हैं।
किसानों की भागीदारी से सफल होगी ऊर्जा क्रांति
किसी भी योजना की सफलता केवल सरकारी निवेश से नहीं, बल्कि लाभार्थियों की सक्रिय भागीदारी से तय होती है। पीएम-कुसुम योजना में किसानों की भागीदारी विशेष महत्व रखती है क्योंकि योजना सीधे ग्रामीण परिवारों और कृषि गतिविधियों से जुड़ी है।
यदि किसान सौर ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हैं तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा उपयोग का स्वरूप बदल सकता है।
किसानों को तकनीकी जानकारी, वित्तीय सहायता और परियोजनाओं के संचालन से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण
सौर ऊर्जा जीवाश्म ईंधनों पर आधारित बिजली उत्पादन की तुलना में स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत है। इसके विस्तार से दीर्घकाल में ऊर्जा क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में सहायता मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र को सौर ऊर्जा से जोड़ना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। यदि इस आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा किया जाए तो ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों लक्ष्यों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है।
राजस्थान में सौर ऊर्जा की प्राकृतिक क्षमता इस दिशा में राज्य को विशेष अवसर प्रदान करती है।
किसानों की आर्थिक मजबूती पर फोकस
राज्य सरकार की ओर से किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने, बिजली बिलों पर अनुदान देने, ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने और सौर ऊर्जा से किसानों को जोड़ने जैसी पहलों को किसानों की आर्थिक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।
किसान की आय केवल फसल उत्पादन पर निर्भर न रहे और उसके पास आय के अतिरिक्त साधन हों, तो ग्रामीण परिवार आर्थिक जोखिमों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं।
सौर ऊर्जा इसी प्रकार के वैकल्पिक आय स्रोतों में से एक बन सकती है। कृषि भूमि और ऊर्जा उत्पादन के बीच तालमेल स्थापित करके किसान अपनी आर्थिक गतिविधियों का विस्तार कर सकते हैं।
राजस्थान में ऊर्जा क्षेत्र का बदलता स्वरूप
राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ-साथ सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का महत्व बढ़ रहा है।
इस परिवर्तन में तीन प्रमुख घटक दिखाई देते हैं—सौर ऊर्जा उत्पादन, मजबूत विद्युत प्रसारण व्यवस्था और ऊर्जा भंडारण क्षमता।
पीएम-कुसुम योजना इन तीनों क्षेत्रों को कृषि से जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। इससे कृषि क्षेत्र ऊर्जा परिवर्तन का केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि भागीदार भी बन सकता है।
मुख्यमंत्री का संदेश: किसान केवल अन्नदाता नहीं, ऊर्जादाता भी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में किसानों की बदलती भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से देश का किसान अन्नदाता होने के साथ ऊर्जादाता के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
यह संदेश ग्रामीण भारत में ऊर्जा उत्पादन के विकेंद्रीकरण की संभावनाओं को रेखांकित करता है। किसान यदि ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनते हैं तो इससे बिजली व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर उत्पादन की क्षमता बढ़ सकती है।
राजस्थान में सौर ऊर्जा के लिए अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए यह मॉडल आने वाले वर्षों में और विस्तार पा सकता है।
आगे की राह
राजस्थान सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती स्थापित क्षमता को प्रभावी ढंग से उपयोग में लाना और दिन की कृषि बिजली की सुविधा को प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाना है।
इसके लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ प्रसारण नेटवर्क, वितरण व्यवस्था, ऊर्जा भंडारण और किसानों की भागीदारी को समान महत्व देना होगा।
किसानों को समय पर जानकारी, तकनीकी सहायता और वित्तीय प्रक्रियाओं में सरलता उपलब्ध कराना भी आवश्यक होगा। इसके साथ ही सौर संयंत्रों के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
यदि इन सभी क्षेत्रों में समन्वित रूप से काम आगे बढ़ता है तो राजस्थान कृषि और हरित ऊर्जा के बीच एक मजबूत मॉडल विकसित कर सकता है।
राजस्थान के लिए बड़ी संभावना
राजस्थान में 5 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के 2,300 से ज्यादा सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना और फीडर स्तर पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता के मामले में देश में प्रथम स्थान हासिल करना राज्य की बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता को दर्शाता है।
वर्तमान में 26 जिलों के 3.34 लाख से अधिक किसानों को दिन में कृषि बिजली मिल रही है। सरकार का लक्ष्य इसे पूरे प्रदेश तक पहुंचाना है।
61 ग्रिड सब स्टेशनों और 498 33 केवी सब स्टेशनों की स्थापना के साथ-साथ 12,400 मेगावाट ऑवर बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता की परियोजनाओं पर काम ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश की दिशा को स्पष्ट करता है।
इन प्रयासों के केंद्र में किसान हैं। यदि ऊर्जा उत्पादन और कृषि बिजली व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है तो इसका लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की आय और पर्यावरण—तीनों स्तरों पर दिखाई दे सकता है।
निष्कर्ष
पीएम-कुसुम योजना राजस्थान के किसानों के लिए ऊर्जा, आय और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा करने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा योजना के लाभार्थी किसानों से संवाद के दौरान प्रदेश में हुई प्रगति और भविष्य के लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।
राजस्थान में 5 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के 2,300 से ज्यादा सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना, 26 जिलों के 3.34 लाख से अधिक किसानों को दिन में कृषि बिजली की उपलब्धता और वर्ष 2027 तक सभी किसानों को दिन की बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य राज्य की ऊर्जा नीति की दिशा को स्पष्ट करता है।
सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ मजबूत प्रसारण तंत्र और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की योजनाएं भी भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत आधार दे सकती हैं।
किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनाने का विचार केवल एक नारे तक सीमित न रहकर यदि व्यापक स्तर पर जमीन पर लागू होता है, तो राजस्थान देश में कृषि और हरित ऊर्जा के एक प्रभावी मॉडल के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवाद कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि किसान की समृद्धि, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास को साथ लेकर चलना ही राजस्थान के ग्रामीण भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा है।
GOLDEN HIND DESK